• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

ग्लेशियर जैसे जनाधारित जल-संसाधनों पर रोडमैप नहीं हुआ है प्रस्तुत

21/11/22
in उत्तराखंड, देहरादून
53
SHARES
66
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
प्राचीन काल में अधिकांश सभ्यताओं का उदय नदियों के तट पर हुआ है, जो इस बात को इंगित करता है कि जल जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिये अनिवार्य ही नहीं, बल्कि महत्त्वपूर्ण संसाधन भी रहा है। विगत कई दशकों में तीव्र नगरीकरण, आबादी में निरंतर बढ़ोतरी, पेयजल आपूर्ति तथा सिंचाई हेतु जल की मांग में वृद्धि के साथ ही औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार इत्यादि ने जल.संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। एक ओर जल की बढ़ती मांग की आपूर्ति हेतु सतही एवं भूमिगत जल के अनियंत्रित दोहन से भूजल स्तर में गिरावट होती जा रही है, तो दूसरी ओर प्रदूषकों की बढ़ती मात्रा से जल की गुणवत्ता एवं उपयोगिता में कमी आती जा रही है। अनियमित वर्षा, सूखा एवं बाढ़ जैसी आपदाओं ने भूमिगत जल पुनर्भरण को अत्यधिक प्रभावित किया है।

दरअसल उत्तराखण्ड के असली मुद्दे यही हैं। इन बातों का किसी भी राजनीतिक पार्टी ने अपने घोषण पत्रए संकल्प पत्र व दृष्टि पत्र में जिक्र तक नहीं किया।आज लोग जानना चाह रहे हैं कि स्कूल की बिल्डिंग बनेगी तो क्या बिन पानी केघ् या कोई भी ढाँचागत विकास होगा तो क्या बिन पानी के या राज्य में जल विद्युत परियोजनाएँ बनेंगी तो क्या बिन पानी के यह सवाल इसलिये खड़े हो रहे हैं कि उत्तराखण्ड सरकार ने ही पिछले वर्ष एक सर्वेक्षण करवाया था कि उत्तराखण्ड में कितने जलस्रोत हैं। सर्वेक्षण से मालूम हुआ कि राज्य के 75 प्रतिशत जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं।

50 फीसदी जलस्रोत मौसमी हो चले है इसी तरह इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट बताती है कि राज्य के अधिकांश जलस्रोत वनाग्नी की वजह से सूख रहे हैं या वे अपना रास्ता बदल रहे हैं। यही नहीं रिपोर्ट यह भी इशारा कर रही है कि राज्य में जैवविविधता घटने से इन प्राकृतिक जलस्रोतों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। एक तरफ ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ राज्य में आपदा की सम्भावनाएँ बढ़ रही हैं। ज्ञात हो कि ऐसे तमाम जनाधारित मुद्दों पर ये राजनीतिक पार्टियाँ अपने घोषणा पत्रों में जगह नहीं बना पाये।ताज्जुब तो तब होती है जब ये राजनीतिक पार्टियाँ हर वर्ष आपदा के बजट के साथ अखबार बयानबाजी करते नजर आते हैं। हाल में उन्हें चाहिए था कि वे अपने घोषणा पत्र में आपदा के न्यूनीकरण की बात करतेए जल संरक्षण की बात करतेए जंगल और जमीन को सरसब्ज करने की बात करते। बजाय इनके घोषणा पत्र उल्टे राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण नहीं विदोहन की बात जरूर करता है।

घोषण पत्रों के अध्ययन करने से पता चलाता है कि ये पार्टियाँ जो भी विकास का रोडमैप लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं उनके अनुसार सम्भावित उम्मीदवार को वोट ही नहीं मिल रहे हैं।यदि सार्वजनिक स्थानों पर उन्हें वक्तव्य देना होता है तो वे अपने प्रतिद्वंदी को खरी.खोटी सुनाते हुए दिखाई देते हैं। लोग उम्मीदवारों से जानना चाह रहे हैं कि उनके गाँव में आपदा का खतरा बना हुआ है। उनके गाँव के प्राकृतिक जलस्रोत सूख गए हैं। उनके संवर्धन के लिये वे जीतकर क्या करने वाले हैं। ऐसे अनसुलझे सवाल आज भी खड़े हैं।कुल मिलाकर उत्तराखण्ड राज्य की जो कल्पना थी सो अब मौजूदा राजनीतिक पार्टियों ने एक दूसरे को हराने के लिये समाप्त करा दी है। मौजूदा राजनीतिक पार्टियों के पास जलए जंगलए जमीन के संरक्षण व दोहन की कोई स्पष्ट नीति इस दौरान के चुनाव में नहीं दिखाई दी है।

सभी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, विद्युत, दूरसंचार, महिला उद्यमिता, कौशल विकास, बाँध आदि.आदि विषयों को विकास का मॉडल बताया और इन विषयों पर खरा उतरने का वे लोगों से वायदे कर रहे हैं। लोगों की प्यास कैसे बुझेगीए बाँध के लिये पानी कहाँ से आएगाघ् क्योंकि नदियाँ साल.दर.साल सूख रही हैंए ग्लेशियर लगातार तेजी से पिघल रहे हैं जैसे संवेदनशील सवालों पर किसी भी राजनीतिक पार्टियों ने कोई रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया है।

वास्तव में हमने जल संरक्षण के अपने पारंपरिक तौर.तरीकों को भुला दिया है। गांवों.देहातों में आज भी यह कहावत प्रचलित है, ऊपर का जल ऊपर के लिए और नीचे का जल पीने के लिए। अर्थात दैनिक नित्यकर्म जैसे कि शौच, स्नान, कपड़े धोने, पशुओं और कृषि कार्य हेतु वर्षा के जल का उपयोग किया जाता था और खाना बनाने और पीने के लिए भूमिगत जल का, जो कुओं से निकाला जाता था। वर्षा जल के संग्रह के लिए बावड़ी, तालाब आदि थे, जिनकी देखभाल की जबावदेही सभी की थी। हिमालय से निकलने वाली नदियों में भी साल भर शुद्ध जल का प्रवाह पर्याप्त मात्रा में रहता था।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, डोकरियानी, बंदरपूंछ ग्लेशियर के अलावा चमोली जिले में द्रोणगिरी, हिपरावमक, बद्रीनाथ, सतोपंथ और भागीरथी ग्लेशियर स्थित है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ धाम के पीछे स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर, खतलिंग व केदार ग्लेशियर अति संवेदनशील हैं। जहां तक कुमायूं क्षेत्र में कुछ प्रमुख ग्लेशियरों का सवाल है तो पिथौरागढ़ में मिलम ग्लेशियर, काली, नरमिक, हीरामणी, सोना, पिनौरा, रालम, पोंटिंग व मेओला जैसे ग्लेशियर प्रमुख हैं। वहीं बागेश्वर क्षेत्र में सुंदरढुंगा, सुखराम, पिंडारी, कपनी व मैकतोली जैसे कुछ प्रमुुख ग्लेशियर हैं। उत्तराखंड में गंगोत्री ग्लेशियर सबसे बड़ा है। यह चार हिमनदों रतनवन, चतुरंगी स्वच्छंद और कैलाश से मिलकर बना है। गंगोत्री ग्लेशियर 30 किलोमीटर लंबा और दो किलोमीटर चौड़ा है। हालिया शोध में यह बात सामने आई है कि गंगोत्री ग्लेशियर पर्यावरण में आए बदलाव के चलते हर साल 22 मीटर पीछे खिसक रहा है।जहां तक सब दूसरे सबसे बड़े ग्लेशियर का सवाल है तो पिंडारी ग्लेशियर 30 किमीमीटर लंबा और 400 चौड़ा है। यह ग्लेशियर त्रिशूलए नंदा देवी और नंदाकोट पर्वतों के बीच स्थित है। पर्यावरणीय बदलाव की वजह से फिलहाल हर साल ये ग्लेशियर कई मीटर तक पीछे खिसक रहे हैं। अतिसंवेदनशील ग्लेशियरों के टूटनेए एकाएक पिघलने से उत्तर भारत में भयावह बाढ़ और तबाही की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

Share21SendTweet13
Previous Post

डोईवाला : रामपुरी चाकू के साथ अभियुक्त गिरफ्तार

Next Post

उर्गम में बड़े सड़क हादसे के बाद सहमे हुए हैं क्षेत्रवासी

Related Posts

उत्तराखंड

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में फार्मासिस्टों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : ऋतु खंडूरी भूषण

April 4, 2026
14
उत्तराखंड

उपनल के माध्यम से कार्ययोजित आउटसोर्स कार्मिकों के लिए अहितकारी बातें और उनके भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

April 3, 2026
76
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने जुगमन्दर हॉल के नवीनीकरण कार्य का किया लोकार्पण

April 3, 2026
5
उत्तराखंड

समृद्ध राष्ट्र के लिए ‘संस्कार युक्त, नशामुक्त युवा’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

April 3, 2026
49
उत्तराखंड

देहरादून में गैस सिलेंडर संकट से फ़ूड बिज़नेस ऑपरेटर्स व्यवसाय प्रभावित: एसडीसी फाउंडेशन के रैपिड सर्वे में खुलासा

April 2, 2026
13
उत्तराखंड

प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार – मुख्यमंत्री

April 2, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67667 shares
    Share 27067 Tweet 16917
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38050 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37326 shares
    Share 14930 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में फार्मासिस्टों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : ऋतु खंडूरी भूषण

April 4, 2026

उपनल के माध्यम से कार्ययोजित आउटसोर्स कार्मिकों के लिए अहितकारी बातें और उनके भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

April 3, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.