डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। शारदीय नवरात्र के दौरान अष्टमी, नवमी और दशहरा पर्व की तिथियों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के बीच नागल ज्वालापुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पंडित मयूर जोशी और पंडित जय जोशी ने पंचांग के आधार पर पर्वों की तिथियां स्पष्ट की हैं। उनके अनुसार, इस वर्ष 19 अक्टूबर को ही महाअष्टमी व्रत, महानवमी और कन्या पूजन किया जाएगा, जबकि विजयादशमी एवं दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पंडितों के अनुसार, पंचांग में 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक सप्तमी तिथि है। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने के कारण 18 अक्टूबर को सप्तमी ही मानी जाएगी। वहीं, 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय के बाद एक घड़ी से अधिक समय तक अष्टमी तिथि रहने के कारण महाअष्टमी व्रत 19 अक्टूबर को करना उचित है। उन्होंने बताया कि नवमी तिथि के निर्धारण में सायंकाल की तिथि को भी ध्यान में रखा जाता है। 19 अक्टूबर को सायंकाल नवमी तिथि विद्यमान रहेगी, जबकि 20 अक्टूबर को सायंकाल नवमी तिथि का स्पर्श भी नहीं हो रहा है। इस आधार पर महानवमी और कन्या पूजन 19 अक्टूबर को ही किया जाएगा। पंडित मयूर जोशी और पंडित जय जोशी के अनुसार, 20 अक्टूबर को संपूर्ण अपराह्न काल में दशमी तिथि के साथ श्रवण नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसलिए विजयादशमी एवं दशहरा पर्व 20 अक्टूबर को मनाना शास्त्रसम्मत है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं के बजाय प्रमाणिक पंचांग और अपने पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार व्रत एवं पर्व मनाने की अपील की।














