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शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है अजमोद

19/07/20
in उत्तराखंड, चमोली
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
वानस्पतिक नाम पेट्रोसेलिनम क्रिस्पम परिवार एपिएसी अजमोद सघन पर्णावली और सफेद फूलों वाली द्विवार्षिक शाक का सूखा ऐरोमाटिक पत्ता है। चमकीले हरे पत्ते विभाजित सिकुडे हुए हैं। अजमोद सरदीनिया देशी है और व्यापक पैमाने पर मेडिट्टरेनियन क्षेत्र एवं यूएसए में बढाई जाती है। यह मेक्सिको, डोमिनिकन रिपब्लिक, कनाडा, पश्चिम जर्मनी, हेयती, फ्रान्स, हंगरी, बल्जियम, इटली, स्पेइन एवं यूगोस्लाविया में भी बढती है । अजमोद एक शीत जलवायु की फसल है जो अधिक नमीवाली मिट्टी में खूब बढती है। भारत में यह उच्चतर उत्तुंग में अच्छी तरह बढती है। बागवानी अजमोद के दो प्रमुख प्रकार हैं। एक जो पत्तों के लिए बढाई जाती हैं, भारत में पाई जाती है और दूसरी जो है टरनिप जैसी जडों के लिए बढाई जाती है। फूलने वाला डंठल दूसरे साल में 100 सेण्मीण् की ऊँचाई तक पहुँचता है। संयोजित पुष्प छत्रों वाले फूल पीले या पीतयुक्त हरित होते हैं। फल 2.3 मिण्मीण् लंबे, चापाकार, स्पष्टतया कठोर एवं दो फलभित्तियों वाला है। पत्ते और बीज मसाले के रूप में प्रयुक्त होते हैं। इसमें मौजूद वाष्पशील तेल के कारण इस शाक की अपनी सविशेष, सुखद एवं मसालेदार गन्ध होती है।
अजमोद आम तौर पर खाद्यों की पकाई एवं बघारने में प्रयुक्त होती है। ताज़े रूप में यह सलादों के साथ खाया जाता हैं और सूप, स्टयू एवं सॉस में इसका इस्तेमाल होता है। माँंस एवं मुरगी की पकाई में भी इसको काम में लाया जाता हैं। सूप बनाने में इसकी जडें सब्जी के रूप में प्रयुक्त होती हैं। इसके सूखे पत्ते और इसकी जडें मसाला मिश्रण के रूप में काम में लाए जाते हैं। इस शाक की मूत्रवर्ध्दक, वातहर, ज्वरहर गुण-विशेषताएँ होती हैं। तेज़ पत्तों का रस कीटनाशी के रूप में प्रयुक्त होता है। अजमोद शाक तेल और अजमोद बीज तेल बाप आसवन से प्राप्त होता है। अजमोद सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अजमोद में भरपूर मात्रा में एमिनो एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंजाइम, मिनरल, प्रोटीन, पोटेशियम, सोडियम, विटामिन ए, विटामिन बी1, विटामिन बी12, विटामिन बी सिक्स और विटामिन सी मौजूद होते हैं।
रोजाना अजमोद का जूस पीने से सेहत से जुड़े बहुत सारे लाभ हो सकते हैं। इसमें विटामिन सी, बीटा कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट के गुण मौजूद होते हैं, जो दिल को बीमारियों से बचाकर हार्ट अटैक के खतरे को कम करते हैं। अजमोद का जूस पीने से किडनी हमेशा स्वस्थ रहती है। अजमोद का जूस पीने से किडनी डिटॉक्स हो जाती है और इंफेक्शन से बचाव होता है। अगर आपके शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन या जलन की समस्या है तो नियमित रूप से अजमोद के जूस का सेवन करें। अजमोद में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की सूजन और जलन को दूर करने में मदद करते हैं। अजमोद एक उत्कृष्ट विटामिन के और विटामिन सी के साथ.साथ विटामिन ए, फॉलेट और लोहे का भी अच्छा स्रोत है।
अजमोद के वाष्पशील तेल के घटक में मिरिस्टिकिन, लिमोनेन, यूजेनॉल और अल्फा.थुजेने शामिल हैं। अजमोद के स्वास्थ्य लाभ में कैंसर, मधुमेह और संधिशोथ को नियंत्रित करना शामिल है। इसके साथ.साथ ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में भी ये मददगार है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है तथा जठरांत्र संबंधी मुद्दों जैसे कि अपच, पेट में ऐंठन, सूजन और मतली से राहत प्रदान करता है अजमोद फॉलिक एसिड का एक अच्छा स्रोत है, सबसे महत्वपूर्ण बी विटामिन में से एक है। जबकि यह शरीर में कई भूमिका निभाता है, पर हृदय स्वास्थ्य के संबंध में अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक प्रक्रिया में इसकी आवश्यक भागीदारी है, जिसके माध्यम से शरीर में होमोसिस्टीन को सौम्य अणुओं में परिवर्तित किया जाता है। होमोसिस्टीन एक संभावित खतरनाक अणु है, जो उच्च स्तर पर, रक्त वाहिकाओं को सीधे क्षति पहुंचा सकता है और उच्च स्तर के होमोकीस्टीन एथरोस्क्लेरोसिस या मधुमेह के हृदय रोग वाले लोगों में दिल का दौरा और स्ट्रोक के एक बहुत बड़े जोखिम के साथ जुड़ा हुआ है। कई बार कामयाबियां सफलता का पाठ तो पढ़ाती ही हैं, मशक्कत के सबक के साथ हैरत से भर देती हैं।
आजकल महंगी जड़ी.बूटियों की खेती से मालामाल हो रहे किसानों की दास्तान तो कुछ ऐसा ही संदेश देती है। किसान तो खेती करने के लिए अभिशप्त हैए जब पुलिस इसमें हाथ आजमाने लगेए फिर तो बात ही कुछ और। जैसे उत्तराखंड में चमोली की पुलिस, जिसने सुरक्षा का जिम्मा संभालते हुए अपने हर्बल गार्डन में बासठ तरह की जड़ी.बूटियां उगाई हैं। दुर्लभ जड़ी. बूटियों से महकते में थुनेर, तुलसी, कुटकी, रोजमेरी, काशनी, सूरजमुखी, कालमेघ, अजवाइन, तिलपुष्पी, पुदीना, हल्दी, आंवला, मकोई, बहेड़ा, अश्वगंधा, लेमनग्रास, जंबु फरण, सतावर, वन तुलसी, पीप्पली, अजमोद, लेवेंडर, कड़ी पत्ता, इसबगोल, केशर, वकायन, स्वीविया, पत्थरचट्टा, राम तुलसी, श्याम तुलसी, लेमन तुलसी के पौधे लहलहा रहे हैं।
हर्बल खेती करने वाले किसानों की सफलता का रहस्य ये भी है कि आजकल लोग रासायनिक सौंदर्य प्रसाधनों और रासायनिक दवाइयों की जगह हर्बल सौंदर्य प्रसाधनों और हर्बल औषधि के इस्तेमाल को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे तमाम दवा निर्माता कंपनियों का रुख गांवों की ओर हो चला है। कोलियस, सफ़ेद मुसली, लेमनग्रास, श्यामा तुलसी, जामारोजा, आम्बा हल्दी, लाल चंदन, मुलेठी, सर्वगंधा, नीम, जामुन गुठली, सोठ, ब्राम्ही और शंख पुष्पी ऐसी ही औषधीय वनस्पतियां हैं, जिनकी कंपनियों को भारी डिमांड है।
उत्तराखंड की बड़ी समस्या बेरोजगारी से लोगों को निजात मिलेगा। लागू होने के बाद बेरोजगारी और पैसों के लिए परेशान किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है। अब देखना होगा कि यह हरा सोना इन लोगों की जिंदगी में हरियाली लाने में कितना कामयाब साबित होता है। उत्तराखंड सरकार ने भी राज्यभर में लौटे राज्य के मजदूरों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम में जुट चुकी हैण् इसका मकसद उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोरोना की वजह से राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना हैण् पर अभी भी काश्तकारों के मन में डर है कि जब तक हमें बाजार उपलब्ध नहीं होता तब तक हम ये काम शुरू भी कर लें तो लाभ दिखाई देता है।

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