डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
आज कल मेडिकल में प्रवेश से जुड़े प्रमाण-पत्रों और दस्तावेजों की जांच को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति ने गलत या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल शिक्षा में प्रवेश प्राप्त किया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होना आवश्यक है। लेकिन मेरा मानना है कि जांच केवल MBBS तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
वर्तमान में उत्तराखंड में होने वाली सभी महत्वपूर्ण सरकारी भर्तियों और प्रवेश प्रक्रियाओं में प्रमाण-पत्रों का व्यापक स्तर पर सत्यापन कराया जाए। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली Group-B और अन्य भर्तियां हों, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से होने वाली Group-C और अन्य नियुक्तियां हों, या मेडिकल एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश-जहां भी आरक्षण अथवा विशेष श्रेणी के आधार पर लाभ दिया जा रहा है, वहां संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विशेष रूप से जाति प्रमाण-पत्र, स्थायी निवास/डोमिसाइल, EWS प्रमाण-पत्र, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, अनाथ श्रेणी से जुड़े प्रमाण-पत्र, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र तथा अन्य आरक्षण एवं विशेष श्रेणी से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक है। जिस प्रमाण-पत्र के आधार पर किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी, शिक्षा में प्रवेश या किसी सरकारी सुविधा का लाभ मिला है, उसकी वैधता पर किसी भी प्रकार का संदेह होने पर नियमानुसार जांच होनी चाहिए।
यह किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने का विषय नहीं है। सवाल यह है कि जो युवा अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, क्या उनके अधिकारों की पूरी तरह रक्षा हो रही है? यदि किसी अपात्र व्यक्ति ने गलत दस्तावेजों के आधार पर कोई लाभ प्राप्त किया है, तो उसके कारण किसी योग्य युवा का अवसर प्रभावित नहीं होना चाहिए।
जहां किसी प्रमाण-पत्र के गलत जारी होने, दस्तावेजों की हेराफेरी या सत्यापन में लापरवाही की बात सामने आती है, वहां केवल लाभ लेने वाले व्यक्ति तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका, लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है, तो उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उत्तराखंड में आखिर चल क्या रहा है, यह सवाल आज हर उस युवा का है जो वर्षों से मेहनत कर रहा है और निष्पक्ष अवसर की उम्मीद रखता है। इसलिए आवश्यकता है कि सरकार वर्तमान में हो रही भर्तियों और हाल के वर्षों में हुई महत्वपूर्ण नियुक्तियों एवं प्रवेशों की प्रमाण-पत्र जांच के लिए एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनानही
उत्तराखंड के युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और उनके अधिकारों की सुरक्षा चाहिए। एवं पारदर्शिता होलेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














