
उर्गम घाटी, जोशीमठ चमोली। आजादी के 75 वर्ष हो गए हैं पूरे देश में अमृता उत्सव आजादी के जश्न मनाया जा रहा है किंतु उत्तराखंड राज्य के चमोली के जोशीमठ वर्तमान में ज्योर्तिमठ का एक ऐसा गांव है, जो आज भी 26 किलोमीटर पैदल चलता है।
हां जी जिला मुख्यालय से डुमक गांव जाने के लिए बड़ी कठिनाई का रास्ता तय करना पड़ता है। जिला मुख्यालय गोपेश्वर से घिंघराण कुजों मैकोट तक गाड़ी से पहुंचा जा सकता है। वहां से एक पैदल खड़ी चढ़ाई 16 किलोमीटर तय करने के बाद 4 किलोमीटर उत्तराई का रास्ता और 6 किलोमीटर चढ़ाई का रास्ता पार करने के बाद डुमक गांव आता है। यह गांव सांस्कृतिक रूप से बड़ा ही महत्वपूर्ण है, गांव में 80 परिवार निवास करते हैं, सभी ठाकुर जाति के लोग हैं। गांव में प्राथमिक पाठशाला जूनियर हाई स्कूल जनता हाई स्कूल सहित बुनियादी सुविधाएं बिजली पानी की व्यवस्था है, किंतु दूरसंचार व्यवस्था से आज भी दूर है।
ऐसा नहीं है यहां के लोगों ने संघर्ष नहीं किया है। 1988 से यहां सड़क की मांग होती रही तत्कालीन उत्तर प्रदेश के पर्वतीय विकास मंत्री नरेंद्र सिंह भंडारी ने इस सड़क के बारे में लोगों से बड़े.बड़े वादे किए, किंतु सड़क नहीं बन पाई। गोपेश्वर से घिंघराण-वेमरु उरगम विष्णु प्रयाग के नाम से एक सड़क के बारे में चर्चा हुई और इसकी कई बार सर्वे हुई, किंतु यह सड़क मात्र कागजों पर ही रही। प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत यह सड़क कुछ हद तक बन पाई स्यूँण गांव तक इस सड़क के बारे में तत्कालीन जिलाधिकारी चमोली मदन सिंह ने 18 ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाली महत्वकांक्षी सड़क स्वीकृति के लिए शासन से मांग की थी।
तत्कालीन बद्रीनाथ के विधायक केदार सिंह फोनिया सड़क तो चाहते थे, किंतु उनके कई राजनीतिक मतभेद रहे, पहले तो क्षेत्र प्रमुख के चुनाव में प्रेम सिंह सनवाल और बाद में उनके साथ बद्रीनाथ विधानसभा के चुनाव में चुनाव लड़ने वाले इंदर सिंह सनवाल के रहते हुए इस सड़क को नहीं बनवाना चाहते थे। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण जब केदार सिंह फोनिया और कांग्रेस के विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी के बीच 2007 में चुनाव हुवा और इसमें कांग्रेस के प्रत्याशी अनुसूया प्रसाद मैखुरी विजयी रहे। उन्होंने इस सड़क को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया और 29 किलोमीटर कलगोठ गांव तक सड़क की स्वीकृति मिली।
वन अधिनियम के कारण कई वर्षों तक सड़क रूकी रही। उसके बाद सड़क पर काम शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने स्यूँण गांव तक सड़क तो 2019 बीच में पहुंचा दी, उसके बाद सड़क का काम धीमा पढ़ गया। 2014 के चुनाव में बद्रीनाथ विधानसभा में केदार सिंह फोनिया और राजेंद्र सिंह भंडारी के बीच चुनाव संपन्न हुआ और राजेंद्र सिंह भंडारी बद्रीनाथ की विधायक बने। उन्होंने सड़क को आगे पहुंचाने में हर संभव मदद की। किंतु जैसे ही 2017 के चुनाव में बद्रीनाथ विधानसभा में महेंद्र प्रसाद भट्ट विजय हुए उसके बाद स्यूँणगांव से आगे सड़क ना के बराबर कटी। उल्टा लोगों के जल जंगल जमीन घास के पातल को विनाश कर दिये। आज भी डुमक के गांव के लोग पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। जब कभी गांव में कोई दुर्घटना एवं हादसा हो जाता है या बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दंडी कंडी का सहारा लिया जाता है। लगातार शासन प्रशासन से बात करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। डुमक गांव के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह सनवाल भूतपूर्व सैनिक प्रताप सिंह कहते हैं कि जब वोट की नौबत आती है तो राजनीतिक दल के लोग गांव में तरह.तरह की बातें करते हैं। आश्वासन देते हैं। जब काम की बातें होती है तो लोगों से कन्नी काट देते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सरकार अन्य योजना नहीं दे मात्र सड़क दे दे।
लक्ष्मण सिंह नेगी की रिपोर्ट स्वतंत्र लेखक सामाजिक कार्यकर्ता












