• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

ऑनलाइन हाजिरी बनी परेशानी का सबब मेहनताने को भटक रहे श्रमिक

12/10/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
6
SHARES
8
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी योजना (वीबी-जी राम-जी) आज यानी एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो गयी है. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार योजना की नई मजदूरी दरें जारी कर दी हैं. उत्तराखंड के मनरेगा में सक्रिय 7.58 लाख श्रमिकों में से 92 फीसदी श्रमिकों की ई- केवाईसी भी हो चुकी है.उत्तराखंड के गांवों में वीबी जी रामजी योजना को लेकर ग्राम प्रधान संगठन और सरकार के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है. संगठन का कहना है कि योजना में ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है. कई गांवों में नेटवर्क नहीं होने और ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के कारण श्रमिकों की हाजिरी दर्ज करने में परेशानी आ रही है. इसका असर गांवों में चल रहे कामकाज और मजदूरी की प्रक्रिया पर पड़ रहा है. ग्राम प्रधानों का आरोप है कि व्यवस्था में आ रही दिक्कतों का खामियाजा उन्हें गांवों में भुगतना पड़ रहा है, जबकि तकनीकी व्यवस्था उनके नियंत्रण में नहीं है. इसी समस्या को लेकर संगठन ने सरकार से मांग की है कि जिन क्षेत्रों में ऑनलाइन हाजिरी संभव नहीं है, वहां ऑफलाइन व्यवस्था लागू की जाए, ताकि काम और मजदूरी दोनों प्रभावित न हों प्रदेश प्रभारी, ग्राम प्रधान संगठन-पोर्टल कई बार इतना धीमा चलता है कि समय पर हाजिरी दर्ज करना मुश्किल हो जाता है. कभी सुबह की हाजिरी लग जाती है, लेकिन शाम की नहीं लगती और कई बार दोनों समय की हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती. ऐसे में मजदूर दिनभर काम करने के बाद भी हाजिरी पूरी नहीं होने की समस्या से जूझते हैं. जब मजदूर को लगता है कि उसने मेहनत की है, लेकिन उसकी मजदूरी की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई, तो वह अपनी नाराजगी लेकर ग्राम प्रधान के पास पहुंचता है. गांव में मजदूरों और प्रधानों के बीच सीधा संपर्क होने के कारण लोगों का गुस्सा भी प्रधानों को ही झेलना पड़ता है.
-ग्राम प्रधान संगठन ने ऑनलाइन हाजिरी के साथ मानदेय बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है. प्रदेश महामंत्री ने कहा कि मौजूदा 3500 रुपये के मानदेय में प्रधानों को ब्लॉक और जिला मुख्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. अधिकारियों से मिलने, पंचायत के कामकाज और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए आने-जाने में खर्च होता है. कई बार यह खर्च प्रधानों को अपनी जेब से उठाना पड़ता है. ऐसे में सवाल यह है कि इतने कम मानदेय में प्रधान अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे करें. संगठन मानदेय को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहा है. प्रधानों का तर्क है कि गांवों में विकास कार्यों से लेकर लोगों की समस्याओं तक, हर मामले में उनसे जवाब मांगा जाता हैजॉब कार्ड को लेकर भी एक व्यावहारिक समस्या उठाई. उन्होंने कहा कि अगर ग्राम प्रधान के परिवार या पत्नी के नाम पर जॉब कार्ड है, तो अपनी ही पंचायत में मजदूरी करने को लेकर परेशानी सामने आती है. ऐसी स्थिति में प्रधान के सामने नियमों और रोजगार से जुड़ी दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं. संगठन चाहता है कि इस तरह के मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश हों, जिससे प्रधानों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े. ग्राम प्रधान संगठन की मांग है कि सरकार केवल ऑनलाइन हाजिरी की समस्या तक सीमित न रहे, बल्कि मानदेय, रोजगार और पंचायतों के कामकाज से जुड़ी सभी व्यावहारिक समस्याओं पर एक साथ निर्णय ले. ग्राम प्रधान संगठन की मांगों और सरकार के आश्वासन के बीच अब एक सप्ताह का समय अहम हो गया है. हाजिरी दर्ज करने की जिम्मेदारी मेट्स की होती है और ग्राम प्रधानों की इसमें सीधे तौर पर भूमिका नहीं है. मंत्री ने यह भी दावा किया कि मनरेगा में जहां कई-कई महीने तक भुगतान नहीं हो पाता था, वहीं नई योजना में 15 से 20 दिन के भीतर लाभार्थियों को भुगतान मिल रहा है. मंत्री ने वीबी जी राम जी योजना को मनरेगा से बेहतर बताते हुए कहा कि रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया है. मजदूरी की दर 252 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये किए जाने से श्रमिकों को लाभ मिलेगा. अगर ऑनलाइन हाजिरी की समस्या के समाधान और अन्य मांगों पर ठोस पहल होती है, तो आंदोलन टल सकता है. लेकिन अगर संगठन को संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आने वाले विधानसभा सत्र के घेराव की तैयारी है. इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी अहम बना दिया है. अब देखना होगा कि सरकार और ग्राम प्रधान संगठन के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या यह विवाद आगे और बढ़ता है.  संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो ग्राम प्रधान आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगे. ग्राम प्रधानों का कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम गांवों में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है। कार्यस्थलों पर नेटवर्क नहीं मिलने के कारण मजदूरों की हाजिरी के लिए फोटो समय पर अपलोड नहीं हो पाती। इसका सीधा असर मजदूरों की मजदूरी पर पड़ रहा है। प्रधानों के मुताबिक कई जगह काम पूरा होने के बावजूद मजदूर भुगतान के लिए इंतजार कर रहे हैं।वीबी-जी रामजी योजना में ऑनलाइन हाजिरी ग्रामीणों के लिए रोजगार की राह में रोड़ा बन गई है। फेस कैप्चरिंग और रेटिना मैचिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते श्रमिकों की डिजिटल हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। नतीजा यह कि योजना शुरू होने के तीन महीने बाद भी जिले में पांच फीसदी ही जॉब कार्डधारक योजना का लाभ ले पाए हैं।एक जुलाई से मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जी रामजी योजना कर दिया है। इसमें एक परिवार को 125 दिन के लिए काम दिया जाना है लेकिन योजना के शुरुआत से ऑनलाइन हाजिरी जी का जंजाल बन गई है। श्रमिकों के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप के जरिए ऑनलाइन हाजिरी लगाना अनिवार्य है लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें दिक्कतें आ रही हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले के आठ विकासखंडों में 41022 जॉब कार्डाें में 65885 श्रमिक पंजीकृत हैं लेकिन अब तक मात्र 3146 श्रमिक ही रोजगार पा सके हैं। !लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet2
Previous Post

उत्तराखण्ड सिद्धपीठ कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का आगाज

Next Post

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

Related Posts

उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

October 12, 2026
4
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड सिद्धपीठ कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का आगाज

October 12, 2026
5
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी थी बिशनी देवी शाह

October 12, 2026
5
उत्तराखंड

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किये

October 12, 2026
3
उत्तराखंड

तारबाड़ में फंसा भालू, वन विभाग की टीम ने निकाल कर जंगल में छोड़ा

October 12, 2026
9
उत्तराखंड

गढ़वाल के 52 गढ़ों में सुमार बधाणगढ़ी में शरादीय नवरात्रि के पर्व पर नंदा भगवती के भक्तों का तांता लगा

October 12, 2026
3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67751 shares
    Share 27100 Tweet 16938
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37460 shares
    Share 14984 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37383 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

October 12, 2026

ऑनलाइन हाजिरी बनी परेशानी का सबब मेहनताने को भटक रहे श्रमिक

October 12, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.