डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
डॉ. शिवानंद नौटियाल पौड़ी से दो बार और कर्णप्रयाग से छह बार विधायक रहे। शिक्षा, साहित्य और राजनीति के क्षेत्र में विख्यात नौटियाल का जन्म 26 जून 1926 को पौड़ी जिले के कोटला गांव में हुआ था। 1967 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। 1979 में वे विधायक चुने गए। डॉ . नौटियाल को पौड़ी सीट से दो बार और कर्णप्रयाग सीट से छह बार विधायक बनने का अवसर मिला।1979 में, डॉ. नौटियाल को उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा और पहाड़ी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पूरे उत्तराखंड क्षेत्र में स्कूलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्कूलों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।नौतियाल एक कुशल राजनीतिज्ञ , प्रतिभाशाली वक्ता और सफल लेखक थे। गढ़वाल के लोक नृत्य और गीतों पर उनका शोध प्रबंध उनकी अमूल्य देन रहेगा। इसमें गढ़वाली लोककथाओं के सभी रूपों का विस्तृत वर्णन किया गया है। गढ़वाली लोकमानस, गढ़वाल के नृत्य, गढ़वाल के लोकगीत, गढ़वाल के खुदेड़ गीत, गढ़वाल के नृत्य गीत, छम घुंघरू बाजला, नेफा की लोककथाएँ, कुमाऊं दर्शन, बद्री केदार और उनके सर्वश्रेष्ठ शोध कार्य उनकी विशाल रचनाएँ हैं। नौतियाल को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।वे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे। वर्ष 2004 में निमोनिया के कारण उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, 1979 में डॉ. नौटियाल को उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा एवं पर्वतीय विकास मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। इन्होंने अपने मंत्रित्वकाल में संपूर्ण उत्तराखंड क्षेत्र में विद्यालयों को प्रोन्नत करने के साथ साथ विद्यालयों की स्थापना में महती भूमिका निभाई ।नौटियाल जी एक कुशल राजनीतिज्ञ, औजस्वी वक्ता के साथ सफल साहित्यकार भी थे। इनका शोध पत्रबंध- गढ़वाल के लोकनृत्य गीत है। इसमें गढ़वाली लोकसाहित्य के सभी रूपों को विस्तार से वर्णित किया गया है। गढ़वाली लोकमानस, गढ़वाल के नृत्य, गढ़वाल के लोकगीत, गढ़वाल के खुदेड़ गीत, गढ़वाल के नृत्य गीत, छम घुंघरू बाजला, नेफा की लोककथाएं, कुमाऊं दर्शन, बदरी केदार की ओर इनकी श्रेष्ठ शोधात्मक रचनाएं हैं। नौटियाल को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी नामित पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। जहाँ 2 अप्रैल, 2004 को उनका निधन हो गया। पहाड़ी क्षेत्रों में विकास की एक मजबूत बुनियाद स्थापित की। कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पेयजल, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर उन्होंने हमेशा मिशन के रूप में कार्य किया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। यही वजह है कि वे आज भी आमजन के बीच लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते हैं। देवी देवताओं की पूजा-अर्चना की बात तो आपने सुनी होगी मगर पौड़ी जनपद में एक गांव ऐसा भी है, जहां लोग आज भी देवी देवताओं के साथ-साथ अपने चहेते मंत्री भी को पूजते हैं. शहर से करीब 55 किमी की दूरी पर पाबौ ब्लॉक का कोठला गांव के लोग आज भी अपने चहेते मंत्री और अविभाजित उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा मंत्री और क्षेत्रीय विधायक स्व. डॉ. शिवानन्द नौटियाल की मूर्ति को ईश्वर का दर्जा देते हैं.ग्रामीणों ने स्व. डॉ. शिवानन्द नौटियाल की मूर्ति की स्थापना कर प्राण प्रतिष्ठा की. इस मौके पर ग्रामीणों ने गांव के पौराणिक मंदिर में सभी देवी-देवताओं के साथ उनकी मूर्ति की विधिवत रूप से पूजा अर्चना की. ग्राम सभा सैंजी के कोठला मंदिर में नौटियाल परिवार की ओर से नई मूर्तियों के साथ भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई. आचार्य पंडित ने कोठला मंदिर में विधिविधान से मूर्तियों को प्रतिष्ठापित कराया. वह लगातार राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे। वर्ष 2004 में निमोनिया होने के कारण उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां दो अप्रैल 2004 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दिवंगत डॉ. शिवानंद नौटियाल ने अपने जीवनकाल में यूं तो अनेक कार्य किए, लेकिन उन्हें समाज आज भी शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद करता है। इसका लाभ युवा पीढ़ी को युगों-युगों तक मिलता रहेगा। डॉ. शिवानंद ने 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। नौटियाल ने बताया कि वह विधान सभा पौड़ी से दो और कर्णप्रयाग सीट से छह बार विधायक रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा पहाड़ की पीड़ा को आत्मसात करते हुए समस्याओं के समाधान करने का काम किया। स्व. डॉ. नौटियाल को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.












