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रात के अंधेरे में चल रहा हाटमिक्स प्लांट, सफेदपोशों की संलिप्तता का संदेह

01/12/21
in उत्तराखंड, चमोली
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

थराली से हरेंद्र बिष्ट।
तमाम नियम कानूनों को धत्ता बताकर पिछले लंबे समय से रात के अंधेरे में पिंडर घाटी के ग्वालदम-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर मींग गधेरे के समीप एक हॉटमिक्स प्लांट खुलेआम खनन गतिविधियों में लिप्त है। जिम्मेदार अधिकारी कान में उंगली डाल, आंखें मूंदें हुए हैं। जिससे अवैध तरीके से हॉटमिक्स संचालित कर रहे लोगों के हौंसले बुलंद बने हुए हैं।


दरअसल 5-6 सालों पहले ग्वालदम-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग जोकि सीमा सड़क संगठन के अधीन है, के चौड़ीकरण के बाद उस पर हॉटमिक्स के लिए सरकार ने इस सड़क के मध्य में मींग गदेरे के पास सड़क किनारे तमाम पाबंदियों के साथ हॉटमिक्स प्लांट स्थापित करने की स्वीकृति दी थी। किंतु पिछले एक वर्ष से अधिक समय से बीआरओ के द्वारा अपनी सड़क पर ना तों हॉटमिक्स का काम किया जा रहा है और ना ही किसी सड़क पर पेंटिंग का काम किया जा रहा है। बावजूद इसके मींग गदेरे के हॉटमिक्स प्लांट पर धड़ल्ले से मानकों, नियम, कानून को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में मिंिक्सग कर प्रति रात 10 से 20 ट्रक तैयार माल बहारी क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अंधेरा घिरते ही इस प्लांट पर मिक्सिंग का कार्य शुरू हो जाता है। उजाला होते ही प्लांट पर तमाम गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी जाती हैं। जब बीआरओ के द्वारा पेंटिंग व हॉटमिक्स का काम पूरी तरह बंद है तो ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि रात के अंधेरे का फायदा उठाकर इस हॉटमिक्स प्लांट से सामग्री आखिर भेजी कहाँ जा रही है?

प्लांट के समीप रात होते ही डंपरों की कतार तो कुछ इसी ओर इशारा कर रही है कि प्लांट रात को अवैध तरीके से चलाया जा रहा है। और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग गहरी नींद सो रहे हैं। बड़ी बात यह भी हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग के जिस स्थान पर प्लांट स्थापित किया गया हैं, उसके वहां पर सड़क के दोनों ओर रोड़ी, रेत के ढेर लगाएं गए हैं, जिसका सीधा प्रभाव सामान्य यातायात पर भी पड़ रहा हैं। आज तक भी पुलिस, प्रशासन एवं बीआरओ के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध रूप से रखें गए उपखनिज के भंडारण को हटाने एवं इसके संबंध में जानने तक का प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिससे पुलिस, प्रशासन एवं बीआरओ की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं।

इस संबंध में थराली के उपजिलाधिकारी सुधीर कुमार से पूछा गया उनके मुताबिक उन्हें हॉटमिक्स प्लांट के रात्रि में संचालित होने की कोई जानकारी नहीं है। मामले में जांच की जाएगी। बड़ी बात यह है कि इस हॉटमिक्स प्लांट की दूरी नारायणबगड़ तहसील मुख्यालय से करीब 3 किमी एवं थराली तहसील से करीब 10 किमी की है। और प्रति दिन यहां से अधिकारीयों के आना.जाना लगा रहता है। ऐसे में प्रशासन के आला अधिकारियों के बयानों से तो यही लगता है कि या तो अंधेरे की आड़ में हॉटमिक्स प्लांट का संचालन प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है। अथवा इस का संबंध किसी हाईप्रोफाइल लोगों की संलिप्तता के कारण प्लांट पर कार्रवाई करने से भी प्रशासन अधिकारी घबरा रहे हों। जो भी हैं, इसका नुकसान सरकार एवं आम जनता को ही भुगतना पड़ रहा है।

पिछले 5-6 वर्षों से हॉटमिक्स प्लांट का जिस स्थान पर संचालन किया जा रहा हैं। उसके आसपास के पेड़ पौधों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा हैं। यहां पर अभी तक छोटे.बड़े दर्जनों पेड़ पौधे सूख चुके हैं और पश्चिमी वन रेंज नारायणबगड़ इस ओर ध्यान देने तक को तैयार नही हैं।

प्लांट स्थापना में तमाम पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखा गया हैं।प्लांट के चारों ओर उड़ने वाले धूल को रोकने के लिए इसे कवर करने के लिए टिन तक खड़े नही की गई हैं।

यहां पर जलने वाली बिजली भी बनने लगी हैं रहस्य। दरअसल जिस स्थान पर प्लांट स्थापित हैं। वहां बिजली की कोई भी ओपन लाइन नही हैं। बावजूद इसके इस स्थान पर रात.दिन जले रहने वाली बिजली रहस्य बनी हुई हैं कि आखिर बिजली की लाइन यहां कहां से आई हुई हैं।

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