डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
मॉनसून का सीजन आने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ की आने की संभावनाएं बढ़ जाती है और एक ऐसा ही मामला पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र से सामने आ रहा है। यहां पर गत रात्रि हुई मूसलाधार बारिश के कारण काली नदी में बाढ़ आ गई जिसकी वजह से धारचूला-लिपुलेख मोटर मार्ग पर कुलागाड़ में बना आरसीसी पुल बह गया। इस पुल के बहने से धारचूला की दारमा, व्यास, चौंदास घाटी का संपर्क कट गया। बारिश और मलबा आने से चीन सीमा को जोड़ने वाली चार सड़कों समेत जिले की 19 सड़कें बंद हो गई हैं। भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। गत रात्रि धारचूला से 10 किमी दूर स्थित रांथी के कुलागाड़ में वर्ष 1999 में बना 157 फुट लंबा आरसीसी का पुल बह गया। जिससे चौंदास के 14, व्यास के सात और दारमा के 30 गांवों का संपर्क कट गया है।
उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के कुलागाड़ में पुल बहने के बाद से लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बंद पड़ी सड़कों को खोलने के लिए डोजर चलाने के लिए भी केन से डीजल भेजा जा रहा है। भारतीय सेना के घोड़ों के लिए भूसा रस्सी के सहारे पार कर पहुंचाया जा रहा है। तल्ला, मल्ला दारमा, तल्ला, मल्ला चौंदास और व्यास घाटी के 60 से अधिक गांवों के लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। पर्वतारोहण के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था सीबीटीएस अस्थायी पुल से आवाजाही में लोगों की मदद कर रही है। पांच दिन पूर्व उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कुलागाड़ का जलस्तर बढ़ गया था। इस कारण बीआरओ का सीसी पुल बहकर काली नदी में समा गया था। यहां पर एसएसबी, ग्रिफ और भारतीय सेना की टीम ने बिजली के खंभे डालकर अस्थायी आवाजाही के लिए पुल बनाया था। दो दिन पूर्व कुलागाड़ का जलस्तर बढ़ने के कारण वह भी बह गया। इसके बाद दूसरी जगह अस्थायी पुल बनाया गया है। आवाजाही के दौरान लोगों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए पवर्तरोहण के क्षेत्र में काम करने वाली सीबीटीएच संस्था लोगों को अस्थायी पुल से आर.पार जाने में मदद कर रही है।
मंगलवार को संस्था ने एक हजार लोगों को सुरक्षित नाला पार कराया। कुलागाड़ में प्रशासन की ओर से किसी भी कर्मी को तैनात नहीं करने पर लोगों ने नाराजगी प्रकट की है। इधर, लोगों को पैदल आवाजाही में दिक्कत ना हो इसके लिए लोनिवि के ठेकेदार रास्ते में सीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं। ग्रिफ के उच्च अधिकारियों का कहना है कि कुलागाड़ में बेली ब्रिज के निर्माण के लिए सामान पहुंच गया है। एक सप्ताह के भीतर पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क पर कुलागाड़ में पुल बहने से सर्वाधिक दिक्कतें सुरक्षा एजेंसियों को हो रही हैं। किसी तरह उच्च हिमालयी क्षेत्रों की पोस्टों में सामान पहुंचाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को सूचनाओं के आदान.प्रदान में भी काफी दिक्कतें हो रही हैं। कुलागाड़ में पहाड़ी जायका की टीम भागीरथी ह्यांकी और उर्मिला गुंज्याल के नेतृत्व में नराहत.बचाव कार्य में लगी हुई टीम को भोजन करा रही है। सीमांत जिले के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन अस्त.व्यस्त हो गया है।
चीन सीमा को जोड़ने वाली तीन और ग्रामीण क्षेत्र की नौ सड़कें बंद हैं। नदियां और गाड़.गधेरे भी उफान पर हैं। इसके चलते ग्रामीणों को आवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मलबे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सिमली.बिसनी, सेला, नागलिंग, बांस.आंवलाघाट, कुसेरीबैंड.सिलौनी, बांसबगड़.गूंठी, आदिचौरा.सिन्नी, मंसूरीकांडा.होकरा, स्यांकुरी.धामीगांव, छिरकिला.जम्कू सड़क भी बंद हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी सामान की दिक्कत होने लगी है। लोगों ने शीघ्र सड़कों को खोलने की मांग की है। धारचूला.तवाघाट.लिपुलेख सड़क से ही भारत.चीन और भारत.नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के जवान आवागमन करते हैं। रसद की आपूर्ति भी इसी सड़क मार्ग से की जाती है। इस पुल के बहने से सुरक्षा एजेंसियों के जवानों का आवागमन भी बंद हो गया है। अब सुरक्षा एजेंसियों के जवानों और अधिकारियों को भी पुल निर्माण तक आवागमन के लिए पैदल ही लकड़ी के पुल से आवागमन करना पड़ेगा।
सड़क बंद होने से सीमांत के गांवों में राशन, फल सब्जी सहित अन्य वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित रहेगी। मूसलाधार बारिश से धारचूला तवाघाट सड़क के कुलागाड में मोटर पुल ध्वस्त हो गया थाए उफान पर आया नाला आरसीसी पुल को तिनके की तरह बहा ले गया था। कुलागाड़ का पुल क्षेत्र के दारमा, व्यास और चौदास घाटियों सहित चीन और नेपाल सीमा को जोड़ता है। पुल के बह जाने से धारचूला की तीनों घाटियों के 100 से अधिक गांवों का सम्पर्क देश दुनिया से कट गया है। पुल बहने से उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रवास पर गए ग्रामीणों के साथ ही सीमा पर तैनात सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं गलाती धामी गाँव के लोग भी जाम जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं जो लकड़ी के डंडों के सहारे गाड़ को पार कर रहे हैं, आलम यह है की अलग थलग पड़े सीमांत वासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द अस्थाई पुल बनाने की मांग की है। मूसलाधार बारिश से जौलजीबी मुनस्यारी मोटर मार्ग में भी शेरा घाट के समीप भारी मात्रा में मलबा आ गया है। मलबे के कारण वाहनों की आवाजाही बंद पड़ी है नाकोट निगलानी गांव में बीते दिनों हुई भारी बारिश के कारण अब 12 परिवार खतरे की जद में हैं।











