प्रकाश कपरुवांण
जोशीमठ। उत्तराखंड राज्य की बीस वर्षों की हुकूमतें ना पलायन रोकने में कामयाब रही और ना ही रोजगार सृजन में। नौनिहाल नशे की गिरफ्त की ओर बढ़ते जा रहे हैं, तो सरकारी नौकरी के अभाव में युवा उम्रदराज हो रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य निर्माण का उद्देश्य क्या थाघ्वह अब दूर दूर तक नहीं दिखता। पर्यावरण बचाने के लिए इसी उत्तराखंड की धरती पर विश्व विख्यात चिपको आंदोलन हुआ था तो शराबबंदी का आंदोलन जनांदोलन बना था, यह सब अब इतिहास की बात हो गई है।
चिपको आंदोलन की धरती को चीर कर बड़ी बड़ी विद्युत परियोजनाओं का निर्माण हो रहा है तो शराब गांव गांव तक पहुंचा दी गई।शराब के अलावा अन्य नशीले पदार्थ भी दूरस्थ गांवों व कस्बों तक पहुंच रहे हैं।
सीमान्त नगर जोशीमठ में ही कई युवा नशीले पदार्थों के सेवन की लत के कारण जीवन व मौत के बीच झूल रहे है। अभिभावक हैरान व परेशान हैंए कई अभिभावकों ने अपने पाल्यों को नशा मुक्ति केंद्रों में भी भेजाए लेकिन उसके बाद भी उनकी स्थिति नहीं सुधर रही हैएऔर नशे की लत ने युवाओं को पूरी तरह जकड़ लिया है।
लड़ कर उत्तराखंड राज्य लेने वाले उत्तराखंडी आखिर पलायन, रोजगार व नशे की फलते फूलते कारोबार को लेकर खामोश क्यों है? देवभूमि व बीर भूमि उत्तराखंड की यह खामोशी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।











