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इंसानियत शर्मिंदा! भाई की लाश को एंबुलेंस से ले जाने के लिए नहीं थे पैसे, डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

10/12/24
in उत्तराखंड
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स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में अभी भी प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में तमाम लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं. उत्तराखंड में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है, जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों और नर्सों की कमी से जूझ रहा है तो वहीं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कर्मचारियों और अधिकारियों की भी भारी कमी है. जिसके चलते जनता को पर्याप्त स्वास्थ्य उठाएं उपलब्ध नहीं हो पाती है. यही नहीं पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति काफी दयनीय है. इन सबके बीच राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हर साल बजट को बढ़ाने का प्रावधान करती रही है. बावजूद इसके धनराशि खर्च करने में स्वास्थ्य विभाग हमेशा ही फिसड्डी साबित हुई है. भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड में बिखरी हुई ग्रामीण बस्तियों को स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना लंबे समय से एक कठिन चुनौती रही है। उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक हैरान और परेशान कर देने वाली घटना सामने आई है. घटना ने हर किसी के दिल को झकझोर कर रख दिया है. खबर है कि एक बहन को अपने भाई की लाश को एंबुलेंस से गांव तक ले जाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे तो बहन सवारी वाहन की छत में भाई के शव को बांधकर ले गई. दोनों भाई-बहन हल्द्वानी में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे.गरीबी के कारण तमोली ग्वीर बेरीनाग, पिथौरागढ़ निवासी शिवानी हल्द्वानी में काम करने आई. वह हल्दूचौड़ में एक कंपनी में पिछले छह महीने से काम कर रही थी. घर में माता-पिता एक भाई और एक बहन बचे. पिता बुजुर्ग होने के कारण पहाड़ में ही खेती बाड़ी कर गुजारा कर रहे थे. शिवानी ने घर में आमदनी का जरिया बढ़ाने के लिए अपने 20 वर्षीय भाई अभिषेक को भी कंपनी में काम करने के लिए बुला लिया. दो महीने पहले ही अभिषेक ने हल्दूचौड़ स्थित कंपनी में नौकरी पाई. दोनों भाई-बहन एक ही कंपनी में नौकरी करने लगे. हालांकि, दोनों हल्दूचौड़ में ही अलग-अलग कमरे में रह रहे थे.घटना के संबंध में मृतक की बहन शिवानी ने बताया, शुक्रवार सुबह वह और भाई दोनों कंपनी में गए थे. इस दौरान उसका भाई सिर में दर्द होने के कारण कंपनी से छुट्टी लेकर वापस कमरे में चला गया. बहन जब ड्यूटी से कमरे पर लौटी तो भाई को खाना खाने के लिए फोन किया. भाई ने भी खाना खाने के लिए कुछ देर में आने की बात कही. लेकिन कुछ घंटे बाद जब भाई नहीं आया तो शिवानी ने फिर फोन किया. लेकिन भाई अभिषेक ने फोन नहीं उठाया. शिवानी, अभिषेक के कमरे पर पहुंची तो कमरे में कोई नहीं था. कमरे में अजीब दुर्गंध आ रही थी. घर पर स्कूटी भी नहीं थी. शिवानी को अनहोनी की आशंका हुई.शिवानी ने इसकी सूचना पुलिस को दी. जिसके बाद पुलिस और शिवानी ने अभिषेक की खोजबीन शुरू की. कुछ देर बाद हल्दूचौड़ स्थिति स्वास्थ्य केंद्र के पहले अभिषेक स्कूटी के साथ सड़क पर गिरा हुआ बेहोशी की हालत में मिला. पुलिस अभिषेक को सुशीला तिवारी अस्पताल में लेकर गई. जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.इसके बाद शनिवार को शव का पोस्टमॉर्टम हुआ. उधर घर पर सूचना के बाद रिश्तेदार भी बेरीनाग से हल्द्वानी पहुंच गए. पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया. लेकिन शिवानी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह भाई के शव को एंबुलेंस से घर ले जा सके. उसने एंबुलेंस संचालकों से बातचीत की तो किसी ने 10 तो किसी ने 12 हजार रुपए शव ले जाने के लिए मांगे. शिवानी ने पैसे की कमी के कारण अपने गांव के टैक्सी संचालक से संपर्क किया. इसके बाद शव को टैक्सी के ऊपर बांधकर बेरीनाग ले जाया गया.वहीं इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल कहना है कि किसी के द्वारा एंबुलेंस की मदद नहीं मांगी गई है. परिवार वालों का विवेक होता है कि अपने स्वजन के शव को कैसे लेकर जाएं. किसी भी राज्य के लिए स्वास्थ्य महकमा काफी महत्वपूर्ण विभाग होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनता से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि राज्य सरकार हर साल स्वास्थ्य महकमे के लिए बजट के प्रावधान को बढ़ाते रहती है. ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सके राज्य सरकार भी इस बात को मान रही है कि अभी भी स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा बदलाव करने की जरूरत है. यही वजह है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग को बेहतर किए जाने है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है. उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवा की बेहद ज़रूरी कड़ी 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन बुधवार से आधिकारिक रूप से नए हाथों में चला गया है. लेकिन टेंडर जीतकर 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन हासिल करने वाले नए एनजीओ ‘कैंप’ के लिए इस काम में चुनौतियां बड़ी हैं. ‘कैंप’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक समय बेहद प्रतिष्ठित रही और फिर पूरी तरह नाकाम साबित हो गई 108 एंबुलेंस सेवा की साख को फिर से बहाल करना है. उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर से एक बेहद हृदय विदारक घटना की खबर सामने आ रही है जहां पर एक 20 वर्षीय युवक ने दम तोड़ा । जिसके शव को गांव पहुँचाने के लिए एक बहन दर-दर की ठोकरे खाती हुई नजर आई जिसने हर किसी के दिल को झकझोर दिया। दरअसल मृतक भाई की गरीब बहन के पास उसके शव को एम्बुलेंस के जरिए गांव तक पहुंचाने के पैसे नही थे जिसके चलते उसे बेबस होकर अपने भाई के शव को टैक्सी की छत पर बांधकर ले जाना पड़ा। जो वाकई में इंसानियत को शर्मिंदा करने वाली घटना है। इस पूरी घटना के संबंध में मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए निर्देशों के क्रम में अधिकारियों से जवाब मांगा गया है इतना ही नहीं बल्कि जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने के आदेश दिए गए हैं। ताकि भविष्य में इस तरह का कृत्य ना किया जा सके।लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

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