*हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट*।
थराली।
तो एक बार फिर आस्था एवं मान्यता पर राजनीति को हावी होने का मौका मिल गया
हैं।पूरे 12 वर्षों के लंबे समयांतराल तक 2026 का इंतजार कर रहे श्री नंदा भक्तों को अचानक से जब नंदादेवी राजजात समिति के द्वारा यह कहते हुए उच्च हिमालई क्षेत्रों में कार्य नही किया गया हैं और अनुमान के अनुसार 20 सितंबर के बाद यात्रा होमकुंड पहुंचेगी और उच्च हिमालई क्षेत्र में ठंड बढ़ जाएगी ऐसी स्थिति में बहुप्रतीक्षित यात्रा को 2027 तक के लिए स्थगित करनें की घोषणा से निश्चित ही उत्तराखंड ही नही देश,विदेश के नंदा भक्तों की भावनाएं आहत हुई होगी, इसके साथ ही आयोजन कमेटी ने राज्य सरकार को भी कटघरे में खड़ा करने में कसर नही छोड़ी हैं। निश्चित ही पिछले दो वर्षों से यात्रा को लेकर कर विभिन्न स्तरों पर की जा रही एक्सरसाइज पर भी पलीता लगाने के साथ ही यात्रा को लेकर संदेश भी बेहतर नही जा रहा हैं।
वर्ष 2000 में आयोजित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधे अपनी भूमिका तय करते हुए यात्रा में जरूरी व्यवस्थाओं को जुटाया जिससे यात्रा के आयोजन को भव्यता मिलने के साथ ही देश,विदेश में यात्रा की चर्चा होने लगी।उस दौरान भी यात्रा में कांस्वा के राजा बढ़े या कि मां नंदा भगवती बड़ी के प्रश्न उठते रहें बावजूद इसके छोटी,मोटी घटनाओं को छोड़ दें तों 280 किलोमीटर से अधिक लंबी यह यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो गई।12 सालों के हिसाब से यात्रा को 2012 में आयोजित होनी थी, किंतु ज्योतिष गणना के अनुसार 2012 को मलमास घोषित कर दिया गया और यात्रा को स्थगित कर दिया गया था।और 2013 में यात्रा का आयोजन प्रस्तावित किया गया था ,किंतु 2013 में उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण यात्रा को स्थगित कर दिया गया। वर्ष 2014 में नंदादेवी की कृपा से यात्रा का आयोजन हुआ और निर्विघ्न रूप से संपन्न भी हो गया । तभी घोषणा की गई थी कि अब 2026 में 12 वर्षों के हिसाब से यात्रा आयोजित होगी। पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार, नंदा भक्त 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा को लेकर तैयारियों में जुट गए थे। बकायदा पिछले एक साल से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा को लेकर कई उच्च स्तरीय बैठक कर आयोजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जगजाहिर किया था, शासन स्तर पर लगातार की जा रही एक्सरसाइज को देख कर माना जा रहा था कि यात्रा अपने तय समय 2026 में आयोजित होगी बकायदा राजजात समिति ने 23 जनवरी बसंत पंचमी के पर्व पर यात्रा का कलैंडर जारी करने की भी बात कही थी। जिससे देवी भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा हैं। किंतु गत रविवार को अचानक से जिस तरह से राजजात समिति ने कर्णप्रयाग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उसमें यात्रा को 2026 के बजाय 2027 में प्रस्तावित करने की बात करते हुए तर्क दिया गया कि नंदा नवमी 20 सितंबर को पड़ेगी, जिला प्रशासन के अनुसार उस दौरान उच्च हिमालई क्षेत्र में ठंड काफी बढ़ जाती हैं, तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए 2026 की यात्रा को 2027 तक के लिए स्थगित किया जाता हैं।इस घोषणा के बाद 2026 की यात्रा को लेकर उत्साहित देवी भक्तों में घोर निराशा व्याप्त हो गई हैं। यात्रा के स्थगन के बाद से जिस तरह से नंदा भक्त सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी भड़ास निकालने पर लगें हुए हैं, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि निश्चित ही यात्रा के स्थगित होने से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। नंदा भक्तों का कहना है कि नंदादेवी की लोकजात यात्रा (छोटी जात)एवं नंदा राजजात यात्रा(बड़ी यात्रा) अगस्त,सितंबर महीनों में ही सदियों से आयोजित होते आ रहे हैं, तो इस बार अगर 20 सितंबर को भी यात्रा होमकुंड जात के लिए पहुंचती हैं, तों बहुत बड़ी बात नही है। भक्तों का आरोप हैं कि धार्मिक यात्रा में कही ना कही राजनीति अपनी जमीन तलाश रही हैं, जोकि बिना ठोस कारण के प्रस्तावित 2026 की राजजात यात्रा को स्थगित करनें से साफ जाहिर भी हो रही है। आखिर यात्रा स्थगित होने से किसे लाभ होगा और किसे हानी यह तों समय ही बताएगा किंतु स्थगित से आम नंदा भगवती की भावनाएं जरूर आहत हुई हैं।











