देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल ने रैली निकालकर विधानसभा घेराव किया। केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय 10कचहरी रोड देहरादून से प्रिंस चौक, रेसकोर्स चौक, आराघर चौक, धर्मपुर चौक एलआईसी होते हुए विधानसभा के लिए कूच किया। पुलिस प्रशासन द्वारा रिस्पना पुल बेरीकेट मे रैली को रोक दिया गया।
रैली को सम्बोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य हमें बड़े संघर्षों और शहादतों के बदौलत मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य पुर्नगठन विधेयक में 26 संसोधन जो राज्य विरोधी रहे हैं, जिसमें आज भी उत्तर प्रदेश के हाथों राज्य कि संपत्ति पड़ी है, डबल इंजन कि सरकार होने के बावजूद परिसम्पतियों का बटवारा अधर में लटका है। उन्होंने कहा कि राज्य बने इन 21वर्षों में राज्य को भू माफियों के हवाले कर चुके हैं। बेहतशा राज्य की जमीने बिक चुकी हैं, एक सशक्त भू क़ानून अभी तक कोई सरकार नहीं बना पायी। जिससे कि राज्य कि जमीनों को बाहरी लोगों से बचाया जा सके। राज्य बनने के बाद मूल निवास और मूल निवासी कि पहचान नहीं हो पायी। उक्रांद मूल निवास 1950 लागू करने की मांग करते हैं।
बेरोजगारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बेरोजगारी को लेकर श्वेत पत्र जारी कर बेरोजगारी के आंकड़ों को सार्वजानिक करें। आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए नया अध्यादेश लायें, आंदोलनकारियों की सम्मान पेंशन की मांग दल करता है। प्रशिक्षित बेरोजगारों को अविलम्ब रोजगार उपलब्ध कराया जाय, सरकारी रिक्त पदों की भर्तियों की मांग दल करता हैं, आगामी विधानसभा चुनाव में उक्रांद अपनी सरकार बनाएगा व राज्य की जो परिकल्पना की थी वह शहीदों के स्वपनों का उत्तराखंड के लिए दृढ संकल्प है।
रैली मे दल के त्रिवेंद्र सिंह पंवार, बी डी रतूड़ी, हरीश पाठक, सुरेन्द्र कुकरेती, शिवानंद चमोली, ओमी उनियाल, देवेंद्र कांडवाल, डी डी जोशी, मोहन काला, सुनील ध्यानी, जय प्रकाश उपाध्याय, बहादुर रावत, आनंद सिलमाना, प्रताप कुंवर, किशन मेहता, प्रताप शाही, भानु जोशी, कुंदन बिष्ट, रविन्द्र वशिष्ठ, चौधरी विजेंद्र, मोहन उपाध्याय, महेन्द्र रावत, शांति भट्ट, सत्यप्रकाश सती, किशोरी नंदन डोभाल, देवेंद्र चमोली, विजय बौडाई, श्रीमती सरिता पुरोहित, रेखा मिंया, प्रमिला रावत, शकुंतला रावत, मीनाक्षी घिल्डियाल, सरला खंडूरी, दीपक रावत, किरन रावत, कश्यप शिवप्रसाद सेमवाल, सुलोचना इष्टवाल, सविता, कपिल डोभाल, राजेंद्र बिष्ट, पान सिंह रावत, अरबिंद बिष्ट, समीर मुंडेपी, सुरेश जुयाल, हरीश भट्ट, दिनेश नेगी, कमलकान्त, उत्तम रावत, सीमा रावत, राजेश पैन्यूली, सोमेश बुढ़ाकोटी, मनमोहन पंत, अभिषेक बहुगुणा, राज नितिन रावत, गणेश काला, वीरेंद्र रावत, दीपक मधवाल, अनिरुद्ध काला, मोहनी बंगारी, राजेश्वरी रावत, सीमा रावत, बी सी रावत, आनंद ताड़ियाल, युद्धबीर चौहान, कैलाश भट्ट, अनिल डोभाल, विनीत सकलानी, विपिन रावत, केंद्रपाल तोपवाल, राजेंद्र नौटियाल, देवेंद्र रावत, सुरेश आर्य, विष्णु कांत शुक्ला, सुमित डंगवाल, संजय बहुगुणा, आनंद सिंह असगोला, जब्बर सिंह पावेल, कुंवर सिंह राणा, अब्बल सिंह भंडारी, केडी जोशी, अनिरुद्ध काला, शशि नेगी, नरेश बोनथीयाल, हेमंत नेगी, शांति चौहान, अशोक नेगी, समीर मुखर्जी, डॉ वीरेंद्र सिंह, मीणा थपलियाल, तारदेवी, सरिता गुसाई, कमला आर्या, शांति चौहान, सरोजनी ममगईं, मंजू रावत, प्रशांत भट्ट, इंद्रपाल रौथान, निर्मला भट्ट, बचन दाई, बीना नेगी आदि थे।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा-
सेवा में,
श्रीमान पुष्कर सिंह धामी जी
माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार, देहरादून
’विषय- उत्तराखंड में सशक्त भू.कानून, मूल निवास आदि के सम्बन्ध में ज्ञापन।
महोदय,
निवेदन इस प्रकार है कि उत्तराखंड राज्य बने 21 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन खेद का विषय है कि यहां पर भाजपा और कांग्रेस की दो.दो बार सरकार बनने के बावजूद अभी तक राज्य सरकार सशक्त भू.क़ानून नहीं बना पाई है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि बाहरी भू माफियाओं द्वारा राज्य की बेशकीमती भूमि पर कब्जा हो चुका है। हमने पलायन रोकने, रोजगार, पर्यटन विकास, मूल निवास आदि को लेकर ऐतिहासिक आंदोलन कर पृथक राज्य की मांग की थी, राज्य बनने के बाद यहाँ का जनमानस अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है। राज्य सरकारों ने जन भावनाओं की परवाह नहीं की है, इसलिए यहाँ का युवा वर्ग इन ज्वलंत मुद्दों को लेकर आंदोलित है। स्थिति दिन प्रति दिन विस्फोटक होती जा रही है। यदि इन मुद्दों पर सरकार पर सरकार की रीति.नीति सकारात्मक व सहयोगात्मक न रही तो कभी भी उग्र आंदोलन से इंकार नहीं किया जा सकता है। अतः उत्तराखंड क्रांति दल निम्न बिंदुओं पर सरकार से त्वरित कार्यवाही की पुरजोर मांग करता हैं कि-.
- उत्तराखंड में सशक्त भू.कानून शीघ्र लागू किया जाये ताकि बाहरी व्यक्ति यहाँ पर भूमि क़ी खरीद फरोख्त न कर सकें।
2.उत्तराखंड के मूलनिवासियों के लिए मूलनिवास क़ी समय सीमा 1950 को आधार बनाया जाय। - उत्तराखंड के मूल निवासियों के प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में स्थाई रोजागर प्रदान किया जाय।
- राज्य क़ी स्थाई राजधानी गैरसैंण घोषित किया जाय।
- राज्य आंदोलनकारियों को समान पेंशन दी जायें और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का अध्यादेश पुनः जारी किया जायें।
- राज्य में पर्यटन एवं तीर्थंटन क़ी ठोस एवं स्पष्ट नीति बनाई जाय।
- तीर्थ पुरोहितों क़ी मांग को गंभीरता पूर्वक लेते हुए देवस्थानम बोर्ड को भंग किया जाय।
- उत्तराखंड में ओबीसी के दायरे में आने वाले मूलनिवासियों को ही इस श्रेणी में लिया जाय।
- उपनल एवं अन्य एजेंसियों में संविदा में रखे गये सभी कर्मचारियों को शीघ्र नियमित किया जाय।
- आशा कार्यकर्तियों का मानदेय कम से कम रु0 10,000 दस हजार प्रतिमाह किया जाय।
- डीएलएड बीएड प्रशिक्षित युवाओं को उनकी योग्यतानुसार नियुक्ति प्रदान किया जाये।











