
कलगोठ गांव से डूमक गांव लगभग 5 किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित है। गांव बहुत ही सुंदर है किंतु यातायात सुविधा ना होने के कारण जिला मुख्यालय एवं ब्लॉक मुख्यालय से 24 किलोमीटर से भी अधिक पैदल दूरी तय कर यहां पहुंचा जाता है। कलगोट गांव में मूलभूत सुविधाएं प्राथमिक विद्यालय जूनियर हाई स्कूल एएनएम सेंटर हैं, किंतु यहां पर यात्रा सुविधा ना होने के कारण जब कभी कोई महिला पेड़ या चट्टान से गिर जाते हैं डंडी कंडी के सहारे उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता है।

कोलगोट से डुमक गांव उत्तराई और चड़ाई दोनों का रास्ता पार करके पहुंचना पड़ता है गांव में मूलभूत सुविधाएं प्राथमिक विद्यालय एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय जनता हाई स्कूल के अलावा विद्युत पेइंग गेस्ट हाउस गांव में उपलब्ध हैं यहां के ग्राम देवता वजीर अर्थात रुद्रनाथ के पार्षद माने जाते हैं यहां भवानी नंदा का भी सुंदर मंदिर है नल अष्टमी के पर्व पर यहां दर्जनों छतोलियाँ यहां पहुंचती है ब्रह्म कमल लेने के लिए नंदी कुंड की तरफ जाती है हर वर्ष यह मेला लगता है डुमक गांव से रूद्र नाथ याएत्रा के लिए पदयात्रा शुरू हो जाती है। सबसे पहले गांव से 3 किलोमीटर उत्तर आई का रास्ता पार कर मैंना नदी पार करनी पड़ती है। उसके बाद हल्की.हल्की चढ़ाई लगभग 7 किलोमीटर तय कर तोली ताल एक सुंदर जगह मिलती है, जो जंगलों के मध्य 3 किलोमीटर से भी अधिक परिधि में फैला हुआ मिनी बुग्याल है। यहां गाय भैंस गर्मी के दिनों में लोग चराने के लिए भेज देते हैं।

यहां एक छोटी सी चाय की दुकान में चाय की चुस्की लेने के बाद हम लोग पनार के लिए चल दिए। यहां से अधिकतर जंगल का रास्ता है। अनुमान से जाना पड़ता है, लगभग 8 किलोमीटर से भी अधिक चढ़ाई का रास्ता पार करके प्रकृति का अनमोल खजाना पनार बुग्याल पहुंचा जाता है। अधिक थकान होने के कारण 10 से 15 मिनट का समय का पता नहीं चलता, कब निकल गया। चारों ओर बुग्याल को देखकर मन मोह लेता है, 4 से 5 किलोमीटर की परिधि में चारों ओर फैला प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग समान बुग्याल है, यहां हम लोगों ने कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा के लिए चल पड़ी। यहां से 3 किलोमीटर आगे पित्र धार आता है। शाम के 5.00 बज रहे थे, सूर्यनारायण भी अपने अंतिम मुकाम पर थे, सुंदरता का बोध बादलों के बीच हो रहा था। यहां से रुद्रनाथ पुनः हम चल पड़े। 5 किलोमीटर की चटाई उतर आई रास्ता पार कर हम लोग रुद्रनाथ पहुंचे। अब 7.00 बज गया था।
शाम की आरती हो चुकी थी। हम रुद्र बाबा के चरण में पहुंच चुके थे। पुजारी से संपर्क हुआ, उन्होंने हमारे रहने की व्यवस्था कर दी। शाम को खिचड़ी प्रसाद लेकर हम सो गए। प्रातः 19 सितंबर को दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर भगवान भोलेनाथ के भव्य दर्शन करने के बाद नयनाभिराम बुग्याल एवं चारों को देख कर मन नहीं भर रहा था। 9.00 बजे हम वहां से वापस चल पडे। हमारी यात्रा काफी थी हमको लगा 31 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी थी। हम लोग धीरे.धीरे आगे बढ़ते रहे। पनार पहुंचे वहां से तोली ताल के लिए उतराई का रास्ता है। तोली ताल पहुंचकर हमने दिन का भोजन किया। उसके बाद डुमक गांव रात्रि प्रवास के लिए पहुंचे। यहां वजीर देवता के दर्शन किए। 20 सितंबर को पूरी टीम ने मंदिर दर्शन करने के बाद हम लोग वापस कलगोट गांव आ गए। वहां दिन का भोजन के प्रसाद नंदा माता के दर्शन के बाद वापस उर्गम वैली की ओर चल पड़े। कठिन एवं संघर्ष पूर्ण यात्रा करने के बाद अपने गांव लौट आए।

सरकार मूलभूत सुविधाएं ट्रैक रूट पर विकसित करे, जहां जहां ट्रैक बने हैं, पुरे सुधार किए जाएं। पनार से लेकर रुद्रनाथ 8 किलोमीटर पैदल यात्रा रुट में कोई चाय की दुकान नहीं है। वन विभाग ने सभी दुकानों को तोड़ दिया है। वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे यात्रियों को सुविधा मिल सके। जगह जगह ट्रैक रूटो पर दूरी के बारे में वर्णन होना चाहिए। हिमालय और रुद्रनाथ का संबंध सदियों और पुराणों से है। इस पर विचार होना चाहिए।
लक्ष्मण सिंह नेगी कल्प वीर उरगम घाटी जोशीमठ चमोली उत्तराखंड









