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ऑपरेशन सिंदूर’ के पीछे छिपा है गहरा भाव

07/05/25
in उत्तराखंड, देहरादून
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को जो हुआ, वो माफी योग्य नहीं था। उस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसी के जवाबी कार्रवाई को लेकर भारत सरकार ने ऑपरेशन चलाकर आतंकियों के नौ ठिकानों खत्म कर दिया। इसे ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया। यह कोई साधारण शब्द नहीं है इसके पीछे गहरा भाव जुड़ा हुआ है पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेनाओं ऑपरेशन सिंदूर चलाया। भारतीय संस्कृति में सिंदूर का बेहद महत्व होता है। इसे विवाहित महिलाओं के सुहाग और सम्मान का प्रतीक माना है। पहलगाम हमले के बाद सबसे ज्यादा महिलाओं के आहट होने की खबर सामने आ रही थी। कई नवविवाहित जोड़ों को उनके आंखों के सामने जुदा कर दिया गया। ऑपरेशन सिंदूर इन्हीं महिलाओं के सम्मान में नाम दिया गया। यह ऑपरेशन आतंकवादियों को सबक सिखाने के साथ साथ इन परिवारों के प्रति भारत की संवेदना और संकल्प को भी दर्शाता था। पहलगाम हमले के बाद शासन प्रशासन लगातार गुप्त बैठक कर रही थी। इन बैठकों में पीएम मोदी ने साफ संदेश दिया था कि पहलगाम हमले में आतंकियों ने हमारी कई महिलाओं को विधवा किया और पुरुषों को मारकर सिंधूर हटाया है। हमें इसका जवाब देते हुए बड़ी कार्रवाई करनी है। पीएम ने इसी कारण इस सैन्य ऑपरेशन का नाम ‘मिशन सिंदूर’ रखा था।  भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों पर की गई रातभर की एयरस्ट्राइक के बाद देश में सैन्य सतर्कता को तेज कर दिया गया है. गृह मंत्री अमित शाह ने सभी अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि जो भी जवान छुट्टी पर हैं, उन्हें तुरंत ड्यूटी पर बुलाया जाए. सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के मद्देनज़र उठाया गया है. सूत्रों के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर वायुसेना के हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के चार, लश्कर-ए-तैयबा के 3 और हिज्बुल मुजाहिदीन के 2 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. रक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने कल रात जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार चौकियों से तोपखाने से गोलाबारी सहित मनमाने तरीके से गोलीबारी की. वहीं, पाकिस्तान की भारी गोलाबारी के कारण पुंछ शहर में बड़े पैमाने पर पलायन की खबरें मिल रही हैं.एयरलाइन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अमृतसर जाने वाली दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को दिल्ली भेजा जा रहा है। इस अप्रत्याशित व्यवधान के कारण हुई असुविधा के लिए हमें खेद है.” स्पाइसजेट के अनुसार, मौजूदा स्थिति के कारण धर्मशाला (डीएचएम), लेह (आईएक्सएल), जम्मू (आईएक्सजे), श्रीनगर (एसएक्सआर) और अमृतसर (एटीक्यू) सहित उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हवाई अड्डे अगले आदेश तक बंद हैं.एयरलाइन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “प्रस्थान, आगमन और परिणामी उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं.” इंडिगो ने कहा कि क्षेत्र में हवाई क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के कारण श्रीनगर, जम्मू, अमृतसर, लेह, चंडीगढ़ और धर्मशाला से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं. भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार को तड़के पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा मुरीदके शामिल है.पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला ले लिया गया है. एनएसए ने एक्स पोस्ट पर लिखा, ‘भारत माता की जय’. भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जाने के मद्देनजर हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध के बीच भारतीय एयरलाइनों ने जम्मू और श्रीनगर सहित विभिन्न शहरों के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं. एयर इंडिया ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए एयरलाइन ने जम्मू, श्रीनगर, लेह, जोधपुर, अमृतसर, भुज, जामनगर, चंडीगढ़ और राजकोट के लिए अपनी सभी उड़ानें दोपहर तक रद्द कर दी हैं. भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान सामने आया है। चीन की तरफ से भारत के इस एक्शन पर अफसोस जताया गया है। इस बयान में चीन की तरफ से भारत और पाकिस्तान, दोनों से शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देने, शांत रहने और संयम बरतने का आह्वान किया गया है। डिफेंस विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाम के पीछे गहरा मानवीय भाव जुड़ा हुआ है. दरअसल, पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई ऐसे नवविवाहित जोड़े निशाना बने, जो हनीमून के लिए घाटी पहुंचे थे. इन हमलों ने कई नवविवाहित महिलाओं के सिर से सिंदूर का अधिकार छीन लिया. इन्हीं आंसुओं और पीड़ा की गूंज बनी भारत की यह जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर’ न केवल एक सैन्य अभियान है, बल्कि यह एक प्रतीक है, शौर्य, संयम और संकल्प का। यह उस दर्द का उत्तर है, जो भारत ने वर्षों तक झेला है। कश्मीर की घाटियों में लहू बहता रहा, आरती की थालियाँ बुझती रहीं, सैनिकों की वर्दियाँ तिरंगे में लिपटी रहीं। किन्तु अब भारत ने स्पष्ट कर दिया है, शांति उसकी पसंद है, किंतु कमजोरी नहीं।पाकिस्तान की बौखलाहट इस बात की गवाही है कि चोट गहरी है। वह बयान बदल रहा है, झूठ और असमंजस की चादर में छिपने का प्रयास कर रहा है। लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने उसकी सीमाओं के भीतर बैठे उन ‘पालित पिशाचों’ को ललकारा है, जिनकी जड़ों में भारत के निर्दाेषों का रक्त है। चाणक्य के वचन इस प्रसंग में स्मरणीय हो उठते हैं, ‘आग के साथ आग बन मिलो, पानी से बन पानी, गरल का उत्तर है प्रतिगरल, यही कहते जग के ज्ञानी।’ सचमुच, गरल का उत्तर प्रतिगरल ही है। यह कोई प्रतिशोध नहीं, यह सामने वालों के अनैतिक और अमानवीय कृत्य का उत्तर है, जैसे को तैसा, किंतु नैतिक मर्यादा की सीमा में। जब एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एकत्र होते हैं, तब देश की आत्मा मजबूत होती है। नेता प्रतिपक्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेना प्रमुखों के साथ निरंतर विमर्श से यह स्पष्ट हो गया था कि अब शब्द नहीं, शौर्य का समय है। जिनकी नई-नई शादी हुई थी. एक महिला की तो कुछ दिनों पहले ही शादी हुई थी. इस महिला को अपने पति के शव के साथ बैठे देख लोगों की आंखों में आंसू आ गए थे. इन महिलाओं के दुख को पूरे ने महसूस किया था. प्रधानमंत्री ने भी इस हमले के बाद कहा था कि आतंकियों को बख्‍शा नहीं जाएगा. भारतीय ने सेना ने देश के लोगों के आंसुओं का बदला ऑपरेशन सिंदूर से लिया है. संदेश साफ है कि सिंदूर उजाड़ने का करारा जवाब मिलेगा, फिर दुश्‍मन किसी भी जगह छिपा क्‍यों न हो. उन्हें शत-शत नमन। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

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