दून पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर के बाल विभाग द्वारा बच्चों के लिए सिलाई एवं पुरानी वस्त्रों के पुनः उपयोग पर आधारित एक प्रेरणादायक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को यह समझाना था कि पुराने कपड़ों और कपड़े के टुकड़ों को फेंकने के बजाय उन्हें उपयोगी और रचनात्मक वस्तुओं में बदला जा सकता है, जैसे थैले, बुक कवर, सजावटी सामग्री और उपहार।
कार्यशाला का संचालन दून सिटिज़न्स फोरम (DCF) की सुश्री मौसुमी भट्टाचार्य ने किया। उन्होंने बच्चों को सिलाई की मूलभूत तकनीकें जैसे रनिंग स्टिच, हेम स्टिच और बटन सिलना सिखाया तथा रोज़मर्रा के जीवन में इन कौशलों के महत्व पर प्रकाश डाला। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में भाग लिया और स्वयं हाथ से सिलाई कर अनुभव प्राप्त किया।
कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों और एनजीओ से कुल 13 बच्चों ने भाग लिया, जिनमें राफेल राइडर चेशायर स्कूल के बच्चे भी शामिल थे। इस समूह में 6 लड़के और 7 लड़कियाँ शामिल थीं। लड़कों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही, क्योंकि सिलाई जैसे कौशल को अक्सर लैंगिक दृष्टि से देखा जाता है। इस पहल के माध्यम से इस धारणा को बदलने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान दून पुस्तकालय के बाल विभाग से सुश्री मेघा ऐन विल्सन, आईआईआरएस से श्री संदीप गुप्ता एवं श्री प्रसुम गुप्ता सहित अन्य समुदाय सदस्य उपस्थित रहे।











