• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में चार धाम आस्था सुरक्षा और पर्यावरण

25/02/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
23
SHARES
29
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने कहा है कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 47 प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के प्रस्ताव में जैन, सिख और बौद्ध समुदायों को छूट दी जाएगी। समिति की तरफ से कहा गया है कि मामला किसी विशेष धर्म का नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक अनुशासन का है, जो भी सनातन धर्म में आस्था रखता है, उसके लिए बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के द्वार खुले हैं। उसके पवित्र स्थलों की मूल प्रकृति को बनाए रखने के लिए सख्त कदम जरूरी है। प्रस्ताव का यह प्रतिबंध केवल मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर लागू होगा। जैन, सिख और बौद्ध समुदाय को छूट देने के पीछे तर्क दिया गया है कि अनुच्छेद 25 के तहत इन्हें हिन्दू परंपरा के अंतगर्त माना गया है। इस प्रस्ताव को जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में होने वाली बोर्ड बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।सवाल यही है कि सिर्फ मुस्लिम और ईसाइयों को बाहर रखने से ही क्या मंदिरों की पवित्रता बची रहेगी। क्या यही असली चुनौती है। चारो धाम पर जो पर्यावरण का खतरा सिर पर मंडरा रहा है, उससे पवित्रता खतरे में नहीं है। हिन्दुओ के चार वेद एवं 18 पुराणों में से एक प्रमुख स्कंद पुराण में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलियुग के हजारों वर्षों बाद और इसके अंत से पूर्व केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल अदृश्य हो जाएंगे या नष्ट हो जाएंगे। इस भविष्यवाणी का तात्पर्य यह बिल्कुल नहीं है की कोई शक्ति जाकर इन मंदिरों को तोड़ देगी या नष्ट कर देगी। बल्कि स्कंद पुराण के अनुसार कलियुग के अंत में जब धर्म का पतन अपने चरम पर होगा, तब यह दिव्यस्थल अपनी आध्यात्मिक शक्ति को समेट लेंगे और अदृश्य या भक्तों की पहुंच से दूर हो जाएंगे।कलियुग में हमें धर्म का पालन करना चाहिए, ताकि कलयुग में पवित्र स्थल और उनकी कृपा हम पर बनी रहे। साल 2013 में केदारनाथ में भीषण आपदा को भी कुछ लोग इस भविष्यवाणी की झलक मानते हैं। 15 जून 2025 को रुद्र प्रयाग में एक हेलिकाप्टर दुर्घटना ग्रस्त हो गया है। जिसमें सवार सभी तीर्थ यात्रियों के मृत्यु हो गई। कुछ लोग इसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार आधुनिक दृष्टिकोण के रूप में प्रतीकात्मक मानते हैं कि अगर हम पर्यावरण का नाश करेंगे तो धर्म हमसे दूर होता चला जाएगा। मौजूदा दौर में प्राकृतिक आपदाएं या सामाजिक पतन की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। ये इस बात का संकेत है कि इस पूरे क्षेत्र में दशकों से चले आ रहे प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने हालात बिगाड़ दिए हैं। इसके बावजूद जितनी गंभीरता से पर्यावरण को बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, वे उूट के मुंह में जीरे के समान है।साल 2013 में केदारनाथ में भयंकर विनाशकारी आपदा आई थी। केदारनाथ आपदा में 4400 से अधिक लोग मारे गए। 7 फरवरी 2022 को धौली और ऋषि गंगा का ऐसा सैलाब आया, जिसमें सैकड़ों जिंदगियां दफ्न हो गई थी। इस आपदा ने न सिर्फ 204 लोगों की जान ले ली, बल्कि अपने रास्ते में आने वाले सभी बुनियादी ढांचों को नष्ट कर दिया। आपदा में करीब 1,625 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। उत्तराखंड चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। वर्ष 2025 में 51 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने चारों धामों के दर्शन किए, जो पिछले साल अर्थात 2024 की तुलना में 4 लाख 35 हजार अधिक है।केदारनाथ यात्रा के दौरान डेढ़ से 2 टन कचरा रोजाना उत्पन्न होता है। वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम में रिकॉर्ड 17.68 लाख भक्तों ने लगभग कुल 2300 टन से अधिक कचरा फैलाया है, जिसमें 100 टन प्लास्टिक शामिल है। हिमालयी क्षेत्र में कूड़ा जलाने पर बैन होने के कारण, इस मलबे को खच्चरों द्वारा सोनप्रयाग नीचे लाने में ₹25 करोड़ से अधिक की लागत आ रही है। यह कचरा पिछले साल की तुलना में 325 टन अधिक है। जिसमें 2200 टन ठोस कचरा और लगभग 100 टन प्लास्टिक शामिल है। हर तीर्थयात्री ने औसतन 1.5 किलो से ज्यादा कचरा छोड़ा। भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। यह कचरा 23 अक्टूबर 2025 को कपाट बंद होने के बाद सफाई अभियान के दौरान गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच मिला। एक रिपोर्ट के मुताबिक चारधाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ ग्रीष्मकालीन के साथ ही शीतकालीन गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है। ऐसे में ग्लेशियरों के पीछे खिसकने की वजह से भूस्खलन हिमस्खलन चट्टानों के गिरने समेत खतरों को बढ़ा रहा है। यही नहीं, ग्लेशियर के पीछे हटने से हैकिंग ट्रेल्स और पर्वतारोहण मार्गों में भी बदलाव आ रहे हैं। लिहाजा, चारधाम में बढ़ रही भक्तों की भीड़ की वजह से पर्वतीय पर्यटन पर प्रभाव पड़ रहा है। मुख्य रूप से, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने की वजह से चारधाम यानी बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के समीप मौजूद ग्लेशियर न सिर्फ तेजी से पिघल रहे हैं बल्कि सालाना धामों के तापमान भी 0.02 से 0.05 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो रही है।दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में हजारों एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा था कि राज्य तंत्र की विफलता के कारण “23 साल लग गए” और अधिकारी सब कुछ देखते हुए भी शांत बने रहे। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण और कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध निर्माण/पेड़ों की कटाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को “मूकदर्शक” बने रहने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने, जांच के लिए समिति गठित करने और पारिस्थितिक नुकसान की भरपाई करने के निर्देश दिए थे। उत्तराखंड में हज़ारों हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में कार्यकारी पद पर आसीन प्रत्येक व्यक्ति इस लापरवाही के लिए जवाबदेह है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आपको अवैध कब्ज़े का पता लगाने में 23 साल का समय लग गया। सुप्रीम कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड सरकार को पर्यावरण बचाने की कितनी चिंता है, इसके विपरीत धार्मिक भावनाओं को भुनाने के लिए पवित्रता बचाने की कवायद की जा रही है।हिमालय क्षेत्र में अधिक तीर्थ यात्रियों व पर्यटकों का स्वागत करना अच्छा लगता है, पर इसके लिए ऐसे तौर-तरीके नहीं अपनाने चाहिए जिनसे तीर्थ स्थान व उनके प्रवेश मार्ग ही संकटग्रस्त हो जाएं तथा पर्यावरण की बहुत क्षति हो जाए।पर्यटक हिमालय के किसी सुंदर स्थान पर जाना चाहते हैं पर यदि विकास के नाम पर अत्यधिक निर्माण से उस स्थान का प्राकृतिक सौन्दर्य ही नष्ट कर दिया जाए तो फिर यह विकास है या विनाश?तीर्थ यात्रा तो वैसे भी आध्यात्मिकता से जुड़ी है, तो फिर तीर्थ स्थानों पर वाहनों का प्रदूषण, हेलीकॉप्टरों का शोर व वृक्षों का विनाश कैसे उचित ठहराया जा सकता है?तीर्थ स्थानों व पर्यटन के संतुलित विकास से, विनाशमुक्त विकास से, स्थानीय लोगों की टिकाऊ आजीविकाएं जुड़ सकती हैं; वे पर्यटकों व तीर्थ यात्रियों के लिए हिमालय के तरह-तरह के स्वास्थ्य लाभ देने वाले खाद्य व औषधियां जुटा सकते हैं।सामरिक दृष्टि से भी हिमालय क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है और सड़कें व मार्ग सुरक्षित रहें, भूस्खलन व बाढ़ का खतरा न्यूनतम रहे यह सैनिकों के सुरक्षित आवागमन के लिए भी आवश्यक है।देश में प्‍लास्टिक का कचरा लगातार बढ़ रहा है और यह पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है. पर्वतीय इलाके भी प्‍लास्टिक कचरे की चपेट में हैं. हालांकि अब चारधाम यात्रा को प्‍लास्टिक मुक्‍त बनाए जाने के लिए उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कड़े कदम उठाने जा रहा है. अब सिंगल यूज़ प्लास्टिक उपयोग करने वालों पर न सिर्फ कार्रवाई होगी बल्कि जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके. चारधाम यात्रा के दौरान पिछले कुछ सालों से ऐसी तस्‍वीरें सामने आ रही हैं, जहां यात्रा रूट पर प्लास्टिक का कचरा चारों तरफ फैला देखा गया है और इस कचरे में प्लास्टिक की बोतल, पॉलीथिन और बैग्स पड़े नजर आते हैं, जो पर्यावरण के साथ मवेशियों के लिए खतरा बन गए हैं. इसी खतरे से निपटने के लिए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्लान बनाया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तीन तरह की रणनीतियों पर काम करने का दावा कर रहा है. इनके तहत उत्तराखंड में आने वाले चारों धामों में श्रद्धालु न‍ सिर्फ प्लास्टिक फ्री यात्रा बनाने बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में अहम योगदान के लिए भी काम कर सकेंगे. ऐसे में स्थायित्व और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकास ही एकमात्र सही रास्ता है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share9SendTweet6
Previous Post

जनगणना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, सभी अधिकारी गंभीरता से निभाए दायित्व- एडीएम

Next Post

अल्पकालिक राजनीतिक लाभ मुफ्त रेवड़ी लोकतंत्र के लिये घातक

Related Posts

उत्तराखंड

नियम दरकिनार खराब मौसम में उड़ान भरने के जोखिम

October 31, 2026
6
उत्तराखंड

सरदार पटेल की आखिरी दौरा साक्षी, आज पन्नों में जिंदा हैं यादें

October 31, 2026
4
उत्तराखंड

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के साथ भर्ती में जवाबदेही ?

October 31, 2026
5
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन गौरव चिह्नों का किया अनावरण

October 31, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला: अस्पताल में ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर 1.28 लाख की ठगी

October 31, 2026
4
उत्तराखंड

डोईवाला: चार आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी

October 31, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67759 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37387 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

नियम दरकिनार खराब मौसम में उड़ान भरने के जोखिम

October 31, 2026

सरदार पटेल की आखिरी दौरा साक्षी, आज पन्नों में जिंदा हैं यादें

October 31, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.