• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

रहस्य आखिर कब तक मारे जाएंगे मासूम’हाथी?

06/10/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
17
SHARES
21
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

‘डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

उत्तराखंड में हाथियों की मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है. वन
विभाग के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों में कुल 573
हाथी विभिन्न कारणों से मारे गए हैं. साल 2025 में अब
तक 22 हाथियों की मौत दर्ज की गई है, यानी हर महीने
लगभग दो हाथी अपनी जान गंवा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना
है कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं,वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था
की कमजोरी को उजागर करता है. किसानों द्वारा खेतों की
सुरक्षा के लिए लगाए गए करंटयुक्त तार हाथियों के लिए
मौत का जाल साबित हो रहे हैं. 25 वर्षों में 52 हाथी करंट
की चपेट में आकर मारे गए, जिनमें से तीन मौतें केवल 2025
में हुई हैं. किसान जंगली जानवरों से फसलों की रक्षा के लिए
खेतों के चारों ओर बिजली के तार लगा देते हैं. मुख्य
वन्यजीव प्रतिपालक  के अनुसार “इन तारों में अक्सर तेज
वोल्टेज का करंट छोड़ा जाता है, जो हाथियों को तुरंत मौत
के घाट उतार देता है.”वन्यजीवों के आवागमन वाले इलाकों

में सड़कों और रेल मार्गों का विस्तार हाथियों के लिए नया
खतरा बन गया है. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 69
हाथी सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए. 29 हाथी ट्रेन की चपेट में
आकर जान गंवा चुके हैं. ये हादसे विशेष रूप से रामनगर,
हरिद्वार और तराई क्षेत्र में सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं.
राजाजी और कार्बेट पार्क से गुजरने वाले मार्गों पर रात के
समय वाहनों की रफ्तार और अंधेरा इन घटनाओं को और
बढ़ाता है.सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पिछले 25 वर्षों
में 80 हाथियों की मौत का कारण अज्ञात है. साल 2025 में
ही ऐसे 9 मामले सामने आए हैं, जिनमें मौत की वजह अब
तक स्पष्ट नहीं हो सकी. यह स्थिति वन विभाग की जांच और
निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. वर्ष 2020 की
गणना के अनुसार, उत्तराखंड में 2000 से अधिक हाथी हैं.
कार्बेट टाइगर रिजर्व में करीब 1200 हाथी. राजाजी नेशनल
पार्क में लगभग 300 हाथी मौजूद हैं. संख्या में यह वृद्धि
संरक्षण के लिहाज से सकारात्मक मानी जा सकती है, लेकिन
लगातार हो रही मौतों ने इस प्रगति पर गंभीर
प्रश्नचिह्न लगा दिया है. राज्य के कई इलाकों में अब हाथियों

और इंसानों का टकराव आम हो गया है. हरिद्वार, रामनगर
और तराई बेल्ट में हाथी अक्सर फसलों को नुकसान पहुंचाने
के लिए बस्तियों तक आ जाते हैं. ऐसे में किसान अपनी
फसलों की सुरक्षा के लिए करंट वाले तार या अन्य उपाय
अपनाते हैं, जो हाथियों के लिए घातक साबित होते हैं.
पिछले 25 वर्षों में हाथियों के हमले में 230 लोगों की मौत
भी दर्ज की गई है, जो इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है.
राज्य में 25 वर्ष में 167 हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों
से हुई है। हाल के दिनों में ही हरिद्वार वन प्रभाग में तीन
हाथियों की मौत हुई है। इसमें में भी एक हाथी की मौत करंट
लगने से हुई है। जबकि दूसरे हाथी की मौत का कारण स्पष्ट
नहीं है और तीसरे की मौत बीमारी के कारण हुई है। हाथियों
का आबादी वाले इलाकों में पहुंचना कोई नई बात नहीं है,
लेकिन हाल के दिनों में यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है.
कभी सर्दियों के मौसम तक सीमित रहने वाले ये जंगली हाथी
अब साल भर गांवों और कस्बों के बीच देखे जा रहे हैं.
हाथियों के आबादी के बीच मौजूदगी के बढ़ते मामलों ने
लोगों की चिंता बढ़ा दी है. वहीं वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर

भी यह एक गंभीर मुद्दा बन गया है. हाथियों के लिए ये रास्ते
कितने खतरनाक हैं, इसका अंदाजा हरिद्वार में 4 दिनों में 2
हाथियों की मौत से लगाया जा सकता है.  हाथी जैसे
संकटग्रस्त प्रजाति के अस्तित्व को बचाने की पुकार है. जिम
कॉर्बेट नेशनल पार्क ने संरक्षण का जो मॉडल पेश किया है,
वह देश और दुनिया के लिए प्रेरणादायक है. लेकिन अगर
मानव-वन्यजीव संघर्ष, वासस्थल क्षरण और पर्यटन का
अनियंत्रित दबाव जारी रहा, तो यह सफलता खतरे में पड़
सकती है. *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून*
*विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share7SendTweet4
Previous Post

सीएम धामी ने किया उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2025 का समापन, विजेता टीम को दी बधाई

Next Post

उत्तराखंड की वो महिला जिसने रूढ़ियों की जंजीरें तोड़ी

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: सड़कों पर दौड़ रहे अवैध खनन से भरे वाहन, निगरानी पर उठे सवाल

October 5, 2026
11
उत्तराखंड

डोईवाला: सेवा ज्योति यात्रा की सफलता को भाजपा ने कसी कमर

October 5, 2026
19
उत्तराखंड

ज्योत्स्ना जोशी की दो पुस्तकों ‘दादी का रेडियो’ (संस्मरण) और ‘ठहरे किनारे’ (काव्य संग्रह) का लोकार्पण

October 5, 2026
11
उत्तराखंड

डॉ. मनोज कुमार पंत ने निदेशक, अर्थ एवं संख्या के रूप में संभाला कार्यभार

October 5, 2026
11
उत्तराखंड

बासमती पर ‘सुसवा’ ने लगाया ग्रहण विदेशों में भी हैं इसके खुशबू के दीवाने

October 5, 2026
5
उत्तराखंड

उत्तराखंड के कैंची धाम ने तोड़ दिए सारे रिकार्ड, हर धर्म का रिकार्ड टूटा

October 5, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67751 shares
    Share 27100 Tweet 16938
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37458 shares
    Share 14983 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: सड़कों पर दौड़ रहे अवैध खनन से भरे वाहन, निगरानी पर उठे सवाल

October 5, 2026

डोईवाला: सेवा ज्योति यात्रा की सफलता को भाजपा ने कसी कमर

October 5, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.