ज्योतिर्मठ।
श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ धामों में विषम भौगोलिक परिस्थितियों मे काम करने वाले श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति”बीकेटीसी” के कार्मिकों को आखिर अपने जायज अधिकारों के लिए आंदोलनात्मक निर्णय लेने के लिए क्यों बाध्य होना पड़ता है?, राज्य सरकार के अधीन एवं श्री बद्रीनाथ केदारनाथ अधिनियम 1939 द्वारा संचालित इस समिति मे कर्मचारियों को अपने प्रमोशन के लिए गुहार तो लगानी पड़ रही है सैकड़ो कर्मचारी वर्षों से नियमित होने की राह देख रहे है, कई तो बीस बीस वर्ष से अधिक के सेवा कर बिना नियमित हुए ही सेवानिवृत हो चुके हैं।
श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम जिनका कायाकल्प करने का बीड़ा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उठाया है, और इन दोनों धामों मे पूजा पाठ, दर्शन व्यवस्था सहित मंदिर से सम्बंधित सभी कार्य बीकेटीसी के अधिकारियों /कर्मचारियों के जिम्मे रहता है, उच्च हिमालयी इन धामों मे समिति के ये कर्मचारी विषम भौगोलिक स्थितियों मे अपने कर्तब्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते आ रहे हैं, इनमें सैकड़ों कर्मचारी स्थिर वेतन व स्वयं सेवक के रूप मे अल्प वेतन मे कार्य कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं।
हालांकि अस्थाई कार्मिकों को नियमित करने या वेतन बढ़ाने जैसे प्रयास होते भी रहे हैं, केदारनाथ उप चुनाव के दौरान सूबे के मुख्यमंत्री द्वारा बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अस्थाई कर्मचारियों को वन टाईम सेटेलमेंट करते हुए लाभ दिए जाने की घोषणा भी की थी।
गत वर्ष के यात्राकाल के दौरान श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ दोनों धामों के लिए पीआरडी के माध्यम से सेवा पर रखा जा रहा है, जिन्हें लगभग बीस हजार रुपया मासिक वेतन भी दिया जा रहा है, लेकिन विगत 20-25वर्षों से नियमित होने की आस मे अल्प वेतन लेने वाले कार्मिकों की भगवान के प्रति श्रद्धा या उनका भोलापन ही समझे कि उन्होंने इस निर्णय का विरोध तो नहीं किया पर यह तक भी नहीं कहा कि जितनी वेतन इन पीआरडी वालों को दे रहे हैं उतनी उन्हें भी दे दो।
इन सबके बीच प्रतिनियुक्ति/संविदा नियुक्ति को लेकर प्रकाशित एक विज्ञप्ति ने आग मे घी डालने का काम कर दिया, इस विज्ञापन के प्रकाशित होते ही कर्मचारी संघ आग बबूला हो गया, संघ ने श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्यकार्याधिकारी को ज्ञापन भेजकर जब तक कार्मिकों का प्रमोशन, अस्थाई कर्मचारियों का वन टाईम सेटेलमेंट व वेतन बृद्धि प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती तब तक नई नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
ज्ञापन मे कहा गया है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारियों को विवश होकर विधि सम्मत एवं लोकतान्त्रिक माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा हेतु निर्णनायक कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
यह ज्ञापन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजेन्द्र सिंह बिष्ट, महामंत्री भूपेंद्र रावत, उपाध्यक्ष रविन्द्र भट्ट सहित श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ अधिष्ठानों के कार्मिकों के हस्ताक्षरों से प्रेषित किया गया है।











