डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस साल19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. यात्रा को लेकर हर साल श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित करने या उसे नियंत्रित करने को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं, जिससे यात्रियों के बीच अक्सर असमंजस की स्थिति भी बन जाती है. लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही राज्य सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. सरकार ने साफ कर दिया है कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर किसी भी तरह की कोई पाबंदी नहीं लगाई जाएगी.राज्य सरकार के इस फैसले से देश-विदेश से चारधाम आने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है. दरअसल पिछले कुछ सालों में यात्रा के दौरान भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बार यात्रियों की संख्या सीमित करने या यात्रा को नियंत्रित करने की बातें सामने आई थीं. ऐसे में कई श्रद्धालुओं को यह चिंता रहती थी कि कहीं यात्रा के दौरान उन्हें दर्शन का अवसर न मिल पाए, लेकिन इस बार सरकार का स्पष्ट रुख सामने आने के बाद यह तय हो गया है कि जो भी श्रद्धालु चारधाम यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें धामों तक पहुंचने से नहीं रोका जाएगा. उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में इस कदर उत्साह है कि पंजीकरण के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन विंडो खुलते ही भक्तों ने भारी संख्या में आवेदन किए हैं। उत्तराखंड के हिमालयी धामों- बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा के लिए श्रद्धालुओं ने पंजीकरण में नया इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड की देवभूमि में चारधाम यात्रा 2026 का शंखनाद हो चुका है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन की इच्छा रखने वाले भक्तों के लिए बड़ी खबर है कि सरकार ने 6 मार्च 2026 सुबह 7 बजे से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और रिपोर्ट के मुताब्क अब तक 1.24 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर 19 अप्रैल से यात्रा का श्रीगणेश होगा। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए सरकार ने हर यात्री के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है।श्रद्धालु घर बैठे अपने मोबाइल फोन से चारधाम यात्रा के लिए बुकिंग कर सकते हैं। इस पवित्र यात्रा में हर साल लाखों लोग शामिल होते हैं और इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।उत्तराखंड की इस प्रसिद्ध तीर्थयात्रा में भक्त चार प्रमुख धामों केदारनाथ), बद्रीनाथ, गंगोत्रीऔर यमुनोत्री )तीर्थयात्रा के दर्शन करते हैं। हिंदू धर्म में इस यात्रा को बेहद पवित्र माना जाता है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए परिवहन विभाग ने इस बार महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिए हैं। अब यात्रा पर संचालित होने वाले हर वाहन के ट्रिप कार्ड पर यात्रियों और चालक की जानकारी के साथ-साथ टूर आपरेटर या वाहन मालिक का नाम, मोबाइल नंबर और लाइसेंस नंबर दर्ज होना अनिवार्य होगा। पहले यह जानकारी उपलब्ध नहीं होने से शिकायत की स्थिति में केवल चालक पर कार्रवाई होती थी और टूर आपरेटर बच निकलते थे। नई व्यवस्था से अब आपरेटर की जिम्मेदारी सीधे तय होगी और फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगेगा।चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर नोडल अधिकारी आरटीओ (प्रशासन) ने संयुक्त रोटेशन से जुड़ी बस कंपनियों, टैक्सी-मैक्सी कैब यूनियन और टेंपो ट्रैवलर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ दो दिन पहले ऋषिकेश में बैठक की थी। बैठक के बाद निर्धारित की गई रणनीति और व्यवस्था के आरटीओ ने दो टूक कहा कि यात्रियों से तय किराये से अधिक वसूली की गई तो वाहन का परमिट तत्काल निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने परिवहन कंपनियों को बसों की तकनीकी स्थिति दुरुस्त रखने, चालकों को अनिवार्य रूप से वर्दी में रहने, ओवरस्पीड व ओवरलोडिंग पर सख्त रोक तथा हर वाहन में डस्टबिन और स्पीड लिमिट डिवाइस अनिवार्य करने के निर्देश दिए। आरटीओ ने कहा कि यात्रा पर जाने वाली स्टेज कैरिज बसों को यदि दूसरे मार्ग का अस्थायी परमिट चाहिए होगा तो यह सुविधा रात में भी आनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसी बस की यात्रा बाधित न हो। चारधाम यात्रा में इस बार कुल 1800 बसें संचालित की जाएंगी, जिनमें 400 बसें रिजर्व रहेंगी। प्रतिदिन 130 बसें रवाना होंगी और 10 दिन की यात्रा अवधि में लगभग 1300 बसें मार्गों पर चलेंगी। जिन वाहनों का ग्रीन कार्ड या ट्रिप कार्ड समय पर नहीं बन पाएगा, उनके यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए ऋषिकेश में तत्काल ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड जारी करने की व्यवस्था की जाएगी। यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु हरिद्वार, ऋषिकेश और हरबर्टपुर में सुविधा केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। इस बार चेकिंग व्यवस्था भी पहले से अधिक कड़ी होगी। विभाग अपनी छह स्थाई चेकपोस्टों के अलावा धामों के मार्गों पर प्रवर्तन दलों की तैनाती करेगा। यमुनोत्री मार्ग पर डामटा-बड़कोट-जानकीचट्टी तक, बदरीनाथ मार्ग पर जोशीमठ-गोविंदघाट-बदरीनाथ तक, गंगोत्री मार्ग पर उत्तरकाशी-गंगोत्री तक जबकि केदारनाथ मार्ग पर रुद्रप्रयाग-अगस्त्यमुनि-गुप्तकाशी तक प्रवर्तन दल तैनात रहेंगे। एक अतिरिक्त दल ऋषिकेश-ब्यासी-कीर्तिनगर मार्ग पर रहेगा। प्रत्येक चेकपोस्ट पर सात-सात कर्मचारी हर वाहन के ग्रीन कार्ड, ट्रिप कार्ड, चालक की स्थिति और ओवरलोडिंग की जांच करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चारधाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री धाम से की जाती है. यमुनोत्री को यमुना नदी का उद्गम स्थल माना जाता है. मान्यता है कि यहां स्नान करने से व्यक्ति को मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है. हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के चारधाम पहुंचने की उम्मीद है.सरकार ने सभी यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपना रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं और यात्रा के दौरान मिलने वाले ‘यात्रा रजिस्ट्रेशन लेटर या QR कोड’ को सुरक्षित रखें, क्योंकि दर्शन के समय इसकी आवश्यकता होती है. यात्रा के दौरान कई बार अधिक भीड़ होने से आश्रम को लाभ मिलता है। ऐसी स्थिति में यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आठ टिकटों में 104 होल्टिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर तीर्थयात्रियों के लिए भोजन, रात्रि विश्राम की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।इसके साथ ही गढ़वाल क्षेत्र में 54 स्थानों पर आपदा प्रबंधन एस्टिक की मांग है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति में राहत और बचाव कार्य शुरू हो सके।न घाटों पर भी रहती हैं विशेष सुरक्षाचारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थ हरिद्वार, रिज़र्व, देव प्रयाग, मुनिकीरेती और शिवपुरी जैसे प्रमुख घाटों पर स्नान होते हैं। कई बार डूबने की घटनाओं की आपदा को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 17 स्थानों पर अरेस्ट, 24 स्थानों पर जल पुलिस और 7 स्थानों पर फ्लड स्टेक पर स्टेक एसोसिएशन की मांग शामिल है। चारधाम यात्रा के साथ ही वर्ष 2027 में होने वाले अर्धकुंभ को ध्यान में रखते हुए भी पुलिस विभाग ने अपना दल शुरू कर दिया है। इस बार बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स की जरूरत पड़ सकती है। इसी विषय पर चर्चा के पुलिस मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की गई, जिसमें बाहरी राज्यों से अतिरिक्त सुरक्षा बल मंगाने पर विचार किया जाएगा। चारधाम यात्रा मार्ग पर आने वाले भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की भी पहचान कर ली गई है। पिछले साल 58 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए थे और हाल की प्राकृतिक आपदाओं के बाद कुछ नए संवेदनशील क्षेत्र भी सामने आए हैं। इन सभी स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए जेसीबी मशीनें भी उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी, एनएच और बीआरओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।कोई विकास करने नहीं आ रहे हैं. राज्य सरकार और प्रशासन को उम्मीद है कि इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होंगे। पिछले कुछ वर्षों में यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं, जिससे राज्य की पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिला है। ऐसे में सरकार इस बार भी यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए हर स्तर पर तैयारियां कर रही है.इस बार चारधाम यात्रा को लेकर सरकार का संदेश साफ है कि श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। संख्या पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होगी, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन स्थिति के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेगा. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.












