• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

समय के अनुसार बदल रहा है भिटौली का स्वरूप

21/03/20
in उत्तराखंड, संस्कृति
Reading Time: 1min read
364
SHARES
455
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड देवभूमि को लोक संस्कृति तथा लोक पर्वो के लिए जाना जाता है। उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण पर्व मनाये जाते है, इनमे से एक और लोक संस्कृति में आधारित, पवित्र त्यौहार भिटोली के रूप में मनाया जाता है यह त्यौहार, चैत के पूरे महीने में मनाया जाता हैं। उत्तराखण्ड राज्य में कुमाऊं.गढवाल मण्डल के पहाड़ी क्षेत्र अपनी रंगीली लोक परम्पराओं और त्यौहारों के लिये शताब्दियों से प्रसिद्ध हैं। यहाँ प्रचलित कई ऐसे तीज.त्यौहार हैं जो केवल उत्तराखण्ड में ही मनाये जाते है। वही इसे बचाए रखने का बीड़ा उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र और यहाँ पर रहने वाले पहाड़ी लोगों ने उठाया है। इन्होंने आज भी अपनी परंपरा और रीति- रिवाजों को जिन्दा रखा है।
उत्तराखण्ड की ऐसी ही एक विशिष्ट परम्परा है भिटौली। उत्तराखण्ड में चैत का पूरा महीना भिटोली के महीने के तौर पर मनाया जाता है। स्व० गोपाल बाबू गोस्वामी जी के इस गाने मे भिटोला महीना के बारे मे वर्णन है।
बाटी लागी बारात चेली, बैठ डोली में,
बाबु की लाडली चेली, बैठ डोली में
तेरो बाजू भिटोयी आला, बैठ डोली में
भिटौली का शाब्दिक अर्थ है, भेंट-मुलाकात करना। प्रत्येक विवाहित लड़की के मायके वाले भाई, माता-पिता या अन्य परिजन चैत्र के महीने में उसके ससुराल जाकर विवाहिता से मुलाकात करते हैं। इस अवसर पर वह अपनी लड़की के लिये घर में बने व्यंजन जैसे खजूर आटे-दूध-घी-चीनी का मिश्रण, खीर, मिठाई, फल तथा वस्त्रादि लेकर जाते हैं। शादी के बाद की पहली भिटौली कन्या को वैशाख के महीने में दी जाती है और उसके पश्चात हर वर्ष चैत्र मास में दी जाती है। लड़की चाहे कितने ही सम्पन्न परिवार में ब्याही गई हो उसे अपने मायके से आने वाली भिटौली का हर वर्ष बेसब्री से इन्तजार रहता है। इस वार्षिक सौगात में उपहार स्वरूप दी जाने वाली वस्तुओं के साथ ही उसके साथ जुड़ी कई अदृश्य शुभकामनाएं, आशीर्वाद और ढेर सारा प्यार-दुलार विवाहिता तक पहुंच जाता है। पहाड़ों पर चैत के महीने में एक चिड़िया घुई-घुई बोलती है। इसे घुघुती कहते हैं। घुघुती का उल्लेख पहाड़ी दंतकथाएं और लोक गीत में भी पाया जाता हैं। विवाहित बहनों को चैत का महिना आते ही अपने मायके से आने वाली भिटौली की सौगात का इंतजार रहने लगता है। इस इन्तजार को लोक गायकों ने लोक गीतों के माध्यम से भी व्यक्त किया है।
न बासा घुघुती चैत की, याद ऐ जांछी मिकें मैत की।
भिटौली प्रदेश की लोक संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इसके साथ कई दंतकथाएं और लोक गीत भी जुड़े हुए हैं। पहाड़ में चैत्र माह में यह लोकगीत काफी प्रचलित है। वहीं भै भुखो मैं सिती नाम की दंतकथा भी काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बहन अपने भाई के भिटौली लेकर आने के इंतजार में पहले बिना सोए उसका इंतजार करती रही। लेकिन जब देर से भाई पहुंचा, तब तक उसे नींद आ गई और वह गहरी नींद में सो गई। भाई को लगा कि बहन काम के बोझ से थक कर सोई है, उसे जगाकर नींद में खलल न डाला जाए। उसने भिटौली की सामग्री बहन के पास रखी। अगले दिन शनिवार होने की वजह से वह परंपरा के अनुसार बहन के घर रुक नहीं सकता था और आज की तरह के अन्य आवासीय प्रबंध नहीं थे, उसे रात्रि से पहले अपने गांव भी पहुंचना था, इसलिए उसने बहन को प्रणाम किया और घर लौट आया। बाद में जागने पर बहन को जब पता चला कि भाई भिटौली लेकर आया था। इतनी दूर से आने की वजह से वह भूखा भी होगा। मैं सोई रही और मैंने भाई को भूखे ही लौटा दिया। यह सोच.सोच कर वह इतनी दुखी हुई कि भै भूखो मैं सिती, यानी भाई भूखा रहा और मैं सोती रही, कहते हुए उसने प्राण ही त्याग दिए।
कहते हैं कि वह बहन अगले जन्म में वह घुघुती नाम की पक्षी बनी और हर वर्ष चैत्र माह में भै भूखो.मैं सिती की टोर लगाती सुनाई पड़ती है। पहाड़ में घुघुती पक्षी को विवाहिताओं के लिए मायके की याद दिलाने वाला पक्षी भी माना जाता है। पर्वतीय लोक जीवन में कई अनूठी परम्पराएं पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही हैं। इन्हीं में इसी माह का एक खास रिवाज भिटौली जो प्रकृति में ऋतु परिवर्तन लाने वाले चैत्र माह में मनाई जाती है।
प्राचीन समय में पहाड़ के लोगों को अपनी पहाड़ जैसी जिदगी में खेती.बाड़ी, पशु पालन जैसे कामों से फुरसत नहीं मिल पाती थी। दूर गांव में ब्याही बहू.बेटी भी अपने ससुराल के कामों में इतनी व्यस्त रहती कि उन्हें भी मायके जाकर उनसे मुलाकात का समय नहीं मिल पाता था। तब आज की तरह न तो आने जाने की सुविधा थी और न बातचीत के तरीके थे, ऐसे अभावों के कारण यहां पूर्वजों ने इसका हल निकालते हुए वर्ष में एक बार आवश्यक रूप से अपनी बेटी से मिलने उसके घर जाने की प्रथा बनाई गई। इस शुभ कार्य के लिए चैत में ठंड विदा होने व गर्मी की शुरुआत होने और पहाड़ में इन दिनों काम कुछ कम रहने के कारण भिटौली को चुना गया।
लेकिन मौजूदा आधुनिक युग में भिटौली का स्वरूप नकदी के रूप में परिवर्तित हो रहा है। इसके कारण जहां भावनात्मक लगाव कम हो रहा हैए वहीं पीहर के हाथों से बनी सामाग्रियों के स्वाद से भी बेटियां वंचित हो रही हैं। संस्कृति को जन्म देना आसान है लेकिन इसे संरक्षित करना बहुत मुश्किल है। भावनात्मक लगाव के प्रतीक इस त्योहार की मान्यता है कि चैत को काला महीना कहते हैं। इस कारण नवविवाहिता को शादी के पहले वर्ष में चैत के पांच दिन ससुराल से बाहर रहने की रीति है। इसलिए शादी के बाद पहली भिटौली वैशाख में भेंट की जाती है। आधुनिक युग में भिटौली देने के तरीके बदल रहे होए लेकिन यह परंपरा आज भी जैसी की तैसी बनी है, जिसका केंद्र भाव प्रेमए स्त्री का मान ही है।

Share146SendTweet91
Previous Post

कोरोनाः बुजुर्ग और बच्चे 31 मार्च तक घर पर ही रहें

Next Post

कोरोना के खतरे को भांपते हुए यात्रियों की हो रही जांच

Related Posts

उत्तराखंड

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘ध्वज वंदन समारोह आयोजित

January 18, 2026
8
उत्तराखंड

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘ध्वज वंदन समारोह

January 18, 2026
5
उत्तराखंड

कोटद्वार प्रेस क्लब नई कार्यकारिणी में अजय खंतवाल अध्यक्ष व सचिव पद पर दिनेश पाल सिंह गुसाईं को सर्वसम्मति से चुना गया

January 18, 2026
22
उत्तराखंड

वीरान हैं विश्व प्रसिद्ध हिमक्रीड़ा स्थल औली

January 18, 2026
9
उत्तराखंड

बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राएं

January 18, 2026
9
उत्तराखंड

एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

January 18, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67583 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘ध्वज वंदन समारोह आयोजित

January 18, 2026

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘ध्वज वंदन समारोह

January 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.