डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण चार धाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित कर दी गई है। केदारनाथ और श्रीनगर में हेलिकॉप्टर सेवा भी स्थगित है। बिगड़े मौसम की वजह से शनिवार को गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा सुबह से ही स्थगित थी। दोपहर को मंडलायुक्त ने केदारनाथ व बदरीनाथ सहित चारों धामों की यात्रा दो दिन के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। शनिवार को केदारनाथ के लिए हेली सेवा भी संचालित नहीं हुई। श्रीनगर से भी हेलिकॉप्टर सेवा बाधित रही।चमोली जिले में शनिवार सुबह से निचले क्षेत्रों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी जारी है। बदरीनाथ धाम की ऊंची चोटियों, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, नीती और माणा घाटियों में बर्फबारी हुई है। हेमकुंड साहिब में करीब आधा फीट बर्फ जम गई है, जिससे आस्था पथ पर फिसलन बढ़ गई है। पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने तीर्थयात्रियों को सुरक्षित रास्ता पार कराया। चमोली-रुद्रप्रयाग जिले में ठंड बढ़ गई है। राज्य में बारिश और भूस्खलन के चलते 57 मार्ग बंद है। इसमें अल्मोड़ा में दो, बागेश्वर चार, चमोली आठ, देहरादून आठ और नैनीताल में 11 मार्ग बंद है। पौड़ी तीन, पिथौरागढ़ 11, रुद्रप्रयाग तीन, टिहरी पांच और उत्तरकाशी में दो सड़क बंद है। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बारिश से नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। हरिद्वार में शाम चार बजे गंगा नदी का जल स्तर खतरे के निशान से तीन मीटर नीचे रह गया था। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदी और बागेश्वर में सरयू नदी का जल स्तर भी खतरे के निशान के पास पहुंच गया। उत्तराखंड में मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बाद आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट पर है। आपदा प्रबंधन मंत्री ने बताया कि राज्य और जिला स्तर पर मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है। सभी संबंधित विभागों को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। आपातकालीन परिचालन केंद्रों से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। लगातार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। जिससे पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने राफ्टिंग गतिविधियों पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। देहरादून में मौसम खराब होने से तीन उड़ानें डाइवर्ट की गईं और एक रद्द कर दी गई। बाकियों का समय बदला गया। संवेदनशील क्षेत्रों में फील्ड टीमें सतर्क हैं और राहत-बचाव के लिए संसाधन तैयार हैं। जिलाधिकारियों को स्थानीय स्थिति के अनुसार कदम उठाने और विभागों से समन्वय बनाने को कहा गया है। वहीं सचिव आपदा प्रबंधन ने शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में प्रदेश में जारी बारिश की स्थिति की समीक्षा की। उन्हाेंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों, भूस्खलन संभावित स्थलों, नदी-नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए। बादलों का निर्माण काफी बढ़ गया है। भारी बारिश की संभावना है और इस दौरान यात्रा करना सुरक्षित नहीं होगा,” सुमन ने कहा। उन्होंने पुष्टि की कि यह प्रतिबंध हेमकुंड साहिब जाने वाले मार्गों के साथ-साथ ट्रेकिंग ट्रेल्स पर भी लागू होता है।शनिवार और रविवार को गढ़वाल क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई है। अलर्ट जारी होने के मद्देनजर, गढ़वाल आयुक्त ने शुक्रवार को मंडल के सभी जिला मजिस्ट्रेटों के साथ तीर्थयात्रियों के लिए व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के लिए एक बैठक की।उस बैठक में, अधिकारियों ने शुरू में चार धाम यात्रा को स्थगित न करने का निर्णय लिया। इसके बजाय, उन्होंने योजना बनाई कि यदि भारी बारिश के कारण आगे की यात्रा असुरक्षित हो जाती है, तो तीर्थयात्रियों को निकटतम निर्धारित ठहराव स्थलों पर रोक दिया जाए।मौसम की स्थिति बिगड़ने पर अधिकारियों ने बाद में व्यापक स्तर पर चेतावनी स्थगित करने का निर्णय लिया। इस कदम का उद्देश्य चेतावनी जारी रहने के दौरान तीर्थयात्रियों और पर्वतारोहियों को जोखिम भरे मार्गों से दूर रखना है।अधिकारियों ने कहा कि हालात सामान्य होते ही यात्राएं फिर से शुरू हो जाएंगी। फिलहाल, यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे भारी बारिश के दौरान यात्रा शुरू करने के बजाय मौसम में सुधार की प्रतीक्षा करें। केदारनाथ और बदरीनाथ मार्ग पर हुई भूस्खलन और हिमस्खलन की इन दोनों घटनाओं का प्रमुख कारण बेमौसम बारिश और बर्फबारी को माना जा रहा है। रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार अप्रैल के आखिरी और मई के शुरुआती दिनों में सामान्य से कई गुना ज्यादा बारिश दर्ज की गई।चमोली जिले में अप्रैल में सामान्य से 85 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। यहां अप्रैल में सामान्य तौर पर 47 मिमी बारिश होती है, इस बार 87 मिमी बारिश हुई। रुद्रप्रयाग जिले में अप्रैल में सामान्य रूप से 67.1 मिमी बारिश होती है, इस बार सामान्य से 53 प्रतिशत ज्यादा 105.1 मिमी बारिश दर्ज की गई।मई के शुरुआती तीन दिनों में स्थिति और भी खराब रही। चमोली जिले में मई के पहले 3 दिनों में 26.0 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 150 प्रतिशत ज्यादा है। रुद्रप्रयाग जिले में इन तीन दिनों में सामान्य से 149 प्रतिशत ज्यादा 33.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से लेकर 4 मई तक चमोली जिले में सामान्य से 17 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग में 24 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। खास बात यह है कि यह बारिश कुछ दिनों के भीतर हुई।, इस अवधि में ज्यादातर दिनों दोनों जिलों में सूखे की स्थिति बनी रही। .लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











