देहरादून, 23 मार्च, 2026.दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में स्पिक मैके के सहयोग से केन्द्र के सभागार में सुपरिचित सारंगी वादक उस्ताद कमाल साबरी द्वारा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शानदार कार्यक्रम आयोजित किया गया.
आज के कार्यक्रम में साबरी के सारंगी वादन में तबले पर जोरदार जुगलबन्दी बनारस के युवा तबला वादक कलाकार श्री रजनीश मिश्रा ने की.
आसरा ट्रस्ट के बच्चों के साथ कमाल साबरी ने सांरगी व तबले पर परिचयात्मक छात्रों को दी. इन वाद्य यन्त्रों को वादन करने की जानकारी, उन्हें बजाने की कला, उसकी विशेषता के साथ स्वर संगीत की जानकारी प्रदान दी.
उन्होंने सबसे पहले राग शुद्ध सारंग बजाया फिर तीन ताल धा धिन धिन ता की जानकारी दी. इसके बाद सारंगी व तबले की जुगलबंदी में हम होगें कामयाब एक दिन…. मन में है विश्वास, होगी…शांति चारों ओर मन में है विश्वास…..,रघुपति राघव राजा राम की धुन,सारे जहां से अच्छा हिंन्दुसा हमारा तथा बेडू पाको बारामासा जैसे संगीत की धुनें बच्चों के साथ प्रस्तुत कीं।
कमल साबरी ने दुनिया भर के प्रतिष्ठित समारोहों, संगीत हॉल और सांस्कृतिक संस्थानों में प्रदर्शन किया है, विविध संगीत परंपराओं के प्रमुख संगीतकारों के साथ सहयोग किया है। इन प्रदर्शनों के माध्यम से, उन्होंने सरंगी की भावपूर्ण ध्वनि को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया है और वाद्य के सबसे प्रमुख वैश्विक राजदूतों में से एक बन गए हैं। वे एक प्रसिद्ध कलाकार होने के अलावा, वे एक कुशल संगीतकार भी हैं जिन्होंने फिल्मों, थिएटर प्रोडक्शन और अंतर-अनुशासनिक कलात्मक परियोजनाओं में संगीत का योगदान दिया है।
संगीत और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी समर्पण ने उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाए हैं, जिनमें उज्बेकिस्तान में वर्ल्ड म्यूजिक आर्टिस्ट अवार्ड (2023), मुंबई में कंपोजर ऑफ द ईयर अवार्ड (2023) और न्यूयॉर्क के मेयर द्वारा वैश्विक संगीत में उनके योगदान के लिए विशेष मान्यता शामिल है।
उन्हें हाल ही में लंदन में ग्लोबल आइकोनिक आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया था, जो अंतरराष्ट्रीय संगीत परिदृश्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए है,जो शास्त्रीय संगीत परंपराओं के संरक्षण में उनकी असाधारण भूमिका को मान्यता देता है। अपनी कला, नवाचार और परंपरा के प्रति समर्पण के माध्यम से, उस्ताद कमल साबरी दुनिया भर के दर्शकों को प्रेरित करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि सरंगी की समयहीन आवाज संस्कृतियों और पीढ़ियों में गूंजती है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नियोजन व आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. पंकज नैथानी ने कलाकारों को प्रतीक चिन्ह प्रदान किये. अंत में धन्यवाद केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने दिया.
इस अवसर पर डॉ. डी. के. पाण्डे, डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर सिंह बिष्ट, भारती आंनद, मंजू काला, भारत सिंह रावत, हैरी शैट्टी, शैलेन्द्र नौटियाल तथा चन्द्र बी. रसायली समेत शहर के अनेक संगीत प्रेमी व अन्य लोग शामिल रहे।












