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‘जय कपीस तिहूं लोक उजागर’

हनुमान जी की अनन्त शक्तियों के कायल भक्त

02/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
रामनगर को अब बाघों के दीदार के साथ ही धार्मिक स्थल के रूप में भी पहचान मिल रही है। रामनगर के ग्राम छोई में स्थित हनुमान धाम श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना है। यहा हर दिन लगभग चार से पांच हज़ार श्रद्धालु भगवान हनुमान के अलग-अलग 21 दिव्य स्वरूपों दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वर्ष 2011 में भारत के पांचवें धाम के रूप में रामनगर के ग्राम छोई में करीब पांच एकड़ भूमि पर हनुमान धाम की नीव रखी गई थी। यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है। जहां हनुमान जी के नौ स्वरूप और 12 लीलाओं यानी उनके कुल 21 स्वरूप स्थापित किए गए हैं।धाम की इन विशेषताओं के चलते यहां साल दर साल श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में हनुमान जी के दर्शन करने हर दिन चार से पांच हज़ार श्रद्धालु पहुंचते हैं। जैसा कि हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध चौपाई कहती है… ‘जय कपीस तिहूं लोक उजागर’ यानी हे वानरराज ! आपकी महिमा तीनों लोकों में उजागर है। उसी तरह रामनगर के पास छोई में स्थित हनुमान धाम श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बन चुके हैं। प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर के बाद हनुमान धाम ने रामनगर को धार्मिक स्थल के रूप में नई पहचान दी है। इसके चलते दोनों पर्यटन स्थलों के आसपास धार्मिक पर्यटक के लिए होटल और रिजॉर्ट का भी निर्माण कराया गया है। इसके चलते हजारों लोगों को कारोबार मिला है।प्रदेश भर के प्रमुख मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए सरकार ने मानस खंड योजना की शुरुआत की है। रामनगर के हनुमान धाम और गर्जिया देवी मंदिर को इस योजना के अंतर्गत चयनित किया गया है। इससे दोनों धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और बेहतर तरीके से हो सकेगा।हनुमान धाम ने आज प्रदेश के साथ ही दुनिया भर में प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। दो अप्रैल को होने वाले हनुमान जयंती के कार्यक्रम के लिए हनुमान धाम में विशेष तैयारियां की गई हैं। हनुमान धाम रामनगर में शांत और सुरम्य वातावरण के बीच स्थित है। रामनगर जिले में यह एक दर्शनीय स्थल है और यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। मंदिर की वास्तुकला भीतरी और बाहरी दोनों ओर से बेहद खूबसूरत है। इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल का मेहराबदार प्रवेश द्वार दो मछलियों का चित्रण करता है, जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक हैं। अलंकृत स्तंभों पर बना यह द्वार एक भव्य छतरी जैसा दिखता है। हनुमान धाम में एक बैठक कक्ष, ध्यान कक्ष, दिव्यांगजनों के लिए एक केंद्र और श्री हनुमान का एक भव्य मंदिर है।हिमालय की शांत और भव्य घाटी के बीच स्थित हनुमान धाम आपको आत्मचिंतन के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करता है। इसका नाम सेवा के प्रतीक श्री हनुमान जी के नाम पर रखा गया है। यह हनुमान धाम सेवा और भक्ति का प्रतीक है। सेवा, भक्ति और समर्पण का केंद्र होने के नाते, हनुमान धाम में भक्त पूर्ण स्वास्थ्य और शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते हैं। इस धाम की नींव सेवा और भक्ति के सिद्धांतों पर रखी गई है। दरअसल, यही दो लक्ष्य हनुमान जी के जीवन का भी सार रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनना नहीं है, बल्कि यह समाज को संस्कार और ऊर्जा देने का माध्यम भी है। तभी वहां जाने पर आप महसूस करेंगे कि मंदिर का हर हिस्सा इन आदर्शों को प्रतिबिंबित करता है। हनुमान जी के पास अधिकांश देवों की संयुक्त दिव्य शक्तियां एवं वरदान हैं। भगवान हनुमान को भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्र अवतार माना जाता है और उन्हें शक्ति, ज्ञान और भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि वे अमर हैं और सभी प्रकार की नकारात्मकता और प्रलोभनों को दूर करने की अपार शक्ति रखते हैं। भगवान हनुमान, भगवान राम और सीता के परम भक्त हैं और उन्होंने कभी भी व्यर्थ में अपनी शक्ति या वीरता का प्रदर्शन नहीं किया। इस दिन, भगवान हनुमान की पूजा और प्रार्थना करने से इन गुणों की प्राप्ति होती है।हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यदि आप भगवान राम से अपनी सभी मनोकामनाएं पूरी करवाना चाहते हैं, तो आप केवल भगवान हनुमान के माध्यम से ही उन तक पहुंच सकते हैं और हनुमान जयंती इसके लिए सबसे शुभ दिन है।भगवान हनुमान न केवल भगवान राम के परम भक्त हैं, बल्कि एक दयालु देवता भी हैं जो अपने भक्तों की अच्छी देखभाल करते हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि हनुमान चालीसा का निरंतर पाठ करने से सभी दुखों और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है।सृष्टि के निर्माण में जिस दिव्य तत्व का प्रयोग देवताओं द्वारा किया गया, उसे शास्त्रों में ‘अन्तरिक्ष धूलिमेघ‘ के नाम से जाना गया है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक ‘कॉस्मिक डस्ट’ के नाम से जानते हैं। वेद जिसे अखिल ब्रह्माण्ड की आत्मा शक्ति मानते हैं, उसे ही वर्तमान में वैज्ञानिक ‘सुप्रीम स्प्रिट’ के नाम से जानते हैं। सुप्रीम स्प्रिट हनुमान जी अजर-अमर हैं। हनुमान जी को पवनपुत्र, केसरीनन्दन और शंकरसुवन कहा जाता है। हनुमान जी रुद्र के अंश हैं, वह रुद्र जो समस्त ब्रह्माण्ड का अन्त और लय करते हैं। महादेव की समस्त विभूतियां हनुमान जी की अनुगामिनी हैं।विज्ञान की बात करें तो अखिल ब्रह्माण्ड की एक ‘गैलेक्सी-मिल्की वे’ में सूर्य समस्त ब्रह्माण्ड के सापेक्ष एक अणु समान है। हनुमान जी को सूक्ष्म विज्ञान का ज्ञान था। सूर्य को निगलते समय उन्होंने अतिविशाल रूप धारण कर अपने मुख में ब्रह्माण्ड की अनन्त गहराईयों में उसे खींच लिया। जैसे विज्ञान के अनुसार ब्लैक होल, ‘कृष्ण विवर’ के खिचाव से प्रकाश-सहित कुछ भी नहीं बच पाता है और सब उसी में समाहित हो जाता है, इसी प्रकार हनुमान जी ने भौतिकी की शब्दावली में ब्लैक होल बनाकर सूर्य को लील लिया। जैसे- जैसे विज्ञान तरक्की करता जा रहा है, धार्मिक ग्रंथों में लिखी गई बातें सही साबित होती जा रही हैं। हनुमान जी की अष्टसिद्धियां एवं नवनिधियां सचमुच एक ऐसा रहस्य है जो अपने आप में वैज्ञानिकता को समेटे हुए है। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा हनुमान जन्मोत्सव के दिन भक्त निर्मल मन से राम भक्त हनुमान को हृदय में धारण कर असीम उर्जा का अनुभव करते हैं। जब जामवन्त जी ने हनुमान जी को उनकी शक्तियों के बारे में याद दिलाया तो हनुमान जी ने अपना ध्यान अपने अवचेतन मन में केन्द्रित कर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्तियों का एहसास किया। अवचेतन मन की शक्ति एकत्र हो जाती है तो ब्रह्माण्ड में कुछ भी चमत्कार सम्भव है। जिनका भरोसा है ‘सीताराम’ पर, उनके रक्षक हैं ‘हनुमान’। हनुमान जयंती भगवान शिव के अवतार और भगवान राम के शिष्य हनुमान के जन्म की याद में मनाई जाती है। हनुमान जयंती के दिन, बड़ी संख्या में भक्त सुबह-सुबह प्रार्थना करने के लिए हनुमान मंदिरों में एकत्रित होते हैं। यह हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है और हम इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं। लोग मंत्रों का जाप करते हैं, हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और आरती करते हैं, इस विश्वास के साथ कि वे रामनाम के साक्षात अवतार हैं । वे एक आदर्श निस्वार्थ शिष्य, सच्चे कर्म योगी हैं। वे एक महान भक्त थे और उन्होंने भगवान श्री राम की सेवा शुद्ध प्रेम और भक्ति से की। हर साल, हनुमान जयंती के शुभ दिन, भक्त शुद्ध हृदय से भगवान हनुमान की पूजा करते हैं, कुछ लोग सफल जीवन के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु पूर्ण उपवास रखते हैं लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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