हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
तों क्या विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सामरिक दृष्टि, सहासिक पर्यटन एवं तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानें जाने वाले प्रस्तावित ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन मोटर सड़क को लोक निर्माण विभाग से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ)को सौंपे जाने की मांग को लेकर पिंडर घाटी में जन आंदोलन शुरू हो सकता हैं।पिंडर के अलावा नंदानगर घाट विकासखंड के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानें जा रहें ग्वालदम-तपोवन सड़क को हस्तांतरित किए जाने की मांग को लेकर सौंपे गए ज्ञापन एवं सोशल मीडिया में चल रही बयानबाजी को देख कर तों आंदोलन की सुगबुगाहट का आशंका को बल दे रहा हैं।
दरसअल भारत-तिब्बत सीमा में धारचूला(कुमाऊं) एवं जोशीमठ(गढ़वाल) जहां पर भारत से तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं और दोनों ही बॉर्डरों में लगातार सेना का आवागमन बना रहता हैं। सड़क मार्ग को बॉर्डर तक सरल,सुगम एवं नजदीक बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा ग्वालदम-नंदकेशरी-वांण-तपोवन सड़क की वृहद सर्वेक्षण कर इस सड़क का परीक्षण करवाया। परीक्षण में पता चला कि वर्तमान रूट से ग्वालदम-तपोवन सड़क करीब 60 किलोमीटर कम हैं और इस सड़क के बनने के बाद सैन्य वाहनों एवं साजो-सामान को कम समय में एक सीमा से दूसरे में पहुंचाया जा सकता हैं।इसे देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने बकायदा सड़क निर्माण का निर्णय लेते हुए अक्टूबर 2024 में करीब 936 करोड़ रूपयों की स्वीकृति प्रदान कर दी और बीआरओ को इसके निर्माण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड को ग्वालदम से वांण तक करीब 60 किलोमीटर सड़क बीआरओ को सौंपनी थी। वांण से तपोवन तक करीब 29 किमी मोटर सड़क का नवनिर्माण बीआरओ को करना था। किंतु 2025 में राज्य सरकार ने रक्षा मंत्रालय से यह दलील देते हुए कि 2026 में विश्व प्रसिद्ध श्री नंदादेवी राजजात यात्रा प्रस्तावित हैं और यात्रा तक ग्वालदम से वांण तक की सड़क को लोनिवि थराली डीविजन के पास ही रखा जाएं,जिस पर रक्षा मंत्रालय ने सहमति दे दी। परंतु राज्य सरकार के इस निर्णय का पिंडर क्षेत्र की जनता ने जमकर विरोध करते हुए तत्काल सड़क को बीआरओ को सौंपने की मांग शुरू कर दी। विरोध को देखते हुए 7 दिसंबर 2025 को देवाल के सवाड़ गांव में आयोजित अमर शहीद सैनिक मेले के मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2026 में राजजात यात्रा के समापन होने के बाद ग्वालदम-वांण मोटर सड़क को लोनिवि से बीआरओ को हस्तांतरित करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी, परंतु इस वर्ष राजजात तों नही हो पाईं किंतु उसके स्थान पर सितंबर माह में श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा सम्पन्न हो चुकी हैं, यात्रा के सम्पन्न होने के बाद भी राज्य सरकार के स्तर पर सड़क को हस्तांतरित किए जाने की कोई भी गतिविधि नही दिखने के कारण क्षेत्र के लोगों की त्योरियां एक बार फिर से चढ़ने लगी हैं। गुरुवार को ग्वालदम-तपोवन सड़क को लोनिवि से बीआरओ को हस्तांतरित किए जाने की मांग को लेकर एक शिष्टमंडल ने थराली के उपजिलाधिकारी यदुवीर सिंह रावत से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उन्हें सौंपा। ज्ञापन में सामरिक दृष्टि एवं क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्वालदम-तपोवन मोटर सड़क को तत्काल बीआरओ को हस्तांतरित नही किए जाने पर आने वाले नवंबर माह से आंदोलन शुरू किये जाने की चेतावनी दी गई हैं। सौंपे गए ज्ञापन में ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन सड़क संघर्ष समिति देवाल के संयोजक महावीर बिष्ट,देवाल के जेष्ठ प्रमुख दीपक गड़िया,किशोर घुनियाल, गौरव खत्री,लखपत परिहार, मनोजपाल,दर्शन, यशवंत सिंह, गंगा सिंह आदि के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
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ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन मोटर सड़क को बीआरओ को सौंपे जाने की मांग एवं मांग पूरी नही होने पर आगामी विधानसभा चुनाव 2027 का देवाल विकासखंड में चुनाव बहिष्कार करने का संदेश तेजी के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हैं,इस मैसेज को लोग भी खूब समर्थन दें कर चुनाव बहिष्कार की योजना बनाने की बातें लिख रहे हैं।
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सड़क संघर्ष समिति के संयोजक महावीर बिष्ट ने बताया कि सड़क को बीआरओ को हस्तांतरित किए जाने की मांग को लेकर संघर्ष की रणनीति तय करने के लिए आगामी 26 अक्टूबर को विकासखंड मुख्यालय देवाल में समिति के संयोजक मंडल की एक बैठक आयोजित की गई हैं।इस बैठक में आगामी रणनीति तय की जाएगी।














