• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

पहाड़ में पारा गिरने पर उगाया जा सकता है बटन मशरूम

09/01/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
432
SHARES
540
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए मशरूम जबरदस्त आधार बन सकता है। हजारों युवा मशरूम की खेती से जुड़ चुके हैं वहीं कई युवा मशरूम उत्पादन को अपनी समृद्धि का आधार सकते हैं क्योंकि मशरूम की मांग इतनी ज्यादा है कि स्थानीय बाजार में भी आसानी से बिक जाती है। अगर हजारों युवा भी मशरूम की खेती करें तो फिर मशरूम की पूर्ती करना असंभव है। देहरादून, हल्द्वानी, कोटद्वार, अल्मोड़ा, बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रपुर, श्रीनगर गढ़वाल, गौचर, नैनीताल, चम्पावत जैसे छोटे शहरों में मशरूम कहीं दिखता ही नहीं है। सब्जी मार्केट में मशरूम एक मिनट में ही बिक जाती है। जब हमारे आस.पास ही बाजार है तो हम उसे बेचने की फ़िक्र क्यों पालते हैं। एक बार उगा कर देखिए बाजार आपके पास दौड़ के चला आएगा।
पंजाब और हरियाणा देश की आधा से ज्यादा मशरूम उगाते हैं। उत्तरी राज्यों में मशरूम उत्त्पादन अच्छा होता है, इसलिए उत्तराखंड का नाम भी अब मशरूम के अग्रणी उत्पादकों में शामिल हो सकता है। इसके लिए बेरोजगार युवाओं को आगे आने की आवश्यकता है। यह बिना खेत की खेती है और इसमें कम लागत में कई गुना आमदनी है। जो बेरोजगार युवाओं को स्वलंबी बना सकता है। आपको बता दें कि मशरूम की खेती में होने वाले फायदे को देखकर इन दिनों इसकी खेती में शहरी युवा भी खासी दिलचस्पी ले रहे हैं। यही कारण है कि आजकल नए.नए तरीकों से मशरूम की खेती हो रही है। आप भी इसकी खेती से जुड़कर अच्छी आमदनी बना सकते हैं। कम लागत पर कई गुना आमदनी आपको 15 किलोग्राम मशरूम बनाने के लिए 10 किलोग्राम गेहूं के दानों की आवश्यकता होती है। यदि आप एक बार में 10 क्विंटल मशरूम उगा लेते हैं तो आपका कुल खर्च 40.50 हजार रुपए आएगा और उसकी कीमत करीब 2 लाख रूपये से अधिक होगी। इसके लिए आप पुराने घरों में रैक लगाकर इसे ज़माना होगा। उत्तराखंड में भूसा आसानी में कम कीमत पर आपको मिल सकता है। 10 ग्राम लगता है बीज सबसे पहले गेहूं को उबाला जाता है और इस पर मशरूम पाउडर डाला जाता है, जिससे मशरूम का बीज तैयार हो जाता है। इसे तीन महीने के लिए इस बीज को 10 किलोग्राम गेहूं के भूसे में 10 ग्राम बीज के हिसाब से रखा जाता है। 3 महीने बाद गेहूं के ये दाने मशरूम के रूम में अंकुरित होने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें 20 से 25 दिनों के लिए पॉलिथीन में डालकर 25 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान वाले कमरे में रखा जाता है। इसके बाद मशरूम बिकने के लिए तैयार होता है।
ओइस्टर मशरूम की देश में सबसे अधिक मांग है। ब्रांडेड स्टोर पर भी सबसे ज्यादा ओइस्टर मशरूम ही बिकता है। इस मशरूम के दाम कम से कम 150 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम हैं। स्थानीय बाजार को आसानी से आप इनके इस्टाल लगा सकते हैं। यदि आप बेहतर मार्केटिंग कर किसी रिटेल स्टोर से करार कर सकते हैं तो दाम और भी बेहतर मिल सकते हैं। सालभर में दो बार इसे पैदा किया जा सकता है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती हैए मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। देहरादून की बेटी युवा उद्यमी दिव्या रावत पर यह पंक्तियां सटीक बैठती हैं। मशरूम गर्ल के नाम से मशहूर दिव्या ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में स्वरोजगार की नई इबारत लिख युवाओं को रास्ता दिखाया है कि वे नौकरी करने वाली नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। दिव्या कहती हैं कि बदली परिस्थितियों में नौकरियों के सीमित अवसर को देखते हुए यही सबसे बेहतर विकल्प भी है। इससे जहां स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होने से आर्थिकी संवरेगीए वहीं रोजगार की समस्या से भी दो.चार नहीं होना पड़ेगा। वह कहती हैं कि युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आकर क्षेत्र, प्रदेश और देश की तरक्की में अपना योगदान देना चाहिए। दिव्या ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के बूते यह दर्शाया है कि हौसले बुलंद हों तो क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। उनकी कामयाबी की दास्तान इसकी तस्दीक भी करती है। दिव्या ने पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने सोशल वर्क के क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन एक संस्था में नौकरी रास नहीं आई और खुद के बूते किस्मत लिखने की ठानी। साढ़े पांच साल पहले दिव्या ने देहरादून में सौम्या फूड प्राइवेट लिण् कंपनी स्थापित कर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा उन्होंने न सिर्फ मशरूम उत्पादन शुरू किया, बल्कि देहरादून समेत राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी युवाओं और महिलाओं को इसके लिए प्रेरित किया। धीरे.धीरे दिव्या मशरूम गर्ल के नाम से पहचानी जाने लगी। वह देहरादून में बटन, ओएस्टर और मिल्की मशरूम के उत्पादन के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र की मिल्यिकत कीड़ा जड़ी का उत्पादन भी अपनी लैब में कर रही हैं। साढ़े पांच साल के सफर में दिव्या की कंपनी का टर्नओवर 15 करोड़ तक पहुंच चुका है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र की मिल्कियत कीड़ा जड़ी यारसा गंबू को शक्तिवर्द्धक औषधि के रूप में ही जाना जाता था, लेकिन अब आप दून में कीड़ा जड़ी चाय का भी आनंद ले सकते हैं। मशरूम गर्ल दिव्या रावत ने पिछले साल से दून में कीड़ा.जड़ी का दून में उत्पादन शुरू करने के साथ ही कीड़ा.जड़ी चाय की बिक्री प्रारंभ कर दी है। दिव्या का दावा है कि यह देश का पहला कीड़ा जड़ी चाय रेस्टोरेंट है। इसमें ग्राहकों को कीड़ा.जड़ी चाय से होने वाले तमाम फायदों से भी रूबरू कराया जा रहा है। कीड़ा.जड़ी उत्पादन के लिए दिव्या ने अपने घर में एक विशेष लैब बनाई है। उन्होंने मई 2017 में कीड़ा.जड़ी का उत्पादन शुरू किया और वर्तमान में दो माह में करीब 60 किग्रा कीड़ा जड़ी तैयार हो रही है। इसकी बाजार में कीमत 1.20 करोड़ रुपये प्रति किलो है। दिव्या लंबे अर्से से मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। साथ ही देहरादून समेत पहाड़ के गांव.गांव जाकर लोगों को भी मशरूम उगाने का प्रशिक्षण देती हैं। उन्होंने खाली पड़े खंडहरों, मकानों में मशरूम उत्पादन शुरू किया। इसके बाद कर्णप्रयाग, चमोली, रुद्रप्रयाग, यमुना घाटी के विभिन्न गांवों की महिलाओं को इस काम से जोड़ा। उन्होंने जितनी गंभीरता से मशरूम के प्रोडक्शन पर ध्यान दिया, उतनी ही मशक्कत से इसकी मार्केटिंग में भी हस्तक्षेप किया। अब तो प्रदेश सरकार ने उनके कार्यक्षेत्र रवाई घाटी को मशरूम घाटी घोषित कर दिया है। दिव्या बताती हैं कि अब दून समेत राज्यभर में पांच हजार से अधिक युवाओं और महिलाओं को मशरूम उत्पादन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से अधिकांश ने उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया है।उत्तराखंड की दिव्या रावत जैसी बेटियों पर सिर्फ उत्तराखंड को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को नाज है, जो देश के कई अन्य राज्यों में युवाओं को मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दे रही हैं।
हजारों युवाओं एवं महिलाओं को आज यदि रोजगार नसीब हो रहा है, तो सिर्फ दिव्या के साहसिक कदम से। 29 वर्षीय दिव्या को उनकी उपलब्धि के लिए वर्ष 2017 में विश्व महिला दिवस पर मशरूम क्रांति के लिए राष्ट्रपति भवन में सम्मानित भी किया जा चुका है। उत्तराखंड सरकार इन्हें पहले ही अपना ब्रांड एंबेसेडर घोषित कर चुकी है। इसके अलावा उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। । उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त के फसल उत्पादन कर देश.दुनिया में स्थान बनाने के साथ राज्य की आर्थिकी तथा पहाड़ी क्षेत्रों में पलायान को रोकने का अच्छा विकल्प बनाया जा सकता है। अगर ढांचागत अवस्थापना के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो यह पलायन रोकने में कारगर होगी उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती हैण्उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं ही नहीं, यहां के खान.पान में भी विविधता का समावेश है। पहाड़ में पारा गिरने पर किसानों की आय नहीं गिरेगी। पारा गिरने पर भी पौष्टिक मशरूम की खेती संभव होगी। कृषि विज्ञान केंद्र ने एक ऐसी प्रजाति इजाद की है बटन मशरूम। यह मशरूम सर्दियों के मौसम भी उगाई जा सकेगी। कृषि विज्ञान केंद्र बागेश्वर काफलीगैर के विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद और बटननुमा आकार होने की वजह से सर्दियों में होने वाली इस मशरूम का नाम बटन मशरूम है। बटन मशरूम की 14 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान में आसानी से पैदावार हो जाती है। सर्द मौसम में बंद कमरे में टनल में कंपोस्ट खाद के साथ बीज मिला देते हैं। 20.25 दिनों में ये मशरूम उगने लगेगी। यह बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होती है। इसकी बाजार में बेहद मांग है। इस तरह किसान पारा गिरने पर भी आय बढ़ा सकता है।
अभी तक पहाड़ में सर्दियों में मशरूम की खेती नहीं होती है। सिर्फ गर्मियों और बारिश में मशरूम की पैदावार होती है। बारिश में हुई मशरूम में जहरीला होने का खतरा बना रहता है। विकास प्रदर्शनी में कृषि विज्ञान केंद्र के स्टाल पर इस मशरूम की जबरदस्त मांग हैं। बटन मशरूम की जाड़े के मौसम में पहाड़ी जनपदों में खेती हो सकती है। सिर्फ 20.25 दिनों में अच्छी फसल हो जाएगी। इसकी बाजार में मांग हैं और दाम भी अच्छे मिलते हैं। इससे किसान सर्दियों में भी आय कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गरीबी दूर करने के लिए मशरूम की खेती किसानों के लिए एक बेहतर उपाए हैं। बहुत से सफल किसान इसका जीता जागता उदाहरण हैं। मशरूम खाने में जितना लजीज होता हैए उतना ही हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होता है। मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्वों का भंडार है, जिसकी जरुरत हमारे शरीर को होती है। विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम जैसे कई खनिज और विटामिन इसमें पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। शायद ही आपको ये मालूम होगा कि मशरूम का इस्तेमाल कई बिमारियों के इलाज में भी किया जाता है। पिछले कुछ सालों में मशरूम की मांग हमारे देश में तेजी से बढ़ी है। भारत, जहां की ज्यादातर आबादी शाकाहारी है, वहां शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए भी मशरूम का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है। वहीं भारत में मशरूम की बढ़ती मांग को देखते हुए अब इसकी खेती भी बड़े पैमाने पर की जाने लगी है। देश के कई राज्यों में मशरूम की खेती वृह्त रुप से की जा रही है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अब भी बाजार की मांग की तुलना में मशरूम का उत्पादन कम हैं। हालांकि अब तो कई ऐसे तकनीक बाजार में आ गए हैं।

Share173SendTweet108
Previous Post

सूर्या कप अंडरः 17 क्रिकेट टूर्नामेंटः सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल देहरादून टीम विजेता

Next Post

पहाड़ों पर पाला पड़ने से बढ़ी फिसलन, मैदानी जिलों में छाया कोहरा अगले तीन दिन के लिए चेतावनी जारी

Related Posts

उत्तराखंड

राष्ट्रीय स्तर पर आइस हॉकी खेलने वाली उत्तराखंड की पहली खिलाड़ी बनीं डोईवाला की वैष्णवी

January 28, 2026
3
उत्तराखंड

रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी, मुकदमा दर्ज

January 28, 2026
17
उत्तराखंड

दून पुस्तकालय में नवनीत सिंह के कविता संग्रह ‘पानी के अभिलेख ‘का लोकार्पण

January 28, 2026
5
उत्तराखंड

जलवायु परिवर्तन का बुरांश के फूलों पर बुरा प्रभाव, अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

January 28, 2026
5
उत्तराखंड

उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किये जाने हेतु सिडकुल को हस्तान्तरित

January 28, 2026
9
उत्तराखंड

जन-जन के द्वार अभियान के अंतर्गत न्याय पंचायत किनाथ में बहुउद्देश्यीय शिविर का आयोजन

January 28, 2026
19

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67607 shares
    Share 27043 Tweet 16902
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45770 shares
    Share 18308 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38042 shares
    Share 15217 Tweet 9511
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37431 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37316 shares
    Share 14926 Tweet 9329

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

राष्ट्रीय स्तर पर आइस हॉकी खेलने वाली उत्तराखंड की पहली खिलाड़ी बनीं डोईवाला की वैष्णवी

January 28, 2026

रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी, मुकदमा दर्ज

January 28, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.