हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
पिछले एक सप्ताह से मौसम की बेरूखी के कारण पिंडर घाटी के ऊंचाई पर स्थित गांव के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना बढ़ गई हैं।वह निचले क्षेत्रों में प्रतिदिन होने वाली बारिश के कारण घास सहित तमाम दालों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ने लगी हैं।
पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से पिंडर घाटी के निचले क्षेत्रों में लगातार बारिश होने एवं ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी का सिलसिला जारी हैं। लगातार बारिश के कारण इस का दुष्प्रभाव ऊंचाई पर बसें तमाम गांव में उत्पादित होने वाले आलू,मडुवा, राजमा, भट्ट, सोयाबीन, चौलाई, फाबर सहित तमाम अन्य नकदी फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा हैं, जिससे काश्तकारों में भारी निराशा व्यापत होने लगी हैं। निचले क्षेत्रों में भी प्रति दिन बारिश होने के कारण यहां पर उत्पादित होने वाले भट्ट, सोयाबीन,
गहर,उड़द, सहित तमाम अन्य दालों की फसलों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही हैं। इसके अलावा शीतकाल एवं ग्रीष्म कालीन के लिए अपने पालतू मवेशियों को घास की व्यवस्था करने के तहत घास कटाई एवं उसे सुखा कर जमा करने की व्यवस्था पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा हैं। इस वर्ष इन दिनों प्रतिकूल मौसम के कारण क्षेत्र के किसानों में अपनी फसलों के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ने पर उनमें निराशा बढ़ती जा रही हैं।














