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चारधाम आने वाले भक्तों का बढ़ेगा जोखिम

22/03/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष एक बार फिर प्राकृतिक चुनौतियों के बीच होने जा रही है। राज्य आपदा प्रबंधन व संबंधित एजेंसियों के अनुसार यात्रा मार्ग पर लगभग 70 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जो भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं।इन स्थानों से होकर श्रद्धालुओं को गुजरना होगा, जिससे यात्रा के दौरान जोखिम बढ़ने की संभावना बन सकती है। ऐसे में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र व नोडल अधिकारी चारधाम यात्रा ने उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, पौड़ी व रुद्रप्रयाग जिलों के एसएसपी व एसपी भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट मांगी है। वहीं चारधाम यात्रा की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम में दो सीओ की नियुक्ति की गई है।चारधाम यात्रा, जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम शामिल हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। बदलते मौसम के कारण यह यात्रा हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। इस बार भी प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में खासतौर पर यमुनोत्री और केदारनाथ मार्ग अधिक संवेदनशील माने गए हैं। यहां बारिश के दौरान अक्सर मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा बदरीनाथ और गंगोत्री हाईवे पर भी कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां सड़क संकरी होने और पहाड़ कटाव के कारण खतरा बना रहता है।चारधाम यात्रा को सुरक्षित संचालित किए जाने के लिए इस वर्ष पूरे चारधाम मार्ग को 15 सुपर जोन, 41 जोन व 137 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का क्षेत्र 10 किलोमीटर रहेगा तथा इन सेक्टरों में दो-दो कांस्टेबल राउंड द क्लाक ड्यूटी पर नियुक्त रहेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से 10 कंपनियां पैरा मिलिट्री फोर्स के अलावा पीएसी फोर्स व नागरिक पुलिस फोर्स तैनात किया जाएगा। नये एक्सप्रेस वे के शुरू होने पर यमुनोत्री मार्ग पर अतिरिक्त हाल्टिंग क्षेत्रों और पार्किंग की व्यवस्था प्रशासन के साथ समन्वय से की जा रही है।चारधाम यात्रा को सुरक्षित संचालित किए जाने के लिए इस वर्ष पूरे चारधाम मार्ग को 15 सुपर जोन, 41 जोन व 137 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का क्षेत्र 10 किलोमीटर रहेगा तथा इन सेक्टरों में दो-दो कांस्टेबल राउंड द क्लाक ड्यूटी पर नियुक्त रहेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से 10 कंपनियां पैरा मिलिट्री फोर्स के अलावा पीएसी फोर्स व नागरिक पुलिस फोर्स तैनात किया जाएगा। नये एक्सप्रेस वे के शुरू होने पर यमुनोत्री मार्ग पर अतिरिक्त हाल्टिंग क्षेत्रों और पार्किंग की व्यवस्था प्रशासन के साथ समन्वय से की जा रही है।भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं बनाने के लिए एसडीआरएफ व थानाध्यक्षों को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह ऊर्जा निगम, लोक निर्माण विभाग, बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन व जल संस्थान से समन्वय बनाकर रखेंगे।आपदा की घटना को देखते हुए तत्काल सुरक्षा व्यवस्था शुरू की जाएगी। 2025 चारधाम यात्रा के दौरान बिजली लाइन टूटने के कारण आपातकालीन स्थिति में जनरेटर से व्यवस्था करनी पड़ी थी। यह समस्या दोबारा सामने न आए, ऐसे में सभा विभागों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।चारधाम यात्रा मार्ग पर इस बार पिछले साल से करीब दो गुने डेंजर जोन हो गए हैं। आपदा के चलते इस मार्ग पर भूस्खलन जोन और ब्लैक स्पॉट में बढ़ोतरी हुई है। इनकी संख्या पिछले साल करीब 58 थी जो कि इस साल 100 से अधिक हो गई है। ऐसे में आईजी रेंज की ओर से पुलिस और संबंधित विभागों को इन जगहों की निगरानी करने के निर्देश जारी किए हैं। यात्रा से पहले इनमें से कुछेक को दुरुस्त भी कर लिया जाएगा।दरअसल, पिछले साल चारधाम यात्रा में करीब 51 लाख से अधिक तीर्थयात्री आए थे। इनमें से करीब 72 फीसदी 36 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री पहले दो महीने में ही पहुंच गए थे। यह आंकड़ा एक निजी संस्था के सर्वे में सामने आया है। इसके बाद से यात्रा मार्ग पर बारिश व अन्य आपदाओं का दौर शुरू हो गया। इस संस्था के सर्वे के अनुसार करीब सात महीने की इस यात्रा में 60 से ज्यादा दिन तो ऐसे रहे जिनमें कोई यात्री पहुंचा ही नहीं। ऐसे में चारधाम यात्रा कई दौर में रुक-रुककर ही संचालित हुई।मार्ग की हालात इस बार भी बेहतर नहीं हुई है। पिछले साल की आपदा के जख्म इस बार भी मार्ग पर मौजूद हैं। कई नए भूस्खलन जोन मार्ग पर बन गए हैं। इसके अलावा कई ब्लैक स्पॉट भी इस क्षेत्र में बन गए हैं।करीब सात महीने की इस यात्रा में 60 से ज्यादा दिन तो ऐसे रहे जिनमें कोई यात्री पहुंचा ही नहीं। ऐसे में चारधाम यात्रा कई दौर में रुक-रुककर ही संचालित हुई। मार्ग की हालात इस बार भी बेहतर नहीं हुई है।इस तरह अब आगामी 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा से पहले सरकारी मशीनरी का ध्यान इन भूस्खलन जोन और ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त करने पर है। इसके लिए पुलिस से लेकर लोनिवि व अन्य विभाग अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। आईजी रेंज की ओर से पुलिस को इन सभी स्थानों की हर वक्त निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
चारधाम यात्रा मार्ग पर करीब 100 डेंजर जोन हैं। इनकी संख्या पिछले साल 58 थी। इन सभी को दुरुस्त करने और यात्रियों की सुरक्षा के संबंध में सभी विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इन जगहों पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की जाएंगी। संचार व्यवस्था को इन जगहों पर ठीक करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए थे ताकि आपातकाल में कोई परेशानी न आए। उत्तराखंड चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है. उत्तराखंड के चारधामों में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं का आना हिमालय की पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिए भविष्य में खतरा बन सकते हैं. अप्रैल से शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा को लेकर इस बार उत्तराखंड का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। यात्रा शुरू होने में अभी वक्त है, लेकिन उससे पहले ही ‘पंचगव्य’ का आचमन और ‘गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक’ जैसे मुद्दों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जहां मंदिर समितियां इसे परंपरा की रक्षा बता रही हैं, वहीं विपक्ष ने इसे पर्यटन को नुकसान पहुंचाने वाली ‘सियासत’ करार दिया है।आस्था और राजनीति की इस लड़ाई ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबारियों को चिंता में डाल दिया है। कारोबारियों का मानना है कि चारधाम यात्रा लाखों लोगों की आजीविका का जरिया है। ऐसे में प्रवेश को लेकर विवाद और धार्मिक ध्रुवीकरण की बातें यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम कर सकती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होने की आशंका है। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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