• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

इतिहास समेटे है पिथौरागढ़ का लंदन फोर्ट

20/04/21
in उत्तराखंड, पिथौरागढ़
Reading Time: 1min read
323
SHARES
404
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
गोरखा शासनकाल में 1791 में बने पिथौरागढ़ के जिस किले का नाम बाद में लंदन फोर्ट रखा गया था, उसका नाम बदलकर अब सोरगढ़ रखने की मांग उठी है। यहां हुई बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज दिया गया है। शासन से जिला गठन की तिथि 24 फरवरी से पहले इसका नाम बदलने का आग्रह किया गया है। यह भी कहा गया कि अब सभी दस्तावेजों में लंदन फोर्ट की जगह सोरगढ़ अंकित किया जाएगा। गोरखा शासनकाल में बाऊलकी गढ़ और ब्रिटिश शासन में लंदन फोर्ट नाम से प्रसिद्ध किला पिथौरागढ़ में स्थित है। इस किले में अब संग्रहालय की स्थापना की जाएगी। बाउलीकीगढ़ नामक इस किले का निर्माण 1791 में गोरखा शासकों ने किया था। नगर के ऊंचे स्थान पर 6.5 नाली क्षेत्रफल वाली भूमि में निर्मित इस किले के चारों ओर अभेद्य दीवार का निर्माण किया गया था। इस दीवार में लंबी बंदूक चलाने के लिए 152 छिद्र बनाए गए हैं।

यह छिद्र इस तरह से बनाए गए हैं कि बाहर से किले के भीतर किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। किले के मचानों में सैनिकों के बैठकर व लेटकर हथियार चलाने के लिए विशेष रूप से स्थान बने हैं। किले की लंबाई 88.5 मीटर और चौड़ाई 40 मीटर है। 8.9 फीट ऊंचाई वाली इस दीवार की चौड़ाई 5 फीट 4 इंच है। पत्थरों से निर्मित इस किले में गारे का प्रयोग किया गया है। किले में प्रवेश के लिए दो दरवाजे हैं।

बताया जाता है कि इस किले में एक गोपनीय दरवाजा भी था, लेकिन अब यह कहीं नजर नहीं आता। किले के अंदर लगभग 15 कमरे हैं। किले का मुख्य भवन दो मंजिला है। भवन के मुख्य भाग में बने एक कमरे की बनावट नेपाल में बनने वाले भवनों से मेल खाती है। कहा जाता है कि इस किले में गोरखा सैनिक और सामंत ठहरते थे। इस किले में एक तहखाना भी बनाया गया था। इसमें कीमती सामन और असलहे रखे जाते थे। किले में बंदी गृह और न्याय भवन भी निर्मित था। किले के अंदर कुछ गुप्त दरवाजे और रास्ते भी थे। इनका प्रयोग आपातकाल में किया जाता था। किले के भीतर ही सभी सुविधाएं मौजूद थीं। किले के भीतर एक कुंआ भी खोदा गया था। एक व्यक्ति के इसमें डूबकर मरने के बाद इसको बंद कर दिया गया और उस पर पीपल का एक पेड़ लगा दिया गया।

पिथौरागढ़ की महत्वपूर्ण धरोहर लंदन फोर्ट इतिहास समेटे हुए है। संगोली की संधि के बाद 1815 में कुमाऊं में औपनिवेशिक शासन स्थापित हो गया और अंग्रेजों ने इस किले का नाम बाउलीकीगढ़ से बदलकर लंदन फोर्ट कर दिया। 1881 ईस्वी में इस किले में तहसील का कामकाज शुरू हुआ। वर्ष 1910-.20 के बीच में अंग्रेजों ने किले की मरम्मत कराई। इसके बाद इस किले को उपेक्षित छोड़ दिया गया। आजादी के बाद तहसील प्रशासन ने अपने स्तर से परिसर में नए भवनों का निर्माण किया। इस निर्माण में किले के वास्तविक स्वरूप को नुकसान पहुंचा। पिथौरागढ़ में स्थित किले के भीतर एक शिलापट्ट लगा है। इसमें प्रथम विश्व यु्द्ध में प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों का उल्लेख किया गया है। शिलापट में लिखा गया है कि परगना सोर एंड जोहार से विश्व युद्ध में 1005 सैनिक शामिल हुए थे, जिनमें से 32 सैनिकों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिये। इस संबंध में एसडीएम ने बताया कि वर्तमान में लागत से किले का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। किले के मूल स्वरूप का सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही इसमें एक संग्राहलय भी बनाया जाएगा।

उत्तराखंड राज्य के लगभग जार्ज एवरेस्ट मसूरी, देवलगढ़ राजराजेश्वरी मंदिर पौड़ी, गर्तांग गली.नेलोंग घाटी, चयनशील बनगान उत्तरकाशी, नारायण कोटि रूद्रप्रयाग, देवा डांडा गुजरूगढ़ी पौड़ी, पिथौरागढ़ किला, सती घाट हरिद्वार, क्रैंकरिज अल्मोड़ा आदि स्थलों को अंगित किया गया है। 18वीं सदी में इस किले का निर्माण गोरखा राजाओं द्वारा किया गया था। लगभग 135 वर्षों तक इसमें तहसील का कामकाज संचालित होने से इतिहास व कई रहस्यों को समेटे होने के बावजूद यह धरोहर गुमनाम सी हो गई थी। किले के मूल स्वरूप का सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही इसमें एक संग्राहलय भी बनाया जाएगा। किले को राष्ट्रीय धरोहर घोषित दिया चाहिए।

Share129SendTweet81
Previous Post

25 अप्रैल को होने वाली सेना भर्ती की लिखित परीक्षा कोविड की वजह से स्थगित

Next Post

26 अप्रैल को खुलेंगे लाटू सिद्धपीठ के कपाट

Related Posts

उत्तराखंड

युवा शक्ति विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण की प्रमुख आधारशिला : मुख्यमंत्री

September 16, 2026
10
उत्तराखंड

दिव्यांग बच्चों के बीच अपना जन्म दिवस मनाने पहुंचे मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी

September 16, 2026
5
उत्तराखंड

सुप्रसिद्ध लोकगायक, गीतकार और कवि हीरा सिंह राणा

September 16, 2026
11
उत्तराखंड

नए डॉप्लर रडार के इंतजार में उत्तराखंड, हर साल आपदा के बाद उठते हैं सवाल!

September 16, 2026
8
उत्तराखंड

गंगा नदी” भारत के लिए जीवनदायिनी?

September 16, 2026
6
अल्मोड़ा

सरकारी जमीन की बिक्री, नीलामी और दीर्घकालीन लीज पर रोक लगाए सरकार : उपपा

September 16, 2026
12

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67740 shares
    Share 27096 Tweet 16935
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38078 shares
    Share 15231 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37458 shares
    Share 14983 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

युवा शक्ति विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण की प्रमुख आधारशिला : मुख्यमंत्री

September 16, 2026

दिव्यांग बच्चों के बीच अपना जन्म दिवस मनाने पहुंचे मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी

September 16, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.