थराली से हरेंद्र बिष्ट। काश कि समय रहते सीमा सड़क संगठन के द्वारा गद्देरें को सड़क में बहने के बजाय वैकल्पिक तौर पर ही सही जैसे चैनल अब डालें गऐ हैं। उसी तरह से बरसात शुरू होने से पहले डाल दिए जाते तो एक होनहार एवं युवा बैंक कर्मी की शायद जान बच जाती।
पिछले दिनों 12 जुलाई को ग्वालदम-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर थराली से ग्वालदम की ओर लोल्टी गदेरें के उफान पर आने के कारण कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिला क्षेत्रा अंतर्गत बैजनाथ (गरूड़) निवासी एवं चमोली जिला सहकारी बैंक की थराली शाखा में कैशियर के पद पर कार्यरत 25 वर्षीय सुभम चंद्रा जो की समय पर बैंक पहुंचने के प्रयास में लगा हुआ था। इस दौरान गदेरें को बाइक से पार करते समय गदेरें के तेज बहाव में बाइक सहित बह जाने के कारण उसकी अकाल मौत हो गई थी।
इस दुर्घटना एवं इसमें होनहार युवक की मौत के बाद इस राजमार्ग के रखरखाव का जिम्मा था में बीआरओ के द्वारा विगत दिनों इस गदेरें में सुरक्षित छोटे-बड़े वाहनों के आवागमन के लिए सुरक्षात्मक उपाय शुरू कर दिए गए हैं। पिछले दो दशक से इस सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी थामें बीआरओ को इस गधेरे पर पानी के इस तेज बहाव का भी अंदेशा था इसी के चलते बीआरओ ने कुछ वर्ष पहले ही बरसात में पानी की निकासी के लिए सड़क के निचले हिस्से में गार्डर लगाकर पानी की निकासी अंडर ग्राउंड करने का काम किया था।
लेकिन इस साल बरसात से पहले इस गार्डर को खोलने की बजाय बीआरओ ने इसे बन्द ही रखा और इस जगह पर बने बड़े-बड़े गड्ढो को भरने का भी काम बीआरओ नही कर पाया। शायद अगर ये काम बीआरओ ने पहले किया होता तो हो सकता था कि एक जिंदगी बच गई होती। और एक परिवार का चिराग बुझने से बच जाता। बहरहाल अब बीआरओ ने घटना से सबक लेते हुए गधेरे के पानी को चैनेलाइज करते हुए पानी की निकासी पूर्व की तरह गार्डर से ही शुरू कर दी है। इसके साथ ही सड़क पर बने गड्ढो को भी पत्थरों से भर दिया है। जिससे बरसात के इस मौसम में राहगीरों को खतरनाक बनें लोल्टी गदेरें से खतरा काफी कम हो गया हैं।









