• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड की जीवन शैली का प्रतिबिम्ब, प्रकृति के साथ बेहतरीन संतुलन बनाता लोकप्रिय त्योहार हरेला

15/07/21
in अवर्गीकृत
Reading Time: 1min read
229
SHARES
286
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

राजीव थपलियाल  (प्रधानाध्यापक रा.प्रा.वि. मठाली) 

हम सभी लोग भली-भांति जानते हैं कि हरेला सिर्फ एक त्योहार न होकर उत्तराखंड की जीवनशैली का शानदार प्रतिबिंब है। यह प्रकृति के साथ बहुत ही बेहतरीन संतुलन बनाने वाला त्योहार है। प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन हमेशा से ही हमारे पहाड़ की परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। यह बात तो बिल्कुल सत्य है कि, हरियाली इंसान को बहुत खुशी प्रदान करती है। सर्वत्र हरियाली को देखकर तो किसी भी इंसान का तन-मन प्रफुल्लित हो जाता है।

हरेला के इस त्योहार में लोग अपने घर के हरेला (समृद्धि) को अपने आप तक ही सीमित नहीं रखते हैं बल्कि, उसे दूसरे लोगों को बांटते हुए आनंद की अनुभूति महसूस करते हैं। यह विशुद्ध रूप से सामाजिक सद्भभाव और प्रेम की अवधारणा है। हरेला के त्योहार में भौतिकवादी चीज़ों की जगह मानवीय गुणों को वरीयता दी जाती है,क्योंकि मानवीय गुण हमेशा इंसान के साथ रहते हैं जबकि भौतिकवादी चीज़ें नष्ट हो जाती हैं।

आज कुछ पहलुओं पर यदि दृष्टि डाली जाय तो हम महसूस करते हैं कि, प्रकृति और मानव को परस्पर विरोधी के तौर पर देखा जाता है वहीं, यह हरेला का त्योहार मानव जाति को प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाने की सीख देता है। हरेला पर्व हरियाली और वसुन्धरा पर जीवन को बचाने का संदेश देता है। हम सभी लोगों को यह समझना होगा और अपनी आने वाली पीढ़ी को भी यह समझाना होगा  कि, हरियाली के बचे रहने से मनुष्यों, जीव-जंतु  तथा पक्षियों का जीवन भी बचा रहेगा।

यहां पर यह कहना समीचीन होगा कि यह पर्व प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन को खासा अहमियत देता है। बहुत सारी खूबियों को अपने दामन में समेटता हुआ यह त्यौहार हम सभी लोगों को बहुत सारी सीख देते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। हरेला पारिवारिक एकजुटता का पर्व भी है। संयुक्त परिवार चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो उसमें हरेला एक ही जगह बोया जाता है।

आसपड़ोस और रिश्तेदारों के साथ ही परिवार के हर सदस्य चाहे वह घर से कितना भी दूर क्यों न हो उनको ‘हरेला’ जरूर भेजा जाता है। यह त्योहार संयुक्त परिवार की व्यवस्था पर भी खूब जोर देता है। संपत्ति के बंटवारे और विभाजन के बाद ही एक घर में दो भाई अलग-अलग हरेला बो सकते हैं।हरेला का पर्व ऋतु परिवर्तन का सूचक भी होता है।समग्रता में यदि देखा जाय तो सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक महत्व के इस पर्व में हरेला को दसवें दिन काटा जाता है।

वैशाखी और होली की तरह ही यह एक कृषि प्रधान त्योहार है। हरेला से नौ दिन पहले घर में स्थित पूजास्थल पर छोटी-छोटी डलियों में मिट्टी डालकर सात बीजों को बोया जाता है। इसमें- गेंहू, जौ और मक्के के दाने प्रमुख होते हैं। हर दिन जल डालकर इन बीजों को सींचा जाता है ताकि ये नौ दिन में लहलहा उठें। घर की महिलाएं या बड़े बुजुर्ग इसकी हल्की-फुल्की गुड़ाई भी करते हैं। इसके बाद इसे काटकर विधिवत्  पूजा-अर्चना कर श्रद्धा पूर्वक देवी-देवताओं को चढ़ाया जाता है और फिर परिवार के सभी लोग हरेले के पत्तों को सिर और कान पर रखते हैं।

हरेले के पत्तों को सिर और कान पर रखने के दौरान घर के बड़े बुजुर्ग, आकाश के समान ऊंचा, धरती के समान विशाल और दूब के समान विस्तार करने का आशीर्वाद सभी को देते हैं। इस दौरान कुछ रीति-रिवाज, रश्में, आशीष गीत-संगीत जैसे- ‘जी रया जागि रया, आकाश जस उच्च, धरती जस चाकव है जया, स्यावै क जस बुद्धि, सूरज जस तराण है जौ..’। आदि स्वस्थ मनोरंजन हेतु किया जाता है। हरेला निर्विवाद रूप से एक कृषि प्रधान त्योहार है।

इसमें जो बीज डाले जाते हैं वो सीजन में होने वाले अन्न के प्रतीक होते हैं। इन बीजों को धन-धान्य और समृद्धि के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। ‘जी रे जाग रे’ के रूप में जो भी कामनाएं की जाती हैं उनसे सभी का मन खुश हो जाता है। आकाश के समान ऊंचा, धरती के समान विशाल और दूब के समान विस्तार का आशीर्वाद हमें सीधे तौर पर प्रकृति के साथ जोड़ता है, यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। हरेला का त्योहार प्रकृति से बहुत कुछ सीखने और उसके जैसे बनने के लिए समूची मानव जाति को प्रेरित करता है।

Share92SendTweet57
Previous Post

कुनियाली अस्पताल पर लटका ताला, कब सुधरेंगे पहाड़ों के हालात?

Next Post

ब्लाक प्रमुख प्रदीप थपलियाल ने महिला मंगलदलो व युवक मंगल दलो को बांटी सामग्री

Related Posts

अवर्गीकृत

शशिधर भट्ट राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन

November 7, 2025
46
अवर्गीकृत

श्री आदि बद्री मंदिर के कपाट मकर संक्रांति के पर्व पर खुले

January 14, 2025
70
अवर्गीकृत

नियमों का पालन न करने पर राजस्व विभाग व परिवहन विभाग के संयुक्त चैकिंग अभियान में 28 लोगों के किए गए चालान

July 13, 2024
281
अवर्गीकृत

उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा 10% क्षैतिज आरक्षण विधेयक की मांग

March 16, 2024
184
अवर्गीकृत

चौपाल  लगाकर महिलाओं को शत प्रतिशत मतदान के लिए किया प्रेरित

February 20, 2024
141
अवर्गीकृत

भुवनेश्वरी महिला आश्रम के पूर्व सचिव सिरिल आर रेफियल की दूसरी पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

June 13, 2023
249

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67694 shares
    Share 27078 Tweet 16924
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45780 shares
    Share 18312 Tweet 11445
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38058 shares
    Share 15223 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37446 shares
    Share 14978 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37332 shares
    Share 14933 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भुवन चंद्र खण्डूडी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

June 5, 2026

डोईवाला: विश्व पर्यावरण दिवस पर एसडीआरएफ का हरित संकल्प

June 5, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.