थराली से हरेंद्र बिष्ट।
तो क्या जिला पंचायत चमोली में उपाध्यक्ष के पद पर कोई नई खिचड़ी पक रही है? गुरुवार को जिला पंचायत चमोली में जिला नियोजन समिति के सदस्यों के लिए हुए चुनाव में जिस तरह के समीकरण सामने आए हैं उससे तो कुछ इसी तरह के संकेत मिल रहे हैं।
लंबी प्रतिक्षा के बाद नैनीताल हाईकोर्ट के दिशा.निर्देश पर राज्य सरकार को मजबूरन प्रदेश के 12 जिलों में पौने दो वर्ष के बाद डीपीसी का गठन करना पड़ा। इसके तहत गुरुवार को चमोली में भी डीपीसी के चुनाव सम्पन्न हो गऐ हैं। इस के तहत 16 सदस्यों ने मतदान में भाग लिया जबकि भाजपा समर्थित 10 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। परंतु इस चुनाव में जो तस्वीर सामने आई है, उससे साफ दिखाई पड़ रहा है कि जिला पंचायत चमोली में अभी भी सब कुछ ठीक.ठाक नहीं चल रहा है।
दरअसल पिछले महीने जिला पंचायत के उपाध्यक्ष एवं पिंडर घाटी के नारायणबगड़ के कोठली जिला पंचायत वार्ड से सदस्य लक्ष्मण सिंह रावत ने जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी एवं राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र भंडारी के खिलाफ कई कथित अनियमितता के आरोप लगाए थे।जिस पर अध्यक्ष, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेसी पृष्ठभूमि के जिला पंचायत सदस्यों ने आरोपों का कड़ा खंडन करते हुए, सदस्यों ने बकायदा उपाध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही। अगर पिछले दिनों हुए डीपीसी चुनावों पर नजर डालें तो यह तय माना जा रहा है कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष को लेकर सब कुछ ठीक.ठाक नहीं चल रहा है।
पिंडर घाटी के थरालीए देवाल एवं नारायणबगड़ विकासखंडों में कुल जिला पंचायत के 7 वार्डों के सदस्यों में से 5 सदस्यों को डीपीसी के लिए चुना गया। और जिला पंचायत उपाध्यक्ष को मात्र एक ही मत मिला है। जोकि स्वंयम उनका अपना माना जा रहा हैं। इसके बाद माना जा रहा हैं कि उपाध्यक्ष रावत की कुर्सी पर खतरें के बादल मंडरा रहे हैं।











