• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

भर्ती घोटाले के राजनीतिक आंकाओं तक पहुंच पाएगी जांच?

क्दम-कदम पर भर्ती घोटाला, भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा उत्तराखंड

04/09/22
in उत्तराखंड, क्राइम, देहरादून, राजनीति
Reading Time: 1min read
343
SHARES
429
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

शंकर सिंह भाटिया
विधानसभा अध्यक्ष के विशेषाधिकार के नाम पर वहां मनमानी भर्तियां हो रही हैं, कुछ को खास लोगों की सिफारिश पर रखा जा रहा था, तो कई बड़ी कीमत देकर पद हासिल कर रहे थे। पद भी ऐसे जो लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद ही प्राप्त होते हैं। यह क्रम राज्य बनने के साथ ही शुरू हो गया था, यह बात आम थी, हर कोई जानता था और मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच इस पर चर्चा भी होती रहती थी। पिछली और वर्तमान सरकार में सहकारिता विभाग में भर्ती के नाम पर जो खेल खेला जा रहा था, वह भी पब्लिक डोमेन में मौजूद था। लोक सेवा आयोग से लेकर शिक्षा विभाग तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हो रही भर्तियों में गड़बड़ियां हो रही हैं, यही भी सभी लोग जानते थे। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्तियों में एक के बाद एक पेपर लीक हो रहे हैं, उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में भर्ती घोटालों में सक्रिय भूमिका निभाने वाला गैंग उत्तराखंड में अंदर तक घुस चुका है, यह बहुत कम लोगों को पता था। स्नातक लेबल भर्ती का पर्चा आउट होने का मामला जब सामने आया तो एक के बाद एक सभी घोटाले बेपर्दा होने लगे। अब हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि सभी परीक्षाओं में गड़बड़ियां पूरी तरह बेपर्दा हो गई हैं। इसलिए राज्य सरकार को एक के बाद एक परीक्षाओं का परीक्षण कराने पर विवश होना पड़ रहा है। अब सरकार पर यह जिम्मेदारी आ गई है कि जनता के मन में भर्तियों को लेकर जो अविश्वास घर कर गया है, उसे कैसे समाप्त किया जाए? जनता में बढ़ रहे आक्रोश से हालात इस कदर खराब होने लगे हैं कि राज्य में एक नया संकट खड़ा हो सकता है।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पेपर लीक मामले ने 22 साल के उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की किस तरह बंदरबांट हो रही थी, इसे खोलकर रख दिया। इस भर्ती घोटाले के बाद परत दर परत नए नए भर्ती घोटाले सामने आ रहे हैं। यह साफ हो गया है कि सरकार में बैठे लोग किस तरह अधिकारों का दुरूपयोग कर अपनों को रेवड़ियां बांट रहे थे और व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर रहे थे। भर्ती घोटाले में अब तक क्या-क्या बातें सामने आई हैं, इस पर एक नजर डालते हैं।-

दिसंबर 2021 में 13 विभागों के 916 पदों के लिए स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में दो लाख 16 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और 1 लाख 46 हजार से अधिक परीक्षा में शामिल हुए थे। लखनउ की आरएमएस साल्यूशन्स प्रा.लि. ने इस परीक्षा का पेपर पिं्रट किया। एसटीएफ के अनुसार पेपर लीक करने में इस प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका रही। प्रेस के मालिक राजेश चौहान ने पेपर आउट कर धामपुर के दलाल केंद्रपाल सिंह को मुहैया कराया। केंद्रपाल ने इसे हाकम सिंह रावत को दिया, जहां से पेपर विभिन्न अन्य दलालों से होते हुए परीक्षा देने वालों तक पहुंचा। प्रेस का मालिक राजेश चौहान गिरफ्तार हो चुका है, जांच की शुरूआत में कंपनी के दो कर्मचारी एसटीएफ के हाथ लग चुके थे।

एसटीएफ के अनुसार दलाल केंद्रपाल ने हाकम सिंह के जरिये पेपर लीक करने के बदले धन जुटाया, जिसमें से करोडों रुपये़ प्रेस के मालिक राजेश चौहान को भेजे गए। यह धन किसी बैंकिंग सिस्टम जरिये भी नहीं भेजा गया और न ही इसके लिए हवाला का उपयोग हुआ, बल्कि राजेश चौहान के धामपुर के संपर्क सूत्रों के हाथों यह धनराशि हाथों-हाथ नकद लखनउ पहुंचाई गई।

स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आते ही एक-एक कर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की गई परीक्षाओं के साथ अन्य परीक्षाओं की भी परतें खुलने लगी।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परिसर में आयोग की एक प्रेस लगाई गई है। जिसमें छोटी परीक्षाओं के लिए पेपर छापा जा सकता है। कोरोनाकाल में यह प्रेस आयोग ने लगाई थी। इस प्रेस में पहला पेपर सचिवालय रक्षक भर्ती परीक्षा का छपा, जिसमें करीब 26 हजार उम्मीदवार शामिल हुए थे। यह पेपर भी लीक हो गया था।

अब तक एसटीएफ इस प्रकरण में 33 गिरफ्तारियां कर चुका है। संभव है कि इस लेख के प्रकाशित होने तक कुछ और गिरफ्तारियां हो जाएं।

भर्ती घोटाले के सामने आते ही आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया। यह मामले में राजनीतिक लोगों मजबूत पकड़ का सबूत था। वह जाते-जाते इस पूरे घोटाले के लिए राजनीतिक नेताओं जिम्मेदार ठहरा गए।

इस बीच अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी को निलंबित कर दिया गया है। पहले उन्हें आयोग से हटाकर मूल विभाग सचिवालय भेजा गया था, फिर निलंबित कर दिया गया।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्तियों में लगातार शिकायतें आने के बाद मुख्यमंत्री ने तीन भर्तियों की जांच के आदेश दे दिए। इनमें 2015 में पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा की गई पुलिस में दरोगा भर्ती परीक्षा, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की गई वीडीओ, वीपीडीओ और सचिवालय रक्षक भर्ती की जांच शामिल है।

भर्तियों में भ्रष्टाचार का जिन्न बोतल से बाहर आते ही विधानसभा भर्ती की धांधली भी बेपर्दा हो गई। विधानसभा सचिवालय के लिए हुई भर्तियों की धांधली शुरू से ही पब्लिक डोमेन में थी, इस पर बहुत कुछ लिखा गया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के विशेषाधिकार के नाम पर यहां सबकुछ होता रहा। हालांकि विधानसभा में अध्यक्ष के विशेषाधिकार के बहाने भर्ती का यह खेल राज्य गठन के साथ बनी अंतरिम सरकार में ही शुरू हो गया था, लेकिन इस समय सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे गोविंद सिंह कुंजवाल और भाजपा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे प्रेम अग्रवाल के कार्यकाल की है।

कुंजवाल भर्ती में अपनी गलती को स्वीकार कर माफी मांग रहे हैं, प्रेम अग्रवाल जो वर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं, अपने विशेषाधिकार की आड़ लेकर अपनी हनक दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रेम अग्रवाल पर भर्ती के अलावा अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए एक साल के अंदर उप सचिव से सचिव बनाकर तीन प्रमोशन देने का भी आरोप है, जिसे वह स्वीकार करते हैं और ऐसा करने के लिए अपने विशेषाधिकार की हनक़ दिखाने से भी बाज नहीं आते।

बताया जाता है कि चौथी विधानसभा में अध्यक्ष रहे प्रेम अग्रवाल के कार्यकाल के आंखिर में विधानसभा में हुई भर्तियों के बाद वित्त सचिव अमित नेगी ने इनके वेतन मद को स्वीकृत करने में हाथ खड़े कर दिए। पांचवीं विधानसभा में वित्त मंत्री बनने के बाद प्रेम अग्रवाल ने इस प्रस्ताव को बैक डेट से मंजूर कराया, तब जाकर महीनों बाद इन लोगों को वेतन दिया जा सका।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा में हुई भर्तियों में अनियमितता की जांच कराने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि विधानसभा एक संवैधानिक तौर पर स्वायत्त संस्था है, राज्य सरकार इसके मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

इसके अलावा सहकारिता विभाग में सहकारी बैंकों और विभाग में भर्ती को लेकर आरोप लगते रहे हैं। अभी इन भर्तियों का पटाक्षेप नहीं हुआ है।

इस बीच कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। जिसमें वह चार लोगों को भर्ती करने का आदेश अधिकारियों को दे रही हैं। इस पत्र के सामने आने के बाद रेखा आर्या का एक बयान चर्चाओं में है, जिसमें वह कह रही हैं कि हां उन्होंने पत्र लिखा है, ऐसे ही पत्र वह आगे भी लिखती रहेंगी।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने लखनउ की आरएमएस टेक्नोसोल्यूशन प्राइवेट लि. कंपनी को नोटिस भेजा है। प्रश्नपत्र लीक में कंपनी की संलिप्तता सवालों के घेरे में है। कंपनी से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है।

स्नातक स्तरीय भर्ती की जांच कर रही एसटीएफ ने अब तक संलिप्त 33 लोगों को गिरफ्तार किया है। रोज नई गिरफ्तारियां हो रही हैं। लेकिन अब तक गिरफ्तारियां और जांच में पहले उत्तरकाशी से भाजपा का जिला पंचायत सदस्य रहे हाकम सिंह रावत को घोटाले का सरगना बताया जा रहा था। उसके बाद आरएमएस टेक्नोसोन्लूशन के मालिक राजेश चौहान और धामपुर के केंद्रपाल की गिरफ्तारी के बाद इन दोनों को घोटाले का सरगना कहा जाने लगा है। वास्तविकता यह है कि ये सभी घोटाले के अलग-अलग किरदार हैं, किसी हारर जासूसी फिल्म की तरह सरगना कोई राजनीतिक व्यक्ति या समूह है, जिस तक अभी नहीं पहुंचा जा सका है या फिर एसटीएफ को नहीं पहुंचने दिया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि 2018 में हुए वन आरक्षी भर्ती मामले में बड़ी गड़बड़ी हुई थी। इस मामले में हाकम सिंह को नामदज किया गया था। बाद में उसका नाम रिपोर्ट से ही हटा दिया गया। हाकम सिंह के राजनीतिक संपर्कों की पिछले दिनों एक नुमाइश सामने आई थी। उक्रांद ने सत्तारूढ़ पार्टी की बड़ी राजनीतिक हस्तियों के साथ हाकम के निजी गहरे संबंधों को उजागर करने वाला एक कोलाज जारी किया था। इस घटनाक्रम को फोटो साथ में होने का मतलब संबंधित नेता की भी अपराध में संलिप्तता होना जरूरी नहीं है, यह तर्क देकर दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

हर भर्ती में हाकम सिंह की संलिप्तता, एक घरेलू नौकर से अरबों की संपत्ति का मालिक बनने जैसी फिल्मी कहानी की सच्चाई को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। हाकम की संपत्तियों की जांच की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक कोई एक्शन होता नहीं दिखाई दिया, जब तक कोई एक्शन होगा, बहुत सारी चीजें ठिकाने लग चुकी होंगी, तब जांच में पुष्टि कैसे हो पाएगी?

अपने परिवार के लिए पद का दुरूपयोग करने के कुछ उदाहरण हैं। कांग्रेस सरकार में निर्दलीय विधायक के तौर पर मंत्री रहते हुए स्वनामधन्य मंत्री प्रसाद नैथानी ने अपनी चार बेटियों को सरकारी सेवा में योजित किया। जिसमें तीन को शिक्षा विभाग और एक को विधानसभा में नौकरी दिलवाई। दामाद, साले तथा समधी समेत तमाम अन्य करीबी रिश्तेदारों को नियमों से इतर जाकर सरकारी सुविधाओं से खूब नवाजा। अपने परिवार को इस तरह उपकृत करने का इससे बड़ा कोई और उदाहरण राज्य में नहीं मिलता।

गोविंद सिंह कुंजवाल ने विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए अपने बेटे और बहू को विधानसभा में नौकरी दी। इस बात को वह खुद स्वीकार कर चुके हैं। कुंजवाल द्वारा उपकृत लोगों की एक सूची आजकल सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। कुंजवाल पहले ही कह चुके हैं कि हर कुंजवाल उनका अपना नहीं है।

एम्स ऋषिकेश में 2018 से 2020 के बीच 800 नर्सिंग पदों पर भर्ती हुई थी, जिसमें 600 पद राजस्थान से भरे गए। इस भर्ती में घोटाले का सबूत यह हैं कि राजस्थान के एक ही परिवार के छह लोग भर्ती हुए हैं। यह जांच सीबीआई के पास है, जांच कहां तक पहुंची कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

आरोप है कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी में बिना पदों की स्वीकृति के सिर्फ मौखिक आदेश पर 56 लोगों को भर्ती कर दिया गया।

भाजपा सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे को लेकर भी एक सूची सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। जिसमें कहा गया है कि उन्होंने बिहार से अपने रिश्तेदारों को बुलाकर उत्तराखंड में नौकरी दिलाई है। इस सूची की पुष्टि होना बाकी है।

इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अपनी-अपनी भतीजियों को विधानसभा में नौकरी देने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी पुष्टि होना बाकी है।

अभी उत्तराखंड में 1-वीडीओ, वीपीडीओ भर्ती की जांच विजिलेंस से एसटीएफ को स्थानांतरित हुई है। 2-स्नातक स्तरीय भर्ती की विवेचना एसटीएफ कर रही है। 3-सचिवालय रक्षक भर्ती की विवेचना एसटीएफ कर रही है। 4-दरोगा भर्ती 2015 की जांच विजिलेंस को सौंपी गई है। 5-वन आरक्षी के बंद हो चुके मुकदमे का परीक्षण किया जा रहा है। 6-कनिष्ठ सहायक न्यायिक की विवेचना एसटीएफ कर रही है। इन तीन भर्तियों में वन दरोगा भर्ती, यूपीसीएल जेई भर्ती, यूजेवीएनएल जेई भर्ती में धांधली के सबूत मिल रहे हैं। इन पर जल्दी जांच बैठाई जा सकती है। इसके अलावा करीब एक दर्जन भर्तियां जांच के दायरे में आ सकती हैं।

इन घोटालों पर एक्शन की बात करें तो अब तक 33 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। 21 के खिलाफ राज्य सरकार ने गेंगस्टर एक्ट लगाने के निर्णय किया है, इन 21 में से 19 गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि दो अभियुक्त फरार चल रहे हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि शैयद सादिक मूसा और राजेश्वर राव पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। ये दोनों बड़े चर्चित नकल माफिया रहे हैं। उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश तथा अन्य राज्यों में भी इनका गैंग फैला हुआ है। गैंगस्टर एक्ट में जिन पर मुकदमा दर्ज किया गया है, इन दोनों के अलावा अन्य चर्चित नाम आरएमएस के मालिक राजेश चौहान, केंद्रपाल, हाकम सिंह शशिकांत, बलवंत सिंह रौतेला आदि हैं।
गौरतलब यह है कि एसटीएफ तथा विजिलेंस इन मामलों की सिर्फ विवेचना कर रहे हैं। सबूत एकत्र कर रहे हैं। ये एजेंसिंयां इन मामलों को परिणति तक नहीं ले जा सकती हैं। न ही ये जांचें इन घोटालों के राजनीतिक आंकाओं तक हाथ डालने की स्थिति में हैं। असलियत यह है कि ये सारे भर्ती घोटाले राजनीतिक आंकाओं के इशारे पर ही हुए। जो लोग अब तक गिरफ्तार हुए हैं, वे सिर्फ निचले स्तर के कारिंदे हैं, दलाल हैं। यदि इतने बड़े हो हल्ले के बाद भी भर्ती घोटाले के राजनीतिक रणनीतिकार बच गए तो फिर वे कभी पकड़ में नहीं आ पाएंगे। उत्तराखंड में फिर घोटालों की संस्कृति की जड़ें इस कदर मजबूत हो जाएंगी कि कोई भी उन्हें उखाड़ नहीं पाएगा। इसलिए इस पूरे भर्ती प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। तभी कोई नतीजा सामने आ सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधानसभा भर्ती में हुई कथित अनियमितता को लेकर एक विशेषज्ञ कमेटी गठित की है, जिसमें दिलीप कोटिया अध्यक्ष, सुरेंद्र सिंह रावत और अवनेंद्र सिंह नयाल सदस्य होंगे। वर्तमान विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल आगामी आदेश तक अवकाश पर रहेंगे। तीनों पूर्व आईएएस हैं और कार्मिक विभाग के सचिव रह चुके हैं। इस कमेटी को एक महीने के अंदर जांच पूरी करने को कहा गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस बात की चिंता है कि राज्य में माहौल भ्रष्टाचार और सिर्फ भ्रष्टाचार का हो गया है। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि कहीं इस माहौल का खामियाजा भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं को न भुगतना पड़े। लेकिन क्या हमारे नेताओं को इस बात का एहसास है कि यह भ्रष्टाचार का माहौल किसने बनाया? इन घोटालों के पीछे राजनीतिक किरदार छिपे हुए हैं, उन्हें छिपाए रखने की कवायद क्यों की जा रही है? यदि राज्य बनने के साथ ही उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की गंगा बहनी शुरू हुई तो ऐसे ही राजनीतिक लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं। क्या ऐसे लोगों को बेनकाब नहीं किया जाना चाहिए? भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं को क्या सजा मिलनी चाहिए, इस पर कोई क्यों नहीं बोलता?

Share137SendTweet86
Previous Post

कांग्रेस जिला प्रवक्ता नरेंद्र बिष्ट को भारत जोड़ो यात्रा के लिए को.आर्डिनेटर की मिली जिम्मेदारी

Next Post

अनुसूचित जाति आयोग पहुंचा दिवंगत जगदीश के घर

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: मरीज की जान बचाने को आगे आए एक मदद ब्लड ग्रुप समिति के सदस्य

April 1, 2026
16
उत्तराखंड

वार्षिक परीक्षा फल वितरण एवं भव्य विदाई समारोह का आयोजन

April 1, 2026
2
उत्तराखंड

देहरादून एयरपोर्ट पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का 31वां वार्षिक दिवस मनाया

April 1, 2026
4
उत्तराखंड

देहरादून में श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

April 1, 2026
7
उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड के विद्युतगृहों में रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन

April 1, 2026
65
उत्तराखंड

लच्छीवाला नेचर पार्क: वाइल्ड समर फेस्ट–2026 का आगाज़, प्रकृति संग मस्ती का अनोखा अवसर

April 1, 2026
15

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67667 shares
    Share 27067 Tweet 16917
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38049 shares
    Share 15220 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37326 shares
    Share 14930 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: मरीज की जान बचाने को आगे आए एक मदद ब्लड ग्रुप समिति के सदस्य

April 1, 2026

वार्षिक परीक्षा फल वितरण एवं भव्य विदाई समारोह का आयोजन

April 1, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.