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देश के पहले गृहमंत्री थे सरदार वल्लभभाई पटेल

16/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
वल्लभभाई पटेल का पूरा नाम वल्लभभाई झावेरभाई पटेल है और उन्हें सरदार पटेल के नाम से भी जाना जाता है। भारत और अन्य सभी जगहों पर उनका नाम सरदार था। यह शब्द हिंदी, उर्दू और फ़ारसी भाषाओं में भी प्रचलित है, जिसका अर्थ ‘प्रमुख’ भी होता है। वे एक भारतीय बैरिस्टर थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के रूप में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1947 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, गृह मंत्री के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही क्योंकि इस संघर्ष के दौरान उन्होंने स्वतंत्र राष्ट्र को एकीकरण के माध्यम से एकता की ओर अग्रसर किया। वे वास्तव में भारत को आवंटित ब्रिटिश प्रांतों को नए स्वतंत्र भारत में एकीकृत करने और विलय करने के प्रमुख सूत्रधार थे, और उन्होंने एक संयुक्त मोर्चा बनाने के कार्य का नेतृत्व किया। झावेरभाई पटेल और लाडबा के घर जन्मे और छह बच्चों में से एक होने के नाते, उन्होंने बहुत ही सुरक्षित जीवन जिया। उनका परिवार ज़मींदार था और अपनी जरूरतें खुद पूरी करने में सक्षम था। सरदार वल्लभभाई का जन्मस्थान नाडियाड था, जो मध्य गुजरात लेउवा पटेल पाटीदार समुदाय का एक हिस्सा था।उन्होंने हमेशा सब कुछ सहा और अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की किसी भी हरकत पर कभी कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने स्कूल जाने और शिक्षा प्राप्त करने के लिए नाडियाड, पेटलाड और बोरसाद की यात्रा की और इस बीच खुद भी शिक्षा प्राप्त की। 1891 में, मात्र 16 साल की उम्र में उनकी शादी झावेरबेन पटेल से हुई। उनके समुदाय के लोग अक्सर उनका मज़ाक उड़ाते थे क्योंकि उन्हें मैट्रिक की परीक्षा पास करने में सामान्य से ज़्यादा समय लगता था। लोग उनकी बुद्धि पर सवाल उठाते थे और उनका मजाक उड़ाते हुए कहते थे कि वह ज्यादा आगे नहीं जा सकते या जीवन में कुछ बड़ा नहीं कर सकते।वह एक मेहनती व्यक्ति थे, और अपनी परीक्षाओं के बाद, उन्होंने कानून की डिग्री प्राप्त करने के उद्देश्य से पैसे जमा किए। ब्रिटिश कानून की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, वे बैरिस्टर बन गए। 1903 और 1905 में उनकी पत्नी झावेरबेन ने क्रमशः एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया, जिसके बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया। अब वे और उनका परिवार गोधरा में रह रहे थे, जहाँ उन्हें बार (जिसका अर्थ है एक बार परीक्षा जिसे पास करना होता है ताकि वकालत शुरू की जा सके और अदालत में दूसरों की ओर से बहस की जा सके) के लिए बुलाया गया। उन्होंने अपनी बार परीक्षा पास की और कई वर्षों तक पेशेवर रूप से वकालत की और एक कुशल और अच्छी प्रतिष्ठा वाले वकील बन गए।गुजरात के नडियाद में 31 अक्तूबर 1875 को सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था। सरदार पटेल में बचपन से ही नेतृत्व और अनुशासन के गुण थे। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से कानून की पढ़ाई की और बाद में एक सफल वकील बने। वहीं गांधीजी के राष्ट्रवादी आह्वन ने सरदार पटेल के जीवन की दिशा बदली। अहमदाबाद के किसान आंदोलन से सरदार पटेल की यात्रा शुरू की और फिर इस यात्रा ने उनको जल्द ही जननेता बना दिया। सरदार पटेल ने किसानों, मजदूरों और आम जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने देश को दिखाया कि राजनीति का असली मतलब सेवा है, न कि सत्ता। देश की आजादी के बाद भारत के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती थी, वह 562 रियासतों को एक देश में जोड़ना था। जहां एक ओर कई रियासतें अलग देश बनने की जिद पर अड़ी थीं। लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल की रणनीतिक कुशलता और दृढ़ इच्छाशक्ति से ‘एक भारत’ का सपना साकार किया। जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसी रियासतों को भारतीय संघ में मिलाना किसी युद्ध से कम नहीं था। लेकिन सरदार पटेल ने इस काम को बिना किसी बड़े संघर्ष के संभव कर दिखाया। इस लोहे जैसी इच्छाशक्ति और स्पष्ट निर्णय क्षमता ने सरदार पटेल को ‘आयरन मैन ऑफ इंडिया’ की उपाधि दिलाई। हालांकि सरदार पटेल का जीवन सरल था, लेकिन उनको विचार कठोर थे। सरदार पटेल न तो बड़े भाषणों में विश्वास रखते थे, न ही दिखावे में। उनका मानना था कि राष्ट्र निर्माण शब्दों से नहीं बल्कि कर्म से होता है। सरदार पटेल का प्रशासनिक कौशल इतना प्रभावी था कि महात्मा गांधी ने उनको ‘भारत का बिस्मार्क’ कहा था। देश को आजादी मिलने के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने कड़े संघर्ष के बाद 562 रियासतों को देश को अखंड भारत बनाया था। दरअसल, राष्ट्रीय एकता के प्रतीक सरदार पटेल की सोमवार को पुण्यतिथि है। इस मौके पर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,”लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 75वीं पुण्यतिथि पर मेरा सादर नमन। उन्होंने देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। अखंड और सशक्त भारतवर्ष के निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रीय एकता के प्रतीक, मजबूत भारत के शिल्पकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करता हूं। सरदार साहब ने खंड-खंड में बंटे आजाद भारत को तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद एकीकृत कर मजबूत राष्ट्र का सुदृढ़ रूप दिया।”उन्होंने आगे लिखा कि देश के पहले गृह मंत्री के रूप में मां भारती की सुरक्षा, आंतरिक स्थिरता एवं शांति की स्थापना को ही उन्होंने अपना जीवन लक्ष्य बनाया। सहकारी आंदोलन को पुनर्जीवित कर महिलाओं, किसानों के स्वावलंबन से आत्मनिर्भर भारत की नींव रखने वाले सरदार साहब राष्ट्रप्रथम के पथ पर ध्रुवतारे के समान हम सभी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।लोकसभा अध्यक्ष ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत की राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार, एकीकृत भारत के शिल्पकार, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि पर सादर नमन। स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के रूप में उन्होंने अदम्य इच्छाशक्ति, असाधारण नेतृत्व और अटल संकल्प के बल पर राष्ट्र की अखंडता को सुनिश्चित किया।”उन्होंने आगे लिखा कि उनके दूरदर्शी मार्गदर्शन में 550 से अधिक रियासतों का भारत संघ में ऐतिहासिक विलय संभव हुआ, जिसने एक सशक्त एवं संगठित भारत की नींव रखी। सरदार पटेल जी का जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का अमर आदर्श है, जो देश को एकता व दृढ़ता के मार्ग पर सदैव प्रेरित करता रहेगा।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत की एकता और अखंडता के ‘शिल्पी’, लौह पुरुष ‘भारत रत्न’ सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! देश की आंतरिक सुरक्षा, स्वदेशी एवं किसानों के स्वावलंबन के साथ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत, सुरक्षित भारत’ के निर्माण हेतु उनके अहर्निश योगदान हम सभी के लिए प्रेरणाप्रद हैं।’ सिविल सेवाओं का जन्म ब्रिटिश शासन के शुरुआती वर्षों में हुआ था। स्वतंत्र भारत में इसके जारी रहने को लेकर कई लोग संशय में थे। वल्लभभाई पटेल स्वतंत्रता से पहले ही अंतरिम सरकार के गृह मंत्री के रूप में सिविल और पुलिस सेवाओं के भविष्य के मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहे थे।इसी उद्देश्य से उन्होंने अक्टूबर, 1946में प्रांतीय प्रधानमंत्रियों का एक सम्मेलन बुलाया था। उनका दृढ़ मत था कि भारतीयों को एकजुट रखने के लिए एक अखिल भारतीय योग्यता आधारित प्रशासनिक सेवा आवश्यक है। आइसीएस के स्थान पर भारतीय प्रशासनिक सेवा व भारतीय पुलिस सेवा के गठन में उनके प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका थी वर्ष 1948 और 1949 में उन्हें नागपुर विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा कानून की मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया, तत्पश्चात उस्मानिया विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। पटेल ने 75 वर्ष की आयु में 15 दिसंबर, 1950 को बंबई (अब मुंबई) के बिड़ला हाउस में अंतिम सांस ली। यह आकस्मिक निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ था। पहला दिल का दौरा 2 नवंबर, 1950 को पड़ा था, जब वे 1950 की गर्मियों से ही पेट के कैंसर से जूझ रहे थे। बाद में यह खांसी के खून में बदल गया और उन दिनों, अस्पताल में भर्ती होने के दौरान वे ज़्यादातर बिस्तर पर ही रहते थे। वे बेहोश भी होने लगे थे। और अंततः, 15 दिसंबर को उन्हें दूसरा दिल का दौरा पड़ने से उनकी हालत और बिगड़ गई। उनकी मृत्यु के बाद, उनकी बेटी के आदेश पर, बिना किसी विशेष उपचार की मांग किए, एक आम आदमी की तरह उनके बड़े भाई और पत्नी के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।  उनकी मृत्यु के बाद भी उन्हें सम्मान और पुरस्कार मिलना बंद नहीं हुआ, 1991 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।वे एक महान व्यक्ति थे और “भारत के सिविल सेवकों के संरक्षक संत” और “भारत के लौह पुरुष” की उपाधि के पात्र थे।किसी भी देश का आधार उसकी एकता और अखंडता में निहित होता है और सरदार पटेल देश की एकता के सूत्रधार थे । राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को सदैव याद किया जायेगा। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

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