• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

हिमालय के आंचल में बसे सुरम्य मखमली बुग्याल

22/07/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
17
SHARES
21
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
दिव्य सौंदर्य और हिमालयी परिदृश्यों की भूमि, उत्तराखंड, "बुग्यालों"
नामक अद्भुत ऊँचे घास के मैदानों का घर है। 3,500 मीटर से 6,000
मीटर की ऊँचाई पर पाए जाने वाले ये अल्पाइन घास के मैदान अपनी हरी-
भरी हरियाली, जीवंत जंगली फूलों और मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध हैं।
अक्सर "चारागाह" या "पश्चर" कहे जाने वाले बुग्याल उत्तराखंड के
पारिस्थितिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते
हैं।समुद्रतल से साढे तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर अत्यधिक ठंडे
वातावरण के कारण वृक्ष प्रजातियां सामान्यतया समाप्त होने पर इसे वृक्ष
रेखा कहते हैं। साढ़े तीन से साढ़े चार हजार मीटर पर वृक्ष और हिम रेखा के
बीच के क्षेत्र को बुग्याल कहा जाता है। बुग्यालों में 3300 से 3800 मीटर
तक फिच्ची घास और 3800 मीटर से ऊपर बुग्गी घास समेत अनमोल
वनस्पतियों के विपुल भंडार हैं।आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड के
उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित बुग्याल यानी मखमली हरी घास के मैदान भी
दरक रहे हैं। भूस्खलन, भूकटाव से कराहते बुग्यालों के उपचार को लेकर
सरकार संजीदा हुई है।राज्य में बुग्यालों की संख्या लगभग दो सौ हैं। यह
क्षेत्र हल्के ढलान वाले होते हैं और अधिकतर में घास होती है। नवंबर से मई
जून तक ये बर्फ से ढके रहते हैं। शेष मौसम में बुग्याल भेड़पालकों के लिए

ग्रीष्मकालीन चरान स्थल हैं तो प्रकृति प्रेमियों व साहसिक पर्यटन के
शौकीनों को ये अपनी ओर आकर्षित करते हैं। बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप,
अनियंत्रित चरान-चुगान, जलवायु परिवर्तन, अवांछित प्रजातियों की
घुसपैठ, जड़ी-बूटियों का अनियंत्रित विदोहन का दुष्प्रभाव बुग्यालों पर पड़ा
है। बादल फटने, अतिवृष्टि, शीतकाल का सिकुडऩा जैसे कारणों से बुग्याल
दरक रहे हैं। इसे लेकर सरकार भी सतर्क हो गई है। उत्तराखंड के बुग्याल न
केवल मनोरम परिदृश्य हैं, बल्कि इस क्षेत्र की जैव विविधता और पशुपालन
अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड के मखमली बुग्यालों का
अस्तित्व संकट में है। मवेशियों का अनियंत्रित चुगान और जड़ी-बूटियों का
अवैज्ञानिक दोहन आनेवाले समय में इन बुग्यालों का वजूद खत्म कर सकता
है।शोध रिपोर्ट 'रेंडम मैपिंग एक्सरसाइज(आरएमई) में हुआ है। रिपोर्ट के
मुताबिक बुग्यालों में कई घास और औषधीय पादपों की प्रजातियां तेजी से
कम हो रही हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल हिमायल में हिमशिखरों की तलहटी में
टिंबर लाइन (पेड़ों का उगना) समाप्त हो जाती है और मखमली घास के
मैदान शुरू हो जाते हैं, जिन्हें बुग्याल कहा जाता है। बुग्याल आमतौर पर
आठ से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित होते हैं। शीतकाल में ये बुग्याल
बर्फ से लकदक रहते हैं, जिससे प्राकृतिक सौंदर्य और निखरकर सामने आता
है। इन बुग्यालों में मखमली घास के साथ औषधीय पादपों की 250 से 300
तक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश दुर्लभ हैं। पिछले कुछ वर्षों
में बुग्यालों में मानवीय दखल बढ़ा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव यहां की

वनस्पति पर पड़ रहा है। जड़ी- बूटी एवं विकास संस्थान गोपेश्वर और वन
विभाग ने हाल ही में स्थानीय बुग्यालों पर एक रेंडम मैपिंग एक्सरसाइज
की, जिसकी रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार
नंदा देवी, फूलों की घाटी, गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क और कुछ वन पंचायतों को
छोड़कर कई बुग्यालों में स्थानीय तथा घुमंतू चरवाहे मवेशियों को चराने
और जड़ी-बूटियां ढूंढऩे जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार उत्तराखंड के
बुग्यालों में करीब डेढ़ लाख भेड़- बकरियां और करीब दस हजार गाय-भैंस
व घोड़े-खच्चर चरते हैं। नतीजतन, बुग्याल में वनस्पतियों का आवरण घटने
के साथ खरपतवारों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है, जिसका बुग्यालों के
वजूद पर बुरा असर पड़ रहा है। जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान के
निदेशक डा. आरसी सुन्दरियाल का कहना है कि इन दो कारणों से बुग्याल
में अतीश, कटुकी, जटामासी, वनककड़ी, मीठा, सालमपंजा, सुगन्धा आदि
प्रजातियों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। दूसरी ओर, केदारनाथ
वन प्रभाग के डीएफओ के मुताबिक बुग्यालों में मवेशियों के चुगान से
भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बुग्यालों के संरक्षण के लिए
विभाग की ओर से एक प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा गया है।
उत्तराखंड के प्रमुख बुग्याल, अनुमानित क्षेत्रफल और मवेशियों की संख्या
प्रमुख बुग्याल क्षेत्रफल (वर्ग मीटर में) मवेशियों की संख्या 1. पलंग गाड़,
छियालेख-गब्र्याल, कालापानी, नाबी, ढांग, लीपूलेख, नम्पा, कुटी, सेला
यांगती ज्योलिंग कॉग 365 15000 भेड़-बकरी व 250 गाय-भैंस 2.

चोरहोती, कालाजोवार, नीती, तिमर सेन, गोथिंग, ग्यालडुंग, ढामनपयार,
मलारी 280 188500 भेड़-बकरी व 350 गाय भैंस 3. सुंदर ढुंगा,
पिण्डारी, कफनी, नामिक 125 2000 भेड़-बकरी व 350 गाय भैंस 4.
धरांसी, सरसो पातल, भिटारतोनी वेदनी औली, रूपकुंड 215 4500 भेड़-
बकरी व 500 गाय भैंस 5. सतोपंथ, ढानू पयार, सेमखरक, देववन,
नीलकंठआधार, खीरोंघाटी, फूलों की घाटी, राजखर्क, कागभुसण्डी 220
4800 भेड़-बकरी व 300 गाय भैंस 6. रूद्रनाथ, तुंगनाथ, विसूरी ताल,
मनिनी, खाम, मदमहेश्वर, केदारनाथ, वासुकीताल 235 14000 भेड़-
बकरी व 1500 गाय भैंस इन बुग्यालों के पावन वातावरण में पल भर बैठने
से मानव का अन्त:करण शुद्ध हो जाता है और उसे सांसारिक राग, द्वेष,
घृणा, लोभ, क्रोध, अहंकार जैसे भावों पर विजय पाने की शक्ति मिलती है
तथा मानव में सत्य, स्नेह, संयम, पवित्रता, दान, दया जैसे भावों का उदय
होता है। बरसात व शरत ऋतु में इन बुग्यालों में अनेक प्रजाति के पुष्प व
जडी़ बूटियां अपने यौवन पर रहती है इसलिए बरसात के समय बुग्यालों की
सुन्दरता और अधिक बढ़ जाती है। हिमालय के आंचल में फैले मखमली
बुग्यालों में कुखणी, माखुणी, जया – विजया, रातों की रानी सहित अनेक
प्रजाति के पुष्प व जडी़ बूटियां प्रति वर्ष उगती हैै। सिद्ववा – विद्धवा व एडी
– आछरी नृत्य में कुखणी – माखुणी पुष्पों की महिमा का गुणगान बडे़
मार्मिकता के साथ किया जाता है तथा सिद्धवा – विद्धवा नृत्य मे बुग्यालो
की महिमा का वर्णन शैला सागरों (शान्त वातावरण) से किया गया है।

प्रकृति प्रेमी ने बताया कि केदार घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार
हो रही बारिश के कारण सभी मखमली बुग्याल हरियाली से आच्छादित है
तथा मखमली बुग्यालों के हरियाली से आच्छादित होने के कारण बुग्यालों
की सुन्दरता और अधिक बढ़ने लगी है। जागर गायिका रामेश्वरी भट्ट ने
बताया कि पौराणिक जागरो में मखमली बुग्यालों का वर्णन बड़े ही मार्मिक
तरीके से किया जाता है तथा हिमालय के आंचल में फैले असंख्य बुग्याल
देवभूमि की धरोहर हैै। प्रकृति प्रेमी विनीता राणा ने बताया कि हिमालय के
आंचल में फैले बुग्यालों में ऐडी – आछरियों व इन्द्र की परियों का वास
माना जाता है तथा वे आज भी इन बुग्यालों में अदृश्य रुप से नृत्य करते हैं।
भेड़ पालक प्रेम भटट् ने बताया कि बुग्यालों में हरियाली लौटने से सभी भेड़
पालक ऊंचाई वाले इलाकों के लिए अग्रसर होने लगे हैं। क्षेत्र के बुग्यालों में
हर साल देश- विदेश से पर्यटक आते है। कोरोनाकाल में पर्यटकों की संख्या
में कमी आई। लेकिन अब पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। वन विभाग यहां
आने वाले पर्यटकों से शुल्क लेता है। बुग्यालों से वन विभाग को हर साल
लाखों की आय भी होती है, लेकिन विभाग बुग्यालों के संरक्षण के लिए
प्रयास नहीं कर पाया। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून*
*विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

Share7SendTweet4
Previous Post

त्रिस्तरीय पंचायत के लिए 24 जुलाई को होगा पहले चरण का मतदान

Next Post

37 दूरस्त मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियां हुई रवाना

Related Posts

उत्तराखंड

100 वर्ष गौरवशाली संघ यात्रा पूर्ण होने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन

March 30, 2026
7
उत्तराखंड

युद्ध पश्चिम एशिया संकट क्यों बना कानूनी उलझन

March 30, 2026
6
उत्तराखंड

रामलीला महायज्ञ का सोमवार को श्री राम राज्याभिषेक के साथ समापन

March 30, 2026
11
उत्तराखंड

उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह में पहुंचे सीएम धामी

March 30, 2026
11
उत्तराखंड

उत्तराखंड में चुनाव मैदान में उतरेगी आम आदमी पार्टी

March 30, 2026
19
उत्तराखंड

राजी भाषा एवं संस्कृति पर डॉ. शोभाराम शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण

March 30, 2026
7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67666 shares
    Share 27066 Tweet 16917
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38049 shares
    Share 15220 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37326 shares
    Share 14930 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

100 वर्ष गौरवशाली संघ यात्रा पूर्ण होने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन

March 30, 2026

युद्ध पश्चिम एशिया संकट क्यों बना कानूनी उलझन

March 30, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.