शंकर सिंह भाटिया
देहरादून। राज्य में सत्तारूढ़ दल भाजपा में चुनाव के दौरान भितरघात हुआ है, इस बात की ताकीद भाजपा प्रत्याशी खुद कर रहे हैं। ऐसे प्रत्याशियों की संख्या दिन प्रति दिन लगातार बढ़ती जा रही है। सत्तारूढ़ पार्टी में भितरघात का यह खेल मुख्यमंत्री, मंत्री की कुर्सी हथियाने की होड़ है या फिर यह किसी अनहोनी का संकेत है?
मतदान के दिन ही भाजपा में भितरघात के आरोप लगाने वाले तीन विधायक सामने आए थे। लक्सर विधायक संजय गुप्ता ने तो प्रदेश अध्यक्ष पर खुलकर आरोप लगाए थे, इसके अलावा चंपावत विधायक कैलाश चंद्र गहतोड़ी और काशीपुर प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा ने भी उसी दिन भितरघात के आरोप लगाए थे और उनके आरोप सीधे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर थे।
इसके बाद अब कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल, सिटिंग विधायक केदार सिंह रावत के साथ देहरादून कैंट प्रत्याशी सविता कपूर ने भी पार्टी के कुछ पदाधिकारियों पर उन्हें हराने के लिए भितरघात करने का आरोप लगाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने हालांकि आरोप नहीं लगाया है, लेकिन उनके क्षेत्र में उनकी चुनाव सामग्री जिस तरह एक खाली जगह पर अधजली अवस्था में मिली है और यह स्थान एक पार्टी सभासद के घर के पास बताया गया है, यह मदन कौशिक के खिलाफ किसी भितरघात के रूप में ही देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सार्वजनिक तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया है, लेकिन बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ दो कैबिनेट मंत्रियों और कुछ विधायकों ने अंदरखाने उन्हें हराने के प्रयास किए हैं। इस तरह अब तक भाजपा के आठ प्रत्याशियों के खिलाफ भितरघात के प्रकरण सामने आए हैं।
सत्तारूढ़ पार्टी में भितरघात के आरोप प्रत्यारोप जिस तरह से मतदान के दिन से ही लगने शुरू हुए, उसका क्रम थमने के बजाय दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। भाजपा के अंदर भितरघात के आरोप-प्रत्यारोप के इस खेल को कई लोग पार्टी की जीत की स्थिति में मुख्यमंत्री और मंत्री कुर्सी हड़पने की होड़ के रूप में देख रहे हैं। लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है, भितरघात के आरोपों के पीछे हार का डर भी हो सकता है। यदि भितरघात की ज्यादातर वजह यह है तो यह भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं हो सकते हैं। भितरघात के इस खेल का खुलाशा 10 मार्च को हो जाएगा।












