हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली/नंदानगर।
श्री नंदा देवी की लोकजात यात्रा 2026 हिमपर्वत श्रंखलाओं की तलहटी में बसे पंचगंगा में स्थित अपार श्रद्धा का केंद्र होमकुंड में बड़ीजात (श्री नंदा देवी -भगवती की विशेष बड़ी पूजा) के आयोजन, अनुष्ठानों एवं चौसिंगा खांडुओं को सजा-धजा कर कैलाश विदाई
के साथ ही शबड़ीजात यात्रा 2026 का समापन हों गया हैं। इसके साथ ही बड़ीजात यात्रा श्री नंदादेवी सिद्धपीठ कुरूड़ नंदानगर के लिए वापसी के तहत यात्रा के 17 वें एवं चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंच गई हैं। शांतिपूर्वक होमकुंड में पूजा सम्पन्न होने एवं यात्रा के चौथे एवं अंतिम निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंचने पर नंदा भक्तों ने माता नंदा का आभार व्यक्त किया।
रविवार की तड़के यात्रा के 16 वें एवं तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान करने के बाद नंदा भक्त देवी के जयकारों के साथ दशोली, बण्ड़,ज्वाल्पा की नंदा देवी की डोलियों,छतौलियों एवं पिछले 17 दिनों से यात्रा के साथ चल रहे चौसिंगा खांडुओं के साथ शीला समुद्र से त्रिशूली एवं नंदा घुघटी की तलहटी में बसे पंचगंगा होमकुंड में नवमी की जात के लिए पहुंची,बेहद खुशगवार एवं सुहावने मौसम के बीच जब यात्रा होमकुंड पहुंच तों यात्रियों की खुशी का कोई भी ठिकाना नही रहा। यहां पर नंदा देवी के पुजारियों, पंडितों मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़, प्रवीण गौड़ बण्ड़ डोली के अध्यक्ष अशोक गौड़ आदि पुजारियों ने नंदा,भगवती की विशेष पूजा, अनुष्ठान शुरू की इस दौरान श्री नंदादेवी बड़ीजात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत,कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला सहित बड़ीजात आयोजन कमेटी, कुरूड़ मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ ही हजारों की संख्या में बड़ीजात के यात्रियों ने यहां आयोजित नंदादेवी के अनुष्ठान में भाग लिया,इसी दौरान कई नंदा भक्तों पर नंदा -भगवती सहित अन्य देवी, देवता अवतारित हुए जिन्होंने नाचते हुए यात्रियों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खांडुओं को कैलाश भेजने के लिए सजाया गया उसके बाद उनके पीठों पर नंदादे को भेट पवाड़ो के रूप में खाजा,कलैऊ,प्रासादी, फल-फूल,आभूषण, श्रंगार सामग्री आदि लादा गया। पुजारियों के मंत्रोच्चार के बीच नंदा भगवती के जयकारों के बीच खांडुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। जब खांडुओं को कैलाश के लिए विदा किया जा रहा था तो कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई, एक तरह से उन्होंने खांडुओं एवं अपनी लाडली को अश्रुपूरित विदाई दी।होमकुंड में नंदा देवी की बड़ी जात पूजा सम्पन्न होने के बाद, बड़ी जात यात्रा नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ के लिए वापसी लौट पड़ी हैं। वापसी के तहत यात्री अपनी यात्रा के 17 वें एवं चौथे निर्जन पड़ाव की ओर देवी की डोलियों छंतोलियों के साथ माता के जयकारों लगाते हुए भोजपत्र, रिंगा,के साथ ही अन्य पेड़, पौधों के घने जंगलों को पार करते हुए चंदनियाघट होते हुए जामुन डाली पहुंच गई हैं। यही पर यात्रा रात्रि प्रवास करेंगी और रात्रि जागरण करेंगी।कई यात्रियों ने लाट खोपड़ी,तातणा आदि स्थानों पर रात्रि विश्राम के लिए रूकें हुए हैं।सोमवार को यात्रा जामुन डाली से पांचवें दिन एक बार पुनः आवादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करेंगी, 23 सितंबर को नंदा की दशोली,बण्ड़ की डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेगी जहां पर यज्ञ अनुष्ठान के साथ विधिवत रूप से श्री नंदादेवी बड़ीजात यात्रा 2026 का समापन हों जाएंगे।कई यात्री अब अलग-अलग स्थानों से अपने घरों को भी लौटने के प्रयास में लगे हुए हैं।
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बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली वापसी के तहत अपने तीसरे पड़ाव उलंग्रा गांव पहुंच गई हैं, रविवार को डोली दूसरे पड़ाव ल्वाणी से कांडे,बमणबेरा होते हुए देर सांय उलंग्रा पहुंची, पूरे यात्रा मार्ग पर देवी भक्तों ने उत्सव डोली का भव्य रूप से स्वागत करते हुए पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगी उलंग्रा में देवी जागरण किया जाएगा।











