डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
प्रदेश सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड में पर्यटन- तीर्थाटन लगातार बढ़ रहा है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में बीते तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड का पर्यटन अब बहुआयामी हो चला है, पर्यटक बड़े शहरों और चुनिंदा हिल स्टेशन तक ही सीमित नहीं बल्कि दूर दराज के छोटे छोटे पर्यटक स्थलों तक भी पहुंच रहे हैं। इसी के साथ राफ्टिंग, ट्रैकिंग, बंजी जम्पिंग, पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में भी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों की भी भागीदारी बढ़ी है। इससे पर्यटन का लाभ प्रदेश के लाखों लोगों तक प्रत्यक्ष तौर पर पहुंच रहा है, इसमें होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे संचालक, परिवहन कारोबारी, महिला स्वयं सहायता समूह शामिल है। प्रदेश में इस समय छह हजार अधिक होम स्टे संचालक सीधे तौर पर बढी हुई पर्यटन गतिविधियों के सीधे लाभार्थी बनकर उभरे हैं। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 493 तक पहुंच चुका है, जो बेहद गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे हालात में दिल्लीवासी राहत की सांस लेने के लिए उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर नैनीताल, भीमताल, रामनगर और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पर्यटन पर साफ दिखाई देने लगा है।दिल्ली और आसपास के इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंचने के बाद लोग सिर्फ वीकेंड ट्रिप ही नहीं, बल्कि एक से तीन महीने तक के लंबे प्रवास की बुकिंग करवा रहे हैं। नैनीताल जिले और कॉर्बेट क्षेत्र में होमस्टे और लॉन्ग-स्टे प्रॉपर्टीज की मांग तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर वे परिवार पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनके बुजुर्ग माता-पिता सांस, दमा और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित हैं। नैनीताल और कॉर्बेट पहुंचे पर्यटकों का कहना है कि दिल्ली में मौजूदा हालात में सांस लेना भी दूभर हो गया है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन, खांसी और सांस संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए प्रदूषण से दूर, साफ और शांत माहौल में रहना उनकी मजबूरी बन गई है। होटल कारोबारी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर उत्तराखंड के पर्यटन पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सिर्फ शॉर्ट ट्रिप नहीं, बल्कि दो से तीन महीने के लॉन्ग-स्टे के लिए लगातार इंक्वायरी आ रही हैं। लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेहत को ध्यान में रखते हुए पहाड़ों में ठहरने की योजना बना रहे हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े का मानना है कि यह रुझान नैनीताल और कॉर्बेट क्षेत्र के पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने बताया कि छोटी-छोटी प्रॉपर्टीज और होमस्टे लॉन्ग-स्टे के लिए ज्यादा उपयुक्त साबित हो रहे हैं। क्यारी, पाटकोट, पंगोट, ढेला और जंगलों से सटे इलाके लॉन्ग-स्टे के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।हालांकि उन्होंने चिंता भी जताई कि अगर भीड़ इसी तरह बढ़ती रही तो रामनगर और नैनीताल जैसे शहरों में जाम और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ सकती है। वीकेंड पर रामनगर में लगने वाला भारी जाम इसकी चेतावनी है। उनका सुझाव है कि बड़े होटल्स के बजाय नेचर-फ्रेंडली और छोटे स्टे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि नैनीताल जिले और रामनगर क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स स्तर 100 से भी काफी कम रहता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से कहीं बेहतर है। साफ हवा, अच्छी धूप और शांत माहौल लोगों को यहां खींच ला रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक ने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्वच्छ हवा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। जब भी आसपास के महानगरों में वायु गुणवत्ता गिरती है, लोग सुकून और बेहतर वातावरण की तलाश में उत्तराखंड की ओर आते हैं। कॉर्बेट के घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और साफ वातावरण पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रदूषण के बढ़ते दौर में नैनीताल और कॉर्बेट जैसे क्षेत्र पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह चिंता भी जताई कि कहीं ऐसा न हो कि महानगरों से आने वाली भीड़ के कारण रामनगर और नैनीताल जैसे शहरों में भी प्रदूषण और जाम की समस्या बढ़ जाए. वीकेंड पर रामनगर में लगने वाला भारी जाम इस ओर इशारा करता है कि संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े होटल्स के बजाय छोटे और नेचर-फ्रेंडली स्टे को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि पर्यावरण पर दबाव कम पड़ेय जब भी आसपास के महानगरों में वायु गुणवत्ता गिरती है तो लोग सुकून और बेहतर वातावरण की तलाश में उत्तराखंड की ओर रुख करते हैं. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण लोगों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं. यही वजह है कि प्रदूषण के बढ़ते दौर में नैनीताल और कॉर्बेट जैसे क्षेत्र पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बनते जा रहे हैं. *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*











