डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में टनल पार्किंग का ड्रीम प्रोजेक्ट इस साल भी केवल सपना ही रह गया। 12 टनल पार्किंग में से सबसे पहले कैंप्टी की टनल पार्किंग का 120 करोड़ बजट जारी हुआ लेकिन एनएच का एलाइनमेंट बदलने के कारण निर्माण लटक गया। शासन ने निर्माण कंपनी एनएचआईडीसीएल को हटा दिया था लेकिन अब तक कोई नई कंपनी काम नहीं संभाल सकी। प्रदेश में पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए 12 शहरों में पहाड़ में टनल पार्किंग बनाई जानी थीं। इनमें पौड़ी में दो, टिहरी में छह, उत्तरकाशी में दो और नैनीताल में दो पार्किंग शामिल हैं। पहली टनल पार्किंग कैंप्टीफाल में टिहरी-कैंप्टीफाल मसूरी, मसीही मसूरी रोड के सामने बनाई जानी थी। इसके लिए डीपीआर बनने के बाद 120 करोड़ का बजट भी जारी हो गया था। यहां 400 वाहनों की पार्किंग होती लेकिन इसका निर्माण ही शुरू नहीं हो पाया। टनल का काम शुरू होने को था कि इसके सामने से गुजर रही सड़क का एलाइनमेंट एनएच ने बदल दिया। इस कारण टनल के प्रवेश द्वार और सड़क के बीच पहाड़ आ गया। इस पहाड़ को बीच से हटाने या टनल पार्किंग को आगे बढ़ाने के लिए और बजट की जरूरत थी। इस कारण करीब एक साल से कैंप्टी टनल पार्किंग का काम अटका पड़ा है। कंपनी को हटाया गया लेकिन नई कंपनी अभी तक सामने नहीं आई। लिहाजा, टनल पार्किंग इस साल भी सपना ही रह गया। प्रदेश में पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए 12 शहरों में पहाड़ में टनल पार्किंग बनाई जानी थीं। इनमें पौड़ी में दो, टिहरी में छह, उत्तरकाशी में दो और नैनीताल में दो पार्किंग शामिल हैं। पहली टनल पार्किंग कैंप्टीफाल में टिहरी-कैंप्टीफाल मसूरी, मसीही मसूरी रोड के सामने बनाई जानी थी। इसके लिए डीपीआर बनने के बाद 120 करोड़ का बजट भी जारी हो गया था। यहां 400 वाहनों की पार्किंग होती लेकिन इसका निर्माण ही शुरू नहीं हो पाया।टनल का काम शुरू होने को था कि इसके सामने से गुजर रही सड़क का एलाइनमेंट एनएच ने बदल दिया। इस कारण टनल के प्रवेश द्वार और सड़क के बीच पहाड़ आ गया। इस पहाड़ को बीच से हटाने या टनल पार्किंग को आगे बढ़ाने के लिए और बजट की जरूरत थी। इस कारण करीब एक साल से कैंप्टी टनल पार्किंग का काम अटका पड़ा है। कंपनी को हटाया गया लेकिन नई कंपनी अभी तक सामने नहीं आई। लिहाजा, टनल पार्किंग इस साल भी सपना ही रह गया। इस समस्या के समाधान के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में टनल पार्किंग बनाने की योजना है। पहली टनल पार्किंग मसूरी स्थित कैंप्टीफाल में बनेगी। 12 शहरों में पहाड़ों को काटकर टनल पार्किंग बनाई जाएगी, ताकि पार्किंग संबंधी समस्या का समाधान हो सके। किस जिले में कितनी टनल पार्किंग बनेंगी, ये भी बताते हैं। पौड़ी में दो, टिहरी में छह, उत्तरकाशी में दो और नैनीताल में दो पार्किंग बनाई जानी हैं। प्रदेश की पहली टनल पार्किंग कैंप्टीफाल में टिहरी-कैंप्टीफाल मसूरी, मसीही मसूरी रोड के सामने बनाई जाएगी। जिन पर्वतीय जिलों में पार्किंग के लिए बड़ा मैदान उपलब्ध नहीं है, वहां पहाड़ों के भीतर ही टनल से पार्किंग का काम लिया जाएगा। ये पार्किंग ऐसी बनाई जाएंगी कि एक तरफ से वाहन पार्किंग के लिए घुसेगा और दूसरी सड़क पर बाहर निकल जाएगा। पौड़ी में लक्ष्मणझूला और देवप्रयाग रेलवे स्टेशन के पास सौड़ में टनल पार्किंग बनेगी। इसके बाद पौड़ी गढ़वाल में 2, टिहरी में 6 टनल पार्किंग बनेंगी। उत्तरकाशी में 2 और नैनीताल में 2 टनल पार्किंग बनाई जाएंगी। योजना को धरातल पर उतारने के लिए कवायद तेज हो गई है। एक तरफ से वाहन पार्किंग में घुसेगा और दूसरी तरफ से बाहर निकलेगा। जल्द ही अपर मुख्य सचिव और मुख्य सचिव के सामने DPR का प्रेजेंटेशन माना जा रहा है कि जल्द ही इसे स्वीकृति मिल जाएगी। हालांकि ये भी माना जा रहा है कि टनल पार्किंग के इस सपने को धरातल पर उतारने में सरकार के लिए कई चुनौतियां भी पेश आ सकती हैं। इनमें सबसे पहले चुनौती पर्यावरणीय स्वीकृति की है। इन टनल के निर्माण के दौरान निकलने वाला मलबा भी बड़ी चुनौती बनकर उभर सकता है। हालांकि सरकार का तर्क है कि सभी नियमों का पालन करते हुए टनल निर्माण किए जाएंगे। टनल का कार्य हाईटेक टेक्नीक से किया जाएगा। लेकिन नई कंपनी अभी तक सामने नहीं आई। लिहाजा, टनल पार्किंग इस साल भी सपना ही रह गया। चूंकि हाल के कुछ सालों में उत्तराखंड में वाहनों का ट्रैफिक काफी तेज़ी से बढ़ा है, इसलिए पार्किंग को लेकर आने वाले कुछ सालों के लिए एक बड़ी योजना के बारे में सोचा जा रहा है. पार्किंग के लिए सुरंगें बनाने के प्लान से पहले जियोलॉजिकल सर्वे की बात भी कही जा रही है. एनआईई की खबर की मानें तो पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव ने कहा, ‘ट्रैफिक की समस्या के लिए टनल पार्किंग कैसे और कितनी उचित होगी, इस बारे में पता किया जा रहा है लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।











