उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक पीसी तिवारी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में संदिग्ध वीआईपी दुष्यंत कुमार गौतम को संवैधानिक पद पर स्थापित करने की कोशिशों और अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करने बोट हाउस क्लब पहुंचे उसके माता-पिता की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड की जनता की भावनाओं का अपमान है और इससे राज्यभर में भारी आक्रोश व्याप्त है।
तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने तक दुष्यंत कुमार गौतम को किसी भी संवैधानिक पद पर नियुक्त न किया जाए। उन्होंने कहा कि जब मामले को लेकर प्रदेश की जनता में गहरा रोष है, तब ऐसा कोई कदम उठाना जनता की भावनाओं से खिलवाड़ होगा। सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की तो उत्तराखंड की जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
तिवारी ने कहा कि पिछले 26 वर्षों में उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों की लूट, बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने प्रदेश की जनता को पहले ही संकट में डाल रखा है। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय जैसे गंभीर सवालों पर सरकार का रवैया अस्वीकार्य है। अंकिता प्रकरण में संदिग्ध वीआईपी का नाम सामने आने के बाद प्रदेशव्यापी आक्रोश के चलते सीबीआई जांच की मांग उठी है। जांच पूरी होने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को संवैधानिक पद पर स्थापित करने की कोशिश जनता के विश्वास को चोट पहुंचाएगी।
उन्होंने राज्य की एक महिला मंत्री द्वारा दुष्यंत कुमार गौतम के पक्ष में दिए गए बयान को भी दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। तिवारी ने कहा कि प्रदेश की जनता महिलाओं के सम्मान, न्याय और जवाबदेही के सवाल पर ऐसे रवैये को याद रखेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी।
तिवारी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों पर हुए बर्बर दमन, गोलीकांड और महिलाओं के साथ हुई यौन हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन गंभीर घटनाओं के पीड़ितों को आज तक पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य गठन के बाद की सरकारों ने भी न्याय और जवाबदेही के सवालों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता को न्याय की मांग करने पर गिरफ्तार करना और दूसरी ओर मामले में संदिग्ध व्यक्ति को संवैधानिक पद पर स्थापित करने की चर्चा उत्तराखंड की जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि वह अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रदेश की जनता की भावनाओं का सम्मान करने की लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहेगी। पार्टी ने चेतावनी दी कि जनभावनाओं की लगातार अनदेखी करने वाली सरकार को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।














