डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
सरकार एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देकर आजीविका के संसाधनों को मजबूती का दावा कर रही हैं वहीं सरकार के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे हैं। केदार सैचुरी एरिया में रुद्रनाथ तुंगनाथ तथा केदारनाथ का क्षेत्र भी आता है। तुंगनाथ तथा केदारनाथ में तो वन विभाग किसी तरह की कार्रवाई से बच रहा है रुद्रनाथ मार्ग पर तीर्थयात्रियों के लिए खाने पीने का इंतजाम करने वालों को पैदल मार्ग से हटा दिया गया है।इस तरह रुद्रनाथ की यात्रा पर सैंचुरी का ग्रहण लग गया है। तीर्थयात्रियों के सामने इस कदर संकट गहरा गया है कि खड़ी चढाई पर स्थित रुद्रनाथ धाम के लिए तीर्थयात्रियों को बड़ी मुश्किल से यात्रा करनी पड़ती है। अब तो पैदल मार्ग के बीच में खाने पीने और आराम करने का संकट पैदा हो गया है। स्थानीय लोग वन विभाग के इस रवैये से हैरान परेशान हो गए हैं। स्थानीय लोग विगत कई सालों से रुद्रनाथ पैदल मार्ग पर ढाबा संचालित कर अपनी आर्थिकी को मजबूर कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। कहा कि जहां एक ओर सरकार पहाड़ों से पलायन के साथ यात्रा मार्गों पर स्थानीय लोगों को रोजगार की बात कर रहा है वहीं वन विभाग आए दिन बेवजह ढाबा संचालकों को परेशान करते नजर आ रहे हैं।अब विभाग द्वारा कई ढाबों को रुद्रनाथ मार्ग से हटा दिया गया है जिससे उनके सामने रोजी रोटी का संकट भी गहराने लगा है। उन्हाेनें बताया कि अगर इस पर ठोकस कदम न उठाए गए तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ धाम के कपाट बीते दिन श्रद्धालुओं के दर्शनाथ के लिए खोल दिए गए हैं। इसी के साथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढोत्तरी हो रही है। रुद्रनाथ धाम की यात्रा अति दुर्गम होने के चलते तीर्थयात्रियों के सामने चाय,पानी, खाने व रहने का संकट पैदा हो गया है। बीते साल भी वन विभाग ने इसी तरह की कार्रवाई की थी किंतु तब सैचुरी एरिया से कुछ नीचे कच्ची झोपड़ियां और टेंट लगाने की अनुमति दे दी गई थी। इस बार वन विभाग ने कपाट खुलते ही झोपड़ियों और टेंटों को हटा दिया है। इससे इस यात्रा मार्ग पर व्यवसाय करने वालों को पहले ही झटके में खास नुकसान उठाना पड़ गया है। अभी तक धू-धू जलते जंगल की वजह से भारत के हिमालयी क्षेत्र अपने वजूद के लिए संघर्षरत हैं, साथ ही दूसरी तरफ़ जैसे-जैसे पारा चढ़ता जा रहा है,सैलानियों की भीड़ पहाड़ों की ओर रुख कर रही है.?चाहे चारधाम यात्रा में व्यवस्थाओं की बात हो, पेयजल संकट य फिर बिजली कटौती की बात हो लगातार एक महीने से विपक्ष सरकार को जगाने का काम कर रही है लेकिन सरकार सुध नहीं ले रही है। उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर बेताहाशा होती बिजली कटौती और पेयजल संकट को लेकर जवाबदेही किसकी है
लेखक दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।











