डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक बद्रीनाथ धाम है, जो उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। इसका अन्य हिंदू तीर्थ स्थलों, विशेष रूप से चार धाम यात्रा में शामिल तीर्थ स्थलों (केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री के साथ-साथ यमुनात्री) से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। बद्रीनाथ धाम और अन्य हिंदू तीर्थ स्थलों के बीच ये ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध इस क्षेत्र के समग्र महत्व और आध्यात्मिक वातावरण में योगदान करते हैं। तीर्थयात्री भारत भर से और यहां तक कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बद्रीनाथ आते हैंबदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में शनिवार को देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ. देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है. दो दिवसीय महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ है. महोत्सव में श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, महिला स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय उद्यमियों ने प्रतिभाग किया.कार्यक्रम के स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर सवाल हैं. उन्होंने कहा कि बदरीनाथ देश के प्रमुख धार्मिक धामों में शामिल है और इसकी अपनी धार्मिक एवं पौराणिक मर्यादाएं हैं.बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजन के नाम पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप, तेज ध्वनि और प्रस्तुति को लेकर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य व संतों ने कड़ी आपत्ति जताई है. दोनों पक्षों का कहना है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए यहां होने वाले कार्यक्रमों के स्वरूप पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, लेकिन इस पवित्र धाम की आध्यात्मिक गरिमा और शांत वातावरण का ख्याल नहीं रखा गया.बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ विवादों में है. आरोप है कि कार्यक्रम में धार्मिक मर्यादा और पर्यावरण मानकों का ख्याल नहीं रखा गया. जिस पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ शंकराचार्य एवं संतों ने कार्यक्रम के स्वरूप व तेज ध्वनि पर आपत्ति जताई है. जबकि, पर्यावरणविद् ने भी हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोजनों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है.गौर हो कि बीती 19-20 सितंबर को बदरीनाथ धाम में अराइवल प्लाजा पर ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026 का रंगारंग आयोजन किया गया था. जिसका थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ था. जिसका मकसद संस्कृति, सीमा पर्यटन और स्थानीय आजीविका को मंच देना था. भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में महोत्सव का आयोजन हुआ था. इस सांस्कृतिक महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की छटा देखने को मिली, लेकिन फेस्टिवल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप, तेज डीजे संगीत पर ठुमके और मनोरंजन आधारित प्रस्तुति सवालों में आ गए.. दोनों पक्षों का कहना है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए यहां होने वाले कार्यक्रमों के स्वरूप पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, लेकिन इस पवित्र धाम की आध्यात्मिक गरिमा और शांत वातावरण का ख्याल नहीं रखा गया. बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह को अनुमति प्रदान करना ना केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण मे शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी उल्लेखनीय है की इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है साँथ में इतनी ऊचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृती के रूप में परिणीत किया जा रहा है।मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायीयों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूँ कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाये, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूँगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें,हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास माँ गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने उत्तराखंड के बदरीनाथ में हाल में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव को लेकर आपत्ति जताई है।उन्होंने कहा कि पवित्र धाम में संगीत कॉन्सर्ट और डीजे जैसे कार्यक्रम की अनुमति देना सांस्कृतिक मर्यादा का उल्लंघन और मंदिर की पवित्रता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।चमोली जिले के बदरीनाथ में ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ आयोजित किया गया था, जिसका विषय ‘संस्कृति हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ था।जोशी ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि बदरीनाथ धाम की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने हिमालयी वातावरण में शांतिपूर्ण भक्ति और स्तुति के लिए की थी।उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्र में तेज संगीत और बड़े आयोजनों के पर्यावरणीय तथा स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर भी विचार किया जाना चाहिए।जोशी ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने तथा देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने का आग्रह किया।उन्होंने शंकराचार्यों और संतों से भी सांस्कृतिक परंपराओं के क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाने की अपील की।जोशी ने कहा कि हिमालय भगवान शिव की भूमि और गंगा का उद्गम क्षेत्र है तथा इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। बदरीनाथ धाम में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक गायिका की प्रस्तुति भी हुई थी। कार्यक्रम के दौरान लोगों के डांस करने के वीडियो सामने आए। इसके बाद से सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है। कार्यक्रम का विरोध करने वालों का कहना है कि बदरीनाथ धाम सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग भगवान बदरी विशाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। साधु-संतों और मंदिर के पुजारियों ने धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का हवाला देते हुए इस तरह के आयोजन के स्वरूप पर आपत्ति जताई है। उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव ने भी इस आयोजन पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बदरीनाथ धाम में धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि बदरीनाथ धाम में शंख की ध्वनि वर्जित है। पहले लाउडस्पीकर पर भजन बजने पर एक संत की शिकायत पर हाई कोर्ट से रोक लगने के मामले का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने कपाट खुलने से पहले हुए कार्यक्रम और अब डीजे कॉन्सर्ट पर आपत्ति जताई। उधर, बदरीनाथ धाम में पिछले साल से मंदिर परिसर के 50 मीटर दायरे में किसी भी तरह के वीडियो, रील बनाना पूरी तरह से प्रतिबंधित किया हुआ है। यात्रा तैयारियों की बैठक में भी इस बात को बार-बार उठाया गया। लेकिन कपाट खुलने के दिन बदरीनाथ में हर कोई मोबाइल लेकर वीडियो बना रहा था। श्री बदरीनाथ धाम में परंपरा-विरुद्ध आयोजनों को लेकर स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने घोर आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने धाम में होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों में फूहड़ता और धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन पर चिंता जताई। स्वामी ने बदरीनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं और मर्यादा के अनुरूप आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धाम की गरिमा और धार्मिक स्वरूप का सम्मान बनाए रखा जाना चाहिए।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.










