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चारधाम यात्रा में कई रिकॉर्ड्स को चुनौती देना शुरू कर दिया है

19/03/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में इस बार भारी उत्साह देखा जा रहा है। यात्रा शुरू होने से पहले ही पंजीकरण के आंकड़ों ने पिछले कई रिकॉर्ड्स को चुनौती देना शुरू कर दिया है। 6 मार्च से शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही 5.18 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। यह संख्या दर्शाती है कि इस साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ने वाला है। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में इस बार भारी उत्साह देखा जा रहा है। यात्रा शुरू होने से पहले ही पंजीकरण के आंकड़ों ने पिछले कई रिकॉर्ड्स को चुनौती देना शुरू कर दिया है। 6 मार्च से शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही 5.18 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। यह संख्या दर्शाती है कि इस साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ने वाला है। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में इस बार भारी उत्साह देखा जा रहा है। यात्रा शुरू होने से पहले ही पंजीकरण के आंकड़ों ने पिछले कई रिकॉर्ड्स को चुनौती देना शुरू कर दिया है। 6 मार्च से शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही 5.18 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। यह संख्या दर्शाती है कि इस साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ने वाला है। साल 2022 से केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में चल रहे मास्टर प्लान के काम अब पूरे होने के करीब हैं. इन कामों का मकसद है दोनों पवित्र स्थलों को और सुंदर, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना. इससे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान बेहतर सुविधा और सुरक्षा मिलेगी.केदारनाथ मास्टर प्लान के तहत कई जरूरी निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं. यहां मंदाकिनी आस्था पथ, किसान ईश्वर मंदिर, तीर्थ पुरोहितों के लिए बनाए गए 12 आवास, संगम घाट, एक अस्पताल, और एक नया पुलिस मुख्यालय तैयार हो चुका है.बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गए हैं. धाम में यातायात, तीर्थयात्रियों की पैदल आवाजाही, पथ प्रकाश, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुव्यवस्थित करने, नदी तटों की सुरक्षा, साथ ही धाम की सुरक्षा, पार्किंग सहित सभी यात्री सुविधाओं, सीवर निस्तारण के विकास के लिए 440 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. जिससे अब योजना के अनुसार बदरीनाथ धाम का दिव्य और भव्य स्वरुप आकार लेने लगा है. धाम के मास्टर प्लान का निर्माण कार्य करवा रही पीआईयू (लोनिवि) के अधिकारियों के अनुसार बदरीनाथ धाम में सभी कार्यों को जल्द पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.बदरीनाथ धाम को तीर्थयात्रियों की आवश्यकता के अनुरुप और यात्री सुविधाओं से लैस करने की मंशा से यहां 440 करोड़ से मास्टर प्लान के निर्माण कार्य करवाये जा रहे हैं. धाम को व्यवस्थित और यात्री सुविधाओं के विकास के लिए यहां निर्माण कार्यों को फेज 1 और 2 दो भागों में किया जा रहा है. जिनमें से वर्तमान तक फेज 1 के तहत वन-वे लूप रोड, बीआरओ बाईपास रोड, सिविक एमेनिटी बिल्डिंग, शेषनेत्र लेक, बद्रीश लेक, आईएसबीटी भवन, टूरिस्ट मैनेजमेंट सेंटर बिल्डिंग एवं एराइवल प्लाजा के निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं. हॉस्पिटल एक्सटेंशन बिल्डिंग का कार्य अंतिम चरण में है. प्लान के तहत फेज 1 में अलकनंदा नदी तटों पर सुरक्षा के लिए किए जा रहे रिवरफ्रंट के कार्य युद्ध स्तर पर गतिमान है. जिसमें रिवरफ्रंट-जी में फिनिशिंग का कार्य किया जा रहा है. रिवरफ्रंट-एफ का कार्य 75 फीसदी पूर्ण हो चुका है. रिवरफ्रंट-ए का कार्य भी गतिमान है. रिवरफ्रंट ई1 एवं ई2 के अंतर्गत 60 मीटर स्पान के स्टील ट्रस सेतुओं का निर्माण किया जा रहा है. जिसमें ई 1 सेतु के लॉन्चिंग का कार्य किया जा रहा है. ई 2 सेतु के एबेटमेंट का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. दूरदर्शन स्थल में भी फिनिशिंग का कार्य किया जा रहा है. इस साल 22 अप्रैल को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने से पहले मंदिर परिसर में कुछ अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने परिसर को अधिक व्यवस्थित बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।कपाट खुलने से पहले मंदिर के चारों ओर रेलिंग लगाने का कार्य किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं की भीड़ के दौरान व्यवस्था बनी रहे और दर्शन करने आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। रेलिंग लगने के बाद मंदिर परिसर पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित और आकर्षक दिखाई देगा। केदारनाथ धाम और मंदिर परिसर को काफी नुकसान पहुंचा था। इस आपदा के बाद केंद्र और राज्य सरकार की मदद से यहां बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण और विकास कार्य कराए गए। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यू.टी.डी.बी.) की ओर से चारधाम यात्रा का ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने के साथ पहले  ही दिन तीर्थयात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। शुक्रवार  को  देश-विदेश से कुल 1,24,089 तीर्थयात्रियों ने चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण कराया। इस बार यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी। प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करके यात्री अपने मोबाइल पर स्थान से जुड़ी जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा ट्रैफिक जाम या किसी आपात स्थिति में यात्रियों को मोबाइल अलर्ट भेजे जाएंगे।साथ ही चारधाम यात्रा में आने वाले पर्यटकों के वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य किया जाएगा, ताकि यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था बेहतर ढंग से नियंत्रित की जा सके।इस तरह प्रशासन चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में इस कदर उत्साह है कि पंजीकरण के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन विंडो खुलते ही भक्तों ने भारी संख्या में आवेदन किए हैं। उत्तराखंड के हिमालयी धामों- बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा के लिए श्रद्धालुओं ने Registration में नया इतिहास रच दिया है। 6 मार्च को पंजीकरण शुरू होने के बाद से मात्र चार दिनों के भीतर ही 3 लाख 53 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना नाम दर्ज करा लिया है। इसमें केदारनाथ धाम के लिए सबसे अधिक 42,405 तीर्थयात्रियों ने ऑनलाइन पंजीकरण  कराया, वहीं श्री बद्रीनाथ धाम के लिए 36,580, गंगोत्री धाम के लिए 22,764 और यमुनोत्री धाम के लिए 22,340 तीर्थयात्रियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है।पर्यटन सचिव ने बताया कि फिलहाल चारधाम तीर्थयात्रियों का ऑनलाइन पंजीकरण कराया जा रहा है। 17 अप्रैल से हरिद्वार, ऋषिकेश और विकासनगर में चारधाम तीर्थयात्रियों का ऑफलाइन पंजीकरण भी शुरू किया जाएगा। यात्रा के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी और एनपीआर कैमरे लगाए जा रहे हैं। इससे यात्रियों की संख्या और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। प्रशासन का कहना है कि 31 मार्च तक सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है और सभी विभागों को समयसीमा के अनुसार काम करने के निर्देश दिए गए हैं।यात्रियों की सुविधा के लिए इस बार भी मोबाइल मैसेज के जरिए रूट डायवर्जन और खराब मौसम की जानकारी भेजी जाएगी। यह व्यवस्था पिछले वर्ष भी लागू की गई थी और काफी प्रभावी साबित हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक इस साल चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। प्रत्येक जिले की पुलिस अपने स्तर पर अलग-अलग रणनीति बनाएगी। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक भीड़ हो जाती है तो बाहर से आने वाले यात्रियों को हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश जैसे स्थानों पर अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। इन जगहों पर उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी।भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी तैयार की है। सभी धामों की क्षमता और यात्रियों की संख्या का वैज्ञानिक अध्ययन कर यात्रा के संचालन और पंजीकरण की प्रक्रिया तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने या मार्ग बदलने का विकल्प भी रखा गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर आने वाले भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की भी पहचान कर ली गई है। पिछले साल 58 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए थे और हाल की प्राकृतिक आपदाओं के बाद कुछ नए संवेदनशील क्षेत्र भी सामने आए हैं। इन सभी स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए जेसीबी मशीनें भी उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी, एनएच और बीआरओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

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