डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
चारधाम यात्रा की शुरुआत होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन यमुनोत्री धाम में व्यवस्थाएं अभी तक अधूरी नजर आ रही हैं. यात्रियों के लिए सुरक्षित स्नान घाटों का निर्माण नहीं हो सका है और कई घाट अभी भी क्षतिग्रस्त हालत में पड़े हैं. यमुना नदी के तट पर आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ते भी नहीं बन पाए हैं. तीर्थपुरोहितों ने इस संबंध में सीएम को ज्ञापन प्रेषित कर जल्द ही यमुनोत्री धाम में सुरक्षात्मक कार्य करवाने की मांग की.यमुनोत्री धाम में विगत वर्ष आपदा के कारण भारी नुकसान हुआ था. आपदा से यमुनोत्री धाम में स्नान घाट, पुजारी निवास, रसोई भण्डार, शौचालय और घाट के पुल आदि बह गये थे. यमुनोत्री धाम में सुरक्षा की दृष्टि से यमुना घाट पर नदी के दोनों ओर सुरक्षा दीवार तक नहीं लग पाई है. यमुना नदी के तट पर आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्तों का निर्माण नहीं हो सका है. जिससे इस बार भी तीर्थयात्रियों को नदी के किनारे खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ेगा. तीर्थपुरोहितों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है. वहीं वन विभाग ने जानकीचट्टी यमुनोत्री वैकल्पिक पैदल मार्ग पर काम शुरू जरूर किया था, लेकिन बारिश व बर्फबारी के चलते काम प्रभावित हो रहा है. यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता, तीर्थ पुरोहित आदि ने आरोप लगाया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के बाद भी यमुनोत्री धाम की सुध नहीं ली गई. उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द घाटों का पुनर्निर्माण और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि चारधाम यात्रा में सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए. अधूरी व्यवस्थाओं के कारण हादसों का जोखिम बना है. गौर हो कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 का आगाज 19 अप्रैल से होगा. 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे. साथ ही प्रदेश में चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 6 मार्च से शुरू हो गई है. इस बार चारधाम यात्रा में विगत वर्ष से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की अनुमान जताया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क, संचार और ऑनलाइन सुविधाओं के कारण चारधाम यात्रा पहले से अधिक सुगम हो रही है। इसके साथ ही सरकार द्वारा व्यवस्थाओं में सुधार और प्रचार-प्रसार से भी श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आई है। आने वाले दिनों में पंजीकरण संख्या और बढऩे की उम्मीद है, जिससे प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की चुनौती भी बढ़ेगी। यमुनोत्री हाईवे पर डाबरकोट का भूस्खलन जोन इस बार हल्की-सी बारिश होने पर भी कहर ढा सकता है। स्वयं प्रशासन इस बात को स्वीकार कर रहा है और इसके लिए डाबरकोट से पहले ओजरी में पार्किंग, शौचालय आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं। लेकिन, इस भूस्खलन जोन का उपचार या फिर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई। घोड़े-खच्चरों के व्यवस्थित संचालन के लिए मार्ग को वन-वे व घोड़े-खच्चरों के पंजीकरण के निर्देश
उत्तरकाशी। जिलाधिकारी ने यमुनोत्री धाम की यात्रा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर जायजा लिया। उन्होंने यात्रा शुरू होने से पहले हाईवे चौड़ीकरण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही मार्ग पर पड़े मलबे और बोल्डरों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। जानकीचट्टी में घोड़े-खच्चरों के व्यवस्थित संचालन के लिए मार्ग को वन-वे करने व घोड़े-खच्चरों का शीघ्र पंजीकरण कराने के निर्देश पशुपालन विभाग कोदिए।जिलाधिकारी ने रविवार को यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर पालीगाड से जानकीचट्टी तक निर्माणाधीन सड़क चौड़ीकरण कार्यों के साथ ही स्यानाचट्टी में चेनेलाइजेशन कार्यों, यमुनोत्री पैदल मार्ग व यात्रा मार्ग पर उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। डीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कहा कि यात्रा शुरू होने से सड़क को पूरी तरह दुरुस्त कर लें। उन्होंने स्यानाचट्टी, फूलचट्टी और कृष्णाचट्टी में चल रहे कार्यों में गुणवत्ता व समयबद्धता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। यमुनोत्री धाम में स्नान घाटों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के निर्देश ईई सिंचाई को दिए। उन्होंने कहा कि स्नान घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। रेलिंग, फिसलन रोकने के उपाय व साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था करें।उन्होंने यात्रा मार्गों पर पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। इससे पूर्व डीएम ने जानकीचट्टी में लोनिवि अतिथि गृह में अधिकारियों, मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं स्थानीय लोगों के साथ बैठक की। उन्होंने यमुनोत्री पैदल मार्ग पर क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत, आवश्यक स्थानों पर, रेन शैल्टर स्थापित करने, जाली लगाने व साइनेज स्थापित करने के निर्देश लोनिवि को दिए। उत्तराखंड चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है. उत्तराखंड के चारधामों में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं का आना हिमालय की पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिए भविष्य में खतरा बन सकते लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.












