डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। डोईवाला डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने इस बार लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया। लगातार करीब 15 वर्षों से अध्यक्ष पद पर एबीवीपी का कब्जा रहा, लेकिन इस बार संगठन को हार का सामना करना पड़ा। यूएसएफ के मोहित ममगाई ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर एबीवीपी के लंबे वर्चस्व को समाप्त कर दिया।
यूएसएफ ने पहली बार डोईवाला महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में मैदान में उतरते हुए सीधे अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के छात्र संगठन यूएसएफ ने 25 वर्षों बाद पहली बार चुनावी मैदान में उतरते हुए सीधे अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। संगठन के लिए यह चुनावी शुरुआत अहम मानी जा रही है।
आपको बता दे कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहित ममगाई पूर्व में एबीवीपी से जुड़े रहे हैं। चुनाव से कुछ समय पहले उन्होंने एबीवीपी से अलग होकर यूएसएफ का दामन थामा था। उनके यूएसएफ में शामिल होने को चुनावी समीकरणों में बदलाव का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं, एबीवीपी के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व के टूटने को भी छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, मोहित ममगाई की जीत के पीछे उनके पूर्व संगठन से जुड़े अनुभव और लंबे समय से छात्र राजनीति में सक्रियता को भी एक कारण माना जा रहा है। हालांकि, टिकट नहीं मिलने के बाद उनके यूएसएफ में शामिल होने से एबीवीपी के परंपरागत समर्थन आधार पर असर पड़ने की चर्चा चुनाव के दौरान रही।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजकरण शाह ने कहा कि मोहित ममगाई की जीत उनकी करीब चार वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने छात्र राजनीति में लगातार सक्रिय रहकर अपनी पहचान बनाई, जिसका परिणाम उन्हें इस चुनाव में मिला। वही, मोहित मंमगाई ने कहा कि महाविद्यालय और छात्र हित में कार्य करेंगे।
यूएसएफ के संरक्षक डॉ. सौम्य पहाड़ी ने कहा कि संगठन ने लोकतंत्र की पहली सीढ़ी पर कदम रखा है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में मिली जीत से संगठन को आगे काम करने की प्रेरणा मिलेगी। वहीं, आगामी विधानसभा चुनाव में यूकेडी की भूमिका को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी। छात्रसंघ चुनाव में यूएसएफ की जीत के बाद अब डोईवाला की छात्र राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है।











