डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के ऐसे एकमात्र नेता हैं, जो 25 वर्षों से सरकार के प्रमुख के तौर पर जनता द्वारा चुने जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके काम में एक दिन के लिए भी रुकावट नहीं आई। मोदी ने लगभग 12.5 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया और उसके बाद देश के प्रधानमंत्री बने। यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं है बल्कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह लोगों का भरोसा जीता और काम किया, उसकी देश की जनता सराहना करती है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े हैं। विपक्ष की आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि जो लोग शोर मचाना चाहते हैं, वे शोर मचाते रहें, लेकिन ‘हाथी अपनी चाल से चलता है।’उत्तर प्रदेश के लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ता हर गांव, हर मोहल्ले और हर वार्ड तक जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य और देशभर में लोगों तक पहुंचकर प्रधानमंत्री की कल्याणकारी योजनाओं और उनसे आम लोगों को मिले भाजपा विधायक ने इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन सुना है। सभी कार्यकर्ता विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने की दिशा में पूरी ताकत के साथ काम करेंगे। झारखंड की राजधानी रांची में भाजपा विधायक ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन को उपलब्धियों से भरा बताया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान नरेंद्र मोदी ने राज्य में व्यापक बदलाव किए और विकास का एक मॉडल स्थापित किया। सीपी सिंह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के रूप में पिछले करीब 12 वर्षों में मोदी ने दुनिया में भारत के सम्मान और स्वाभिमान को बढ़ाने का काम किया है।वहीं, मुंबई में शिवसेना नेता शायना एनसी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में सत्ता में है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं, उन राज्यों में भी संबंधित प्रक्रियाओं के दौरान कांग्रेस की ओर से ऐसी आपत्तियां नहीं उठाई गई थीं।शायना एनसी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक आठ सेकंड की वीडियो क्लिप के मुद्दे को लेकर कई घंटे तक राजनीति की। उन्होंने कहा कि सरकार ने एसआईआर की प्रक्रिया के जरिए वास्तविक मतदाताओं के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय तक काम किया है। यही राजनीतिक जनसंपर्क (पीआर) और सुशासन के बीच का अंतर है। 2014 से 2026 तक के राजनीतिक युग में देश इन मुद्दों से आगे बढ़कर प्रदर्शन की राजनीति की ओर अग्रसर हुआ है। 12 वर्षों में पहली बार, जनता ने एक मजबूत विदेश नीति देखी है। चाहे हमारी रक्षा नीति हो या विदेश नीति, मार्गदर्शक सिद्धांत ‘भारत पहले’ है।”उन्होंने आगे कहा कि भारत के हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं। हम “कमजोर पांच” अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने से लेकर शीर्ष पांच में स्थान पाने तक का सफर तय कर चुके हैं। हालिया पहली तिमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर के साथ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार भारतीय भाषाओं को उचित मान्यता मिलनी शुरू हो गई है। इसके अलावा, अब एक मजबूत नीति लागू है जिसके तहत भारतीय सैनिकों या नागरिकों के आतंकवादी साजिशों या हमलों का शिकार होने पर मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है। हमने अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति जैसे तीन लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान करके पूरी दुनिया को यह साबित कर दिया है, जिन्होंने लगभग पांच दशकों तक देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाला था। 7 अक्तूबर 2026 को श्री नरेंद्र मोदी एक सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं। यह सार्वजनिक जीवन की ऐसी यात्रा है, जिसकी शुरुआत 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से हुई और 2014 में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ी। यह उपलब्धि केवल इसकी लंबी अवधि के कारण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह दौर है, जिसमें भारत ने आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा है। सार्वजनिक जीवन में एक चौथाई सदी का यह पड़ाव व्यक्तिगत कार्यक्रमों या राजनीतिक उपलब्धियों से आगे बढ़कर देश में हुए व्यापक परिवर्तन को देखने और समझने का अवसर प्रदान करता है।2014 के बाद मोदी सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे, वित्तीय समावेशन, विनिर्माण, सामाजिक कल्याण और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भागीदारी पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है। समर्थक इस अवधि को तेज गति से हुए राष्ट्र-निर्माण का दौर बताते हैं, जबकि आलोचकों और स्वतंत्र विश्लेषकों ने क्रियान्वयन, संस्थागत प्रक्रियाओं और आर्थिक लाभों के वितरण को लेकर प्रश्न उठाए हैं। इसलिए इस पूरे दौर को समझने के लिए मापनीय बदलावों के साथ-साथ उनसे जुड़े विमर्शों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। इस अवधि की प्रमुख विशेषताओं में से एक ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ का विस्तार रहा है। 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायता की, जिसमें पहचान, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाएं बड़े पैमाने पर संचालित हो सकें। 2026 तक भारत में 144 करोड़ से अधिक आधार पहचानें, 57.71 करोड़ जन धन खाते और तेजी से विस्तारित होता डिजिटल सेवाओं का नेटवर्क मौजूद था।यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) इस परिवर्तन के सबसे स्पष्ट प्रतीकों में से एक बन गया है। वित्त वर्ष 2016-17 में लगभग 2 करोड़ वार्षिक लेन-देन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई लेन-देन 24162 करोड़ से अधिक हो गए। वित्त वर्ष 2025-26 में लेन-देन का मूल्य लगभग 314 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जबकि यूपीआई का विस्तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ। इसका महत्व केवल सुविधा तक सीमित नहीं है। डिजिटल भुगतान ने छोटे व्यवसायों, रेहड़ी-पटरी वालों, उपभोक्ताओं और उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में अधिक आसानी से भाग लेने में मदद की है।डिजिटल परिवर्तन ने नागरिकों और सरकार के बीच संबंधों को भी बदला है। DigiLocker, UMANG, कॉमन सर्विस सेंटर और भारतनेट जैसे प्लेटफॉर्मों ने सरकारी तथा आवश्यक सेवाओं तक पहुंच का विस्तार किया है। 2026 तक भारतनेट के अंतर्गत 2.21 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सेवा प्रदान करने के लिए तैयार किया जा चुका था, जबकि देशभर में पांच लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा रहे थे। ‘बुनियादी ढांचा’ भी इस अवधि का एक प्रमुख स्तंभ रहा है। पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत ने सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, जलमार्गों, आवास, ऊर्जा और शहरी परिवहन में निवेश को तेज किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग रुपए 2 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में रुपए 12.2 लाख करोड़ हो गया। रेलवे विद्युतीकरण, मेट्रो विस्तार और एकीकृत लॉजिस्टिक्स योजना इस निवेश के साथ आगे बढ़े हैं। मार्च 2026 तक भारतीय रेल नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका था, जबकि देश का मेट्रो नेटवर्क 1,155 किलोमीटर से अधिक हो गया था।
इस बुनियादी ढांचा विस्तार के साथ विनिर्माण और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया गया है। ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और व्यापक ‘आत्मनिर्भर भारत’ ढांचे के माध्यम से घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार से लेकर फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा तक विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया है। व्यापक उद्देश्य भारत को मुख्यतः एक बड़े उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़ाकर एक प्रमुख उत्पादक और निर्यातक के रूप में स्थापित करना रहा है। हालांकि, सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की कहानी को केवल उपलब्धियों की सूची तक सीमित नहीं किया जा सकता। इस अवधि में भारत की यात्रा रोजगार, असमानता, कृषि संकट, केंद्र-राज्य संबंधों, संस्थागत स्वायत्तता, सामाजिक समरसता और सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों से भी जुड़ी रही है। भारत के आर्थिक विस्तार ने महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना कि आर्थिक विकास पर्याप्त उत्पादक रोजगार पैदा करे और समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे, अभी भी एक सतत चुनौती है। ये विमर्श शासन की किसी भी लंबी अवधि का मूल्यांकन करने का अभिन्न हिस्सा हैं।
इसलिए 25 वर्षों का यह पड़ाव जिस बात को विशेष बनाता है, वह है परिवर्तन के प्रयास का व्यापक पैमाना। गुजरात के राज्य प्रशासन से लेकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक, नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन भारत के उस संक्रमण के साथ जुड़ा रहा है, जिसमें देश एक बड़े पैमाने पर पारंपरिक अर्थव्यवस्था से दुनिया के सबसे अधिक डिजिटल रूप से जुड़े समाजों में से एक की ओर बढ़ा है। देश के भौतिक बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है, इसकी डिजिटल प्रणालियों को वैश्विक पहचान मिली है और इसकी महत्वाकांक्षाएं घरेलू विकास से आगे बढ़कर वैश्विक प्रभाव की दिशा में बढ़ीहैं।भारत के लिए अगला अध्याय इस बात से निर्धारित होगा कि ये आधार उत्पादकता, रोजगार, मानव विकास और जीवन स्तर में निरंतर सुधार में कितनी प्रभावी रूप से परिवर्तित होते हैं। ‘विकसित भारत 2047’ का राष्ट्रीय लक्ष्य इस चुनौती को एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण के भीतर रखता है।
इस प्रकार सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक पड़ाव नहीं है। यह बदलते भारत पर विचार करने का भी एक अवसर है -एक ऐसा भारत जिसने नए राजमार्ग और डिजिटल नेटवर्क बनाए हैं, बैंकिंग और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच का विस्तार किया है, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी को अपनाया है और विश्व में अपनी बड़ी भूमिका की दिशा में प्रयास किया है।
नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के इस 25 वर्ष के सफर का महत्व अंततः यात्रा के पैमाने और उससे उत्पन्न हुई आकांक्षाओं के पैमाने में निहित है। इस यात्रा का अगला मापदंड यह होगा कि आज की संस्थाओं, बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए अवसर, समृद्धि और बेहतर जीवन स्तर में कितनी प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है। और 2047 के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कैसे देश के हर एक नागरिक के जीवन को जोड़ा जा सकता है।। उत्तराखंड में लगभग 300 सार्वजनिक स्थानों पर नाट्य मंचन होगा। इसमें सभी विधानसभाओं के स्कूल, कॉलेज, सामुदायिक भवन और पंचायत भवन शामिल हैं। भाजपा मुख्यालय में प्रदेश संयोजक और युवा मोर्चा प्रदेश महामंत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नाट्य प्रस्तुति प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की सार्वजनिक जीवन यात्रा को जीवंत करेगी। इसमें राष्ट्र सेवा, जनकल्याण के प्रयास और सुशासन से आए व्यापक बदलाव दिखाए जाएंगे। इस अभियान का लक्ष्य राज्यभर में 250 से 300 तक नाट्य मंचन करना है। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














