हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली। आज जबकि दुनिया के तमाम देश चांद, मंगल पर अपना आसियान बनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं, वही दूसरी ओर इस क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीणों को अपने परिजनों से बातचीत के लिए डांडा काठियों में जाने पर मजबूर होना पड़ रहा हैं। हालांकि भारत संचार निगम लिमिटेड ने इन क्षेत्रों में पांच मोबाइल टावर स्थापित किए हुए हैं किंतु वह एक तरह से सफेद हाथी साबित हो रहें हैं। दरसअल विकास खंड देवाल के अंतर्गत पिंडर क्षेत्र के मेलखेत,खेता- मानमती,चोटिंग, उदेपुर,हरमल,झलिया, रामपुर,तोरती आदि गांवों के ग्रामीणों को बेहतरीन संचार सुविधा मुहैया करवाने के लिए बीएसएनएल के द्वारा इस क्षेत्र के उदेपुर,धार कुंवरपाटा,मुनियाली खेत एवं मेलखेत में 4 जी के चार मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं, जबकि पूर्व में ही इस क्षेत्र में स्थापित खेता टावर का 2 जी से अपग्रेडेशन कर 4 जी किया गया हैं। किंतु आज सभी टावर इस क्षेत्र के ग्रामीणों के सामने सफेद हाथी की तरह खंडे ग्रामीणों का मुंह चीड़ा रहें हैं। बताया जा रहा है कि इन टावरों से सेबित क्षेत्रों में पिछले लंबे समय से कभी कभार ही केवल डाटा कोलिंग ही हों पाते हैं, जबकि आमतौर पर मोबाइल से सीधी कॉलें नही पा रही हैं। बताया जा रहा है कि आज तक भी इन टावरों का विधिवत रूप दो वर्षों के बाद भी शुरू नहीं हो पाए हैं। जिस कारण लोगों को संचार सुविधा का लाभ नही मिल पा रहा है।बीएसएनएल ने तीन मोबाइल टावरों को स्वीकृति ग्राम पंचायतों के विरुद्ध दूसरे गांवों में स्थापित कर दिया गया हैं।जिस कारण कनैक्टिविटी में भी दिक्कत आ रही हैं। हरमल गांव के नाम से स्वीकृति टावर को उदेपुर गांव में,बजेई(मोपाटा) के नाम से स्वीकृति टावर को मानमती के धार कुंवरपाटा एवं तोर्ती गांव के नाम से स्वीकृति टावर को मुनियाली खेत (मानमती) में स्थापित कर दिया गया हैं। स्थापित बीएसएनएल के टावरों को विधिवत रूप से शुरू करने के लिए लगातार शासन, प्रशासन एवं बीएसएनएल के उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है, किंतु आज भी टावरों का विधिवत संचालन शुरू नही हो पाया हैं। इन क्षेत्रों में जहां छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन शैक्षण कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं, वही रोजगार गारंटी जैसी रोजगारपरक योजना जिसके तहत अब कार्यों, उपस्थिति एवं भुगतान को ऑनलाइन हो रहा हैं।पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा हैं। इसके अलावा आम ग्रामीणों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं।












