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अटलजी का उत्तराखंड से रहा गहरा नाता

25/12/20
in उत्तराखंड, दुनिया
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
अटलजी एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेता, प्रखर राजनीतिज्ञ, निःस्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता, सशक्त वक्ता, कवि, साहित्यकार, पत्रकार और बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। भाजपा में एक उदार चेहरे के रूप में उनकी पहचान थी। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में रहने वाले एक स्कूल शिक्षक के परिवार में हुआ। पिता कृष्णबिहारी वाजपेयी हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे। अतः काव्य कला उन्हें विरासत में मिली। उन्होंने अपना करियर पत्रकार के रूप में शुरू किया था और राष्ट्र्धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया। वाजपेयी जी अपने छात्र जीवन के दौरान पहली बार राजनीति में तब आए जब उन्होंने वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। वह राजनीति विज्ञान और विधि के छात्र थे और कॉलेज के दिनों में ही उनकी रुचि विदेशी मामलों के प्रति बढ़ी। 1951 में भारतीय जन संघ में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी।
आज की भारतीय जनता पार्टी को पहले जन संघ के नाम से जाना जाता था। वाजपेयी जी राजनीति के क्षेत्र में चार दशकों तक सक्रिय रहे। वह लोकसभा में नौ बार और राज्यसभा में दो बार चुने गए जो कि अपने आप में ही एक कीर्तिमान है। वाजपेयी 1980 में गठित भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे। अटल जी नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लंबे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी रहे। अटल ही पहले विदेशमंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था।
बाधाएं आती हैं आएं,
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पांवों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते.हंसते,
आग लगाकर जलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा।

अपनी इन्हीं पंक्तियों की तरह थे पूर्व प्रधानमंत्री स्वण् अटल बिहारी वाजपेयी। अपनी पार्टी का नेता हो या विरोधी पार्टी का सबको साथ लेकर चलने की खूबी उन्हें दूसरे नेताओं से अलग करती थी। यही कारण था कि उन्हें अजातशत्रु भी कहा जाता था। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को वैसे तो संपूर्ण उत्तराखंड से गहरा लगाव था, लेकिन पहाड़ों की रानी मसूरी उन्हें सबसे ज्यादा भाती थी। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जब दून आते तो मसूरी भी आया करते थे। प्राकृतिक सौंदर्य से लकदक मसूरी की शांत वादियां उनके मन को सुकून देती थीं। सरल व्यक्तित्व के धनी वाजपेयी मसूरी से गहरा नाता रहाण् उत्तराखंड के जन्म का श्रेय भी अटलजी को जाता हैण् कई दशक से की जा रही मांग के बाद नौ नवंबर, 2000 को उत्तराखंड देश के मानचित्र पर अलग राज्य के रूप में आया। इसमें सबसे निर्णायक भूमिका अटल जी की थीण् राज्य गठन के अलावा प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में वाजपेयी ने उत्तराखंड को विशेष औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे से भी नवाजाण्पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी देवभूमि उत्तराखंड से विशेष लगाव था। उत्तराखंड अलग राज्य निर्माण को लेकर लंबा आंदोलन चला। वर्ष 1996 में अपने देहरादून दौरे के दौरान अटल जी ने राज्य आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया था कि वे राज्य गठन पर विचार करेंगे। उन्होंने इस भरोसे को कायम भी रखा और नए राज्य की स्थापना वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान ही हुईण् राज्य में पहली निर्वाचित सरकार नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की बनी थीण्उस वक्त वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री के रूप में नैनीताल पहुंचे वाजपेयी ने तत्कालीन भारत रत्न व देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का आज 96वां जन्मदिन है। उनके व्यक्तित्व को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। एक ऐसा राजनेता जिसका सभी राजनीतिक दल सम्मान करते थे।
यही नहीं अटल जी कुशल वक्ता थे मुख्यमंत्री तिवारी के आग्रह पर उत्तराखंड के लिए 10 साल के विशेष औद्योगिक पैकेज की घोषणा की। यह उत्तराखंड के प्रति उनकी दूरदर्शी सोच ही थी कि औद्योगिक पैकेज देकर उन्होंने नवोदित राज्य को खुद के पैरों पर खड़ा होने का मौका दिया। अटल बिहारी वाजपेयी को पहाड़ों की रानी मसूरी और नैनीताल से भी खासा लगाव था। नैनीताल की झीलों के संरक्षण के लिए उन्गोंने ऐतिहासिक फैसले लिए। जब भी अवसर मिलता था वे मसूरी और नैनीताल आते रहे रहते थे। पहाड़ की शांत वादियों में आत्ममंथन और काव्य रचचना में वक्त गुजारते थे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन को राष्ट्रीय सुशासन दिवस के तौर पर मनाने है। भारत रत्न व देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी उनके व्यक्तित्व को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। एक ऐसा राजनेता जिसका सभी राजनीतिक दल सम्मान करते थे। यही नहीं अटल जी कुशल वक्ता थेअपने उसूलों और विचार से अटल जी ने केवल भारत बल्कि विदेशों में भी ख्याति मिली। राजनीति में निपुण होने के साथ.साथ अटल जी मशहूर कवि भी थे। अटल जी ने कई बार सदन तो कई बार भाषण के दौरान अपनी रोचक कविताएं सुनाकर लोगों का दिल जीता। अटल जी तो इस दुनिया में अब नहीं हैं लेकिन उनकी कविताएं आज भी लोग के दिलों में उनकी याद को ताजा कर देती हैं। आज स्वर्गीय बाजपेयी के बताये हुए मार्ग पर चलने के लिए सभी को कार्य करना होगा। तभी सिद्ध होगी जब हम उनकी भावनाओं के अनुरूप क्षेत्र के विकास के लिए संगठित होकर कार्य करेंगे। सुशासन होगा।

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