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हेली सेवा के नाम पर हर साल लोगों को शिकार बना रहे साइबर ठग

25/03/25
in उत्तराखंड, क्राइम, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में जल्द ही चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है. प्रशासन इसके लिए जोर शोर से तैयारी कर रहा है. हर साल की तरह इस साल भी यात्रा शुरू होने से पहले ही साइबर ठग चारधाम सीजन के लिए एक्टिव हो चुके हैं. दरअसल, साइबर ठग चारधाम यात्रा हेलीकॉप्टर बुकिंग में फ्रॉड करते हैंचारधाम यात्रा के लिए शुरू हुए आनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के चौथे दिन शाम पांच बजे तक 6,07,368 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया। केदारनाथ के लिए सर्वाधिक 1,95,709 और बदरीनाथ धाम के लिए 1,82,377 पंजीकृत हुए। गंगोत्री के लिए 1,12,933 और यमुनोत्री के लिए 1,09,824 लोगों ने पंजीकरण कराया। हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए 6,525 पंजीकरण हुए।उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से चारधाम यात्रा-2025 में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 20 मार्च से आनलाइन पंजीकरण शुरू किया गया है। पिछले तीन वर्षों से हेली सेवा के नाम पर साइबर ठगों की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई।साइबर ठगों ने इन साइट्स पर फर्जी वेबसाइट डालकर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया। अब एसटीएफ साइबर ठगों को मुंहतोड़ जवाब देने की रणनीति बनाई जा रही है। इस तरह से करते हैं हेली सेवा के नाम पर ठगी साइबर ठगों का सबसे आसान तरीका केदारनाथ हेली सेवा बुकिंग के नाम पर तैयार की गई फर्जी वेबसाइट हैं।श्रद्धालु जब भी केदारनाथ हेली सेवा के नाम से नेट पर सर्च करते हैं तो वहां पर कुछ फर्जी वेबसाइट आ जाती हैं, जिनके बारे में श्रद्धालुओं को कुछ ज्यादा पता नहीं होता है और श्रद्धालु वहां से टिकट तो बुक कर लेते हैं, लेकिन जब वे टिकट लेकर हेली सेवा कंपनी के पास पहुंचते हैं तो पता चलता है कि टिकट फर्जी है चारधाम यात्रा में हेली सेवा के नाम पर साइबर ठगी की घटनाओं को बिहार के विभिन्न जगहों से अंजाम दिया जा रहा है। हेली सेवा के नाम पर वर्ष 2022 से साइबर ठगी की घटनाएं बढ़ी। हर वर्ष 50 लोगों से हेली सेवा के नाम पर साइबर ठगी की जा रही है।इसमें ठगी की रकम 12 से 15 लाख रुपये तक है। एसटीएफ की कार्रवाई की बात करें तो पांच साइबर ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया जबकि 45 फेसबुक विज्ञापन बंद करते 80 वेबसाइट ब्लाक करवाई गई। इसके साथ ही ठगों के 50 बैंक खाते फ्रीज भी करवाए।साइबर थाना पुलिस की मानें तो हेली सेवा के नाम पर साइबर ठगी करने वाला गिरोह बिहार के से सरगर्म है। ठग अति दुगर्म क्षेत्रों में जंगल से ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। कई बार पुलिस ने यहां दबिश भी दी लेकिन बड़ी सफलता हाथ नहीं लग पाई।पुलिस उपाधीक्षक साइबर थाना ने बताया कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को साइबर ठगी से बचने के लिए इंटरनेट मीडिया के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के माध्यम से भी विभिन्न राज्यों से अपील की जा रही है कि यदि कोई हेली सेवा के लिए टिकट बुक करता है तो वह अधिकारिक वेबसाइट पर ही संपर्क करें।साइबर ठगी की 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं. इसमें साइबर थाने के साथ अन्य जिलों में 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं. बीते साल एसटीएफ की साइबर सेल ने 65 फर्जी वेबसाइटों पर कार्रवाई कर बंद किया था. इस साल साइबर सेल की एक स्पेशल टीम एक्टिव है, जो फर्जी वेबसाइट पर नजर रखेगी. चारधाम यात्रा में वैसे सरकार से लेकर शासन-प्रशासन और पुलिस के सामने कई चुनौतियां आती हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती आम श्रद्धालुओं को केदारनाथ हेली सर्विस के नाम पर होने वाली ठगी से बचाना है. जिसके लिए पुलिस ने एक प्लान भी तैयार किया है.दरअसल, चारधाम यात्रा में हर साल बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा मारामारी केदारनाथ हेली टिकट के लिए होती है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा ठग उठाते हैं. ठग ऑनलाइन और अन्य तरीकों से भोले-भाले श्रद्धालुओं को अपने जाल में फंसाते और उन्हें केदारनाथ हेली सेवा का टिकट ब्लैक में देने का लालच देकर मोटी रकम ठग लेते हैं. चारधाम में सबसे ज्यादा कठिन यात्रा केदारनाथ धाम की ही मानी जाती है. केदारनाथ धाम तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 20 किमी की कठिन चढ़ाई चढ़नी पड़ती हैं. इस यात्रा को श्रद्धालु पैदल, घोड़ा खच्चर, डंडी-कंडी और हवाई सेवा से करते हैं, जिसमें सबसे आसान और सुविधाजनक यात्रा के रूप में हवाई सेवा को देखा जाता है, लेकिन टिकटों की सीमित संख्या होने के कारण हेली सेवा का लाभ सबको नहीं मिल पाता है. इसी का ठग फायदा उठाते हैंसाइबर ठगों का सबसे आसान तरीका केदारनाथ हेली सेवा के नाम पर तैयार की गई फर्जी वेबसाइट है. श्रद्धालु जब भी केदारनाथ हेली सेवा के नाम से नेट पर सर्च करते है तो वहां पर कुछ फर्जी वेबसाइट आ जाती हैं, जिनके बारे में श्रद्धालु को कुछ ज्यादा पता नहीं होता है. श्रद्धालु वहां से टिकट तो बुक कर लेते हैं, लेकिन बाद में जब वो टिकट लेकर हेली सेवा कंपनी के पास पहुंचते हैं तो पता चलता है कि वो टिकट फर्जी है. ऐसे में सबसे पहले तो ऐसी फर्जी वेबसाइट से सावधान रहना होगा.इसके अलावा कुछ लोग सिस्टम को तोड़कर कम दाम में टिकट लेकर उन्हें कई गुना ज्यादा दामों पर भी बेच देते हैं, जिन पर भी पुलिस की टीम नजर रखे हुई है. ताकि सरकार द्वारा तय दामों पर ही श्रद्धालुओं को टिकट मिल सके और केदारनाथ हेली सेवा की टिकट ब्लैक न हो.पुलिस की साइबर एक्सपर्ट टीम ने बनाया चक्रव्यूह: इस बार चारधाम यात्रा के दौरान पुलिस की साइबर एक्सपर्ट टीम भी हवाई सेवा को लेकर अहम भूमिका में होगी. दरअसल, साइबर एक्सपर्ट टीम ने यात्रा शुरू होने से पहले ही ऐसी तमाम वेबसाइट्स को चिन्हित करते हुए उनकी जांच शुरू कर दी है जो चारधाम यात्रा में हवाई सेवा देने के नाम पर चलाई जा रही हैं. चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवा के नाम पर ठगी या ब्लैक टिकटिंग का मामला कितना गंभीर है, इसको इसी बात से समझा जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री भी मामले में पुलिस के अधिकारियों को दिशा निर्देश दे चुके हैं.मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए यह स्पष्ट किया है कि हवाई सेवा में ठगी से जुड़े मामलों पर विजिलेंस सीधे तौर से नजर रखें, ताकि ऐसी घटनाओं की संभावना न रहे और ऐसा करने वालों की धरपकड़ के साथ उनके मंसूबों को फेल किया जा सके. चारधाम यात्रा में हेली सेवा के नाम पर ठगी का ये खेल बीते कई सालों से चल रहा है. पुलिस भी इस पर लगाम लगाने के लिए कई प्रयास कर चुकी है, लेकिन हर बार वो नकाफी ही साबित हुए हैं. साइबर ठग किसी न किस तरह आम श्रद्धालुओं को चूना लगाने में कामयाब हो जाते हैं.। *लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

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