सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
वैसे तो एसडीआरएफ उत्तराखण्ड किसी भी परिचय की मोहताज नहीं है, फिर भी यहां पर एक ऐसी घटना का जिक्र किया जाना जरूरी हो जाता है, हुआ यूं कि, हमेशा की तरह जनपद रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में व्यवस्थित एसडीआरएफ उत्तराखण्ड की टीम निरीक्षक अनिरुद्ध भण्डारी के नेतृत्व में सर्च रेस्क्यू अभ्यास हेतु क्षेत्र भ्रमण पर गयी हुई थी।
शिवानन्दी के पास पहुंचने पर एसडीआरएफ टीम द्वारा देखा गया कि, एक गौवंश (बछड़ा) जो कि, सड़क किनारे असहाय स्थिति में लेटा पड़ा था, उसके पास जाने पर ज्ञात हुआ कि, यह बछड़ा कहीं सड़क पर किये जा रहे कोलतार युक्त डामर में सम्भवतया गिर गया था, जिस कारण इसका पूरा शरीर कोलतार (डामर) से सना हुआ था। इस कारण से यह अपने स्थान से हिल डुल भी नहीं पा रहा था। एसडीआरएफ टीम द्वारा बछड़े के शरीर से कोलतार निकालने का प्रयास किया गया, जो कि, बछड़े के लिए भी पीड़ादायक साबित हो रहा था। इस पर उनके द्वारा निकटवर्ती स्थानीय बाजार से थिनर (कोलतार को हटाने में सहायक द्रव) की व्यवस्था करते हुए बछड़े के शरीर से कोलतार को पूरी तरह हटाया गया।
तत्पश्चात आस-पास पड़े पुराने कपड़े व नजदीकी पानी के स्त्रोत के साफ पानी से बछड़े के पूरे शरीर को साफ किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में तकरीबन एक से डेढ़ घण्टे का समय लगा। बछडे के शरीर से कोलतार (डामर) हट जाने से बछड़ा पूरी तरह से चलने फिरने मे समर्थ हो गया तथा एसडीआरएफ टीम द्वारा उसे निकटवर्ती घास वाले क्षेत्र में छोड़ा गया तथा यह अवलोकन भी किया गया कि, क्या वह घास खाने में असमर्थ तो नहीं? काफी देर तक दूर से देखे जाने पर पाया कि, वह बछड़ा अब स्वच्छन्द भाव से घास चरने लगा था, यानि अब वह अपने आप को स्वस्थ महसूस कर रहा था। इस सम्पूर्ण रेस्क्यू अभियान अवधि में एसडीआरएफ टीम के साथ जनपद रुद्रप्रयाग में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस उपाधीक्षक स्वप्निल मुयाल भी साथ में रहे।










